मेरठ. स्कूली बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही अब स्कूलों को भारी पड़ सकती है। अब तक निजी तौर पर स्कूली बच्चों को लाने ले जाने वाले स्कूली वाहन संचालकों की स्कूल संचालक जिम्मेदारी नही लेते थे, लेकिन परिवहन विभाग के नए आदेश के अनुसार निजी वाहन संचालकों को भी स्कूल से अनुबंध करना होगा। इसके बाद ही बतौर स्कूली वाहन संचालन कर सकेंगे। इसके लिए बकायदा परिवहन विभाग ने स्कूलों को नोटिस तक जारी किए हैं।
कराना होगा अनुबंध
गौरतलब है कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवहन विभाग ने मानक तय किए हैं, लेकिन शहर के कुछ स्कूलों को छोड़ दें तो अधिकतर स्कूलों में मानकों की भरपूर अनदेखी होती है। अधिकतर स्कूलों में निजी वाहन संचालकों द्वारा स्कूल बच्चों को लाने ले जाने का काम किया जा रहा है। ऐसे में कुछ दुर्घटना हो जाए तो स्कूल संचालक इन वाहनों की जिम्मेदारी लेने से मना कर देते हैं। लेकिन अब ऐसा नही होगा। अब निजी स्कूली वाहन संचालकों की स्कूलों को जिम्मेदारी लेनी होगी। यानि स्कूल संचालक अपने स्कूल के बच्चों को लाने ले जाने वाले वाहनों के लिए अनुमति पत्र या अनुबंध देंगे। उस अनुबंध के आधार पर ही निजी वाहनों का स्कूली वाहनों के तौर पर संचालन होगा।
117 स्कूलों को जारी हुए नोटिस
अनुबंध के बाद स्कूली वाहनों के मानकों की जांच होगी। मानकों के आधार पर ही स्कूल वाहनों को बच्चों को लाने ले जाने के लिए अनुमति मिलेगी। वाहन चाहे छोटे हों या बड़े सभी को मानक पूरे करने होगें। इसके लिए आरटीओ कार्यालय द्वारा 117 स्कूलों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इन स्कूल संचालकों को मानक पूरा करने के लिए 15 अगस्त का समय दिया गया है। 15 अगस्त के बाद ऑन रोड चेकिंग अभियान चलेगा और मौके पर ही मानक पूरे ना करने वाले वाहनों के चालान काटे जाएंगे।
117 स्कूलों को नोटिस जारी किया जा चुका है। इसके लिए बकायदा जागरुकता सेशन भी परिवहन कार्यालय में लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। निजी वाहनों की भी स्कूलों को जिम्मेदारी लेनी होगी। इसके लिए अनुबंध पत्र देना होगा।
– राजेश कर्दम, एआरटीओ प्रवर्तन
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