Sheshnag 150 Drone: शेषनाग 150 स्वदेशी डीप-स्ट्राइक स्वॉर्म ड्रोन ने शुरुआती परीक्षणों में लगभग पांच मीटर CEP सटीकता दिखाई. यह 1000 किमी रेंज, एआई आधारित नेविगेशन और जीपीएस जामिंग से सुरक्षित संचालन में सक्षम है. कम लागत और झुंड रणनीति के जरिए यह दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली को कमजोर करने में कारगर साबित हो सकता है.
Sheshnag 150 Drone: भारत की लंबी दूरी और स्वायत्त (ऑटोनॉमस) स्ट्राइक सिस्टम की दिशा में बढ़त को नई मजबूती मिली है. एक रक्षा उद्योग रिपोर्ट के अनुसार, न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज द्वारा विकसित शेषनाग 150 डीप-स्ट्राइक स्वॉर्म ड्रोन ने शुरुआती उड़ान परीक्षणों में लगभग पांच मीटर के सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) के साथ सटीक लक्ष्य भेदन क्षमता दिखाई है. कम लागत वाले सिस्टम के लिए यह सटीकता बताती है कि ऐसे प्लेटफॉर्म अब महंगे गाइडेड हथियारों की बराबरी करने लगे हैं.
शेषनाग 150 को इस सोच के साथ डिजाइन किया गया है कि संख्या, तालमेल और सामूहिक हमले के जरिए दुश्मन की मजबूत रक्षा व्यवस्था को भी कमजोर किया जा सके. किसी एक महंगे प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहने के बजाय, यह सिस्टम कई ड्रोन के झुंड (स्वॉर्म) के रूप में काम करता है. 150 नाम यह भी संकेत देता है कि यह एक बड़े ड्रोन परिवार का हिस्सा है, जिसमें अलग-अलग पेलोड, रेंज और मिशन प्रोफाइल के अनुसार बदलाव किए जा सकते हैं.
शेषनाग की ड्रोन गैंग बेहद एडवांस
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसका सहयोगी स्वायत्त सॉफ्टवेयर है. इसके जरिए कई ड्रोन आपस में संवाद करते हैं, खुद को संगठित करते हैं और बिना ज्यादा मानवीय हस्तक्षेप के अपने हमले की रणनीति बदल सकते हैं. यानी ये ड्रोन अकेले नहीं, बल्कि एक नेटवर्क की तरह काम करते हैं. वे रियल-टाइम में लक्ष्य संबंधी जानकारी साझा करते हैं और उड़ान मार्ग में बदलाव कर सकते हैं. इससे दुश्मन की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली पर एक साथ दबाव बनाया जा सकता है.
एयर डिफेंस का काल बनेगा स्वदेशी ड्रोन
यह रणनीति वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे एट्रिटेबल प्लेटफॉर्म मॉडल से मेल खाती है. ऐसे सिस्टम जो इतने सस्ते हों कि युद्ध में जोखिम उठाया जा सके, लेकिन प्रभावी भी हों. बड़ी संख्या में ड्रोन लॉन्च करके दुश्मन के इंटरसेप्टर मिसाइल भंडार को तेजी से खत्म किया जा सकता है. जब उसकी रक्षा प्रणाली थक जाए या कमजोर पड़े, तो बचे हुए ड्रोन अहम ठिकानों पर सटीक हमला कर सकते हैं. नेविगेशन के मामले में भी शेषनाग 150 उन्नत है. यह केवल सैटेलाइट आधारित जीपीएस पर निर्भर नहीं है, बल्कि विजन-आधारित नेविगेशन और ऑनबोर्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करता है. यह जमीन की बनावट और चिन्हों को पहचानकर दिशा बनाए रख सकता है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक युद्ध या जीपीएस जामिंग की स्थिति में भी यह अपना लक्ष्य नहीं खोता.
1000 किलोमीटर में ड्रोन मचाएगा तबाही
शेषनाग करीब 1,000 किलोमीटर की परिचालन रेंज के साथ यह ड्रोन सीमाओं से काफी दूर स्थित दुश्मन के ठिकानों जैसे लॉजिस्टिक्स हब, एयरफील्ड या कमांड सेंटर को निशाना बना सकता है. इससे लॉन्च प्लेटफॉर्म को सुरक्षित क्षेत्र में रहकर भी लंबी दूरी के हमले करने की सुविधा मिलती है. 2025 की शुरुआत में हुए बड़े पैमाने के परीक्षणों में इसकी उड़ान क्षमता और सटीकता की पुष्टि हुई. बाद में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी सफल परीक्षण किए गए, जो हिमालयी तैनाती जैसी परिस्थितियों के अनुरूप थे. पतली हवा में स्थिर उड़ान और विश्वसनीय मार्गदर्शन किसी भी पर्वतीय थिएटर में उपयोग के लिए जरूरी मापदंड हैं.
ईरान के शहेद ड्रोन से शेषनाग की तुलना
शेषनाग की तुलना ईरान के शहेद-136 ड्रोन से कर सकते हैं, जो हाल के संघर्षों में चर्चित रहा है. हालांकि दोनों में “कम लागत, ज्यादा संख्या” की सोच समान है, लेकिन शेषनाग 150 की सहयोगी स्वायत्त क्षमता इसे अलग बनाती है. यह केवल पहले से तय निर्देशांक पर उड़ने वाला ड्रोन नहीं है, बल्कि समूह में मिलकर लक्ष्य चुनने और हमले की रणनीति बदलने में सक्षम है, जो भविष्य के मानवरहित युद्ध सिद्धांत की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
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सौरभ पाल का नाता उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से है. इन्होंने अपनी पढ़ाई देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय- इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से की है. सौरभ को लिखने-पढ़ने का शौक है. …और पढ़ें
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