अमेरिका ने ईरान के शाहेद-136 पर आधारित LUCAS ड्रोन किया तैयार, यह हत्यारा फारस की खाड़ी में लिखेगा नई कहानी – Zee News

US LUCAS suicide drone: ईरान लंबे समय से कम लागत वाले ड्रोन का इस्तेमाल करता रहा है. इन्हें अपने सहयोगी समूहों को भी देता रहा है. अमेरिका ने उसी मॉडल पर उन्नत तकनीक के साथ तैयार किया है. इसे मिरर डिटरेंस यानी दुश्मन को उसी के खिलाफ इस्तेमाल करने की कोशिश माना जा रहा है.
US LUCAS suicide drone: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी सेना की टास्क फोर्स ‘स्कॉर्पियन स्ट्राइक’ अब LUCAS नाम के लो-कॉस्ट आत्मघाती ड्रोन को ऑपरेशनल करने जा रही है.  यह ड्रोन ईरान के मशहूर Shahed-136 ड्रोन पर आधारित है. इसे रिवर्स-इंजीनियरिंग के जरिए अमेरिकी जरूरतों के हिसाब से बनाया गया है.
ईरान लंबे समय से कम लागत वाले ड्रोन का इस्तेमाल करता रहा है. इन्हें अपने सहयोगी समूहों को भी देता रहा है. अमेरिका ने उसी मॉडल पर उन्नत तकनीक के साथ तैयार किया है. इसे मिरर डिटरेंस यानी दुश्मन को उसी के खिलाफ इस्तेमाल करने की कोशिश माना जा रहा है.
क्या है LUCAS ड्रोन?
LUCAS (Low-cost Unmanned Combat Attack System) एक छोटा, डेल्टा-विंग डिजाइन वाला ड्रोन है. इसे अमेरिकी कंपनी SpektreWorks ने सैन्य इंजीनियरों के साथ मिलकर विकसित किया है. इसकी लंबाई करीब 10 फीट और पंखों का फैलाव 8 फीट है. इसकी अनुमानित कीमत लगभग 35000 डॉलर बताई जा रही है. जो क्रूज मिसाइल या फाइटर जेट ऑपरेशन के मुकाबले काफी कम है. यही कारण है कि इसे बड़ी संख्या में इस्तेमाल किया जा सकता है.
तकनीक में ईरान से आगे
जहां शाहेद-136 मुख्य रूप से GPS आधारित नेविगेशन सिस्टम पर निर्भर करता है. वहीं LUCAS में सैटेलाइट कम्युनिकेशन, AI आधारित टारगेटिंग और स्वार्म (झुंड) में हमले की क्षमता जोड़ी गई है. इससे एक साथ कई ड्रोन से हमला करने की क्षमता मिलती है. दिसंबर 2025 में अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत USS Santa Barbara (LCS-32) से LUCAS ड्रोन का सफल परीक्षण किया गया. यह परीक्षण फारस की खाड़ी में हुआ. 
यह जहाज United States Naval Forces Central Command के टास्क फोर्स 59 का हिस्सा है. जो मानव रहित सिस्टम पर काम करता है. LUCAS को जमीन के साथ-साथ समुद्र से भी लॉन्च किया जा सकता है. इससे अमेरिका की ऑपरेशन क्षमता मजबूत हो गई है.
स्कॉर्पियन स्ट्राइक की भूमिका
टास्क फोर्स स्कॉर्पियन स्ट्राइक 2025 में बनाई गई थी. यह यूनिट अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के तहत काम करती है. कम लागत वाले ड्रोन हमलों को तेज गति से ऑपरेशनल बनाने के लिए बनाई गई है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद महंगी मिसाइलों और फाइटर जेट मिशनों पर निर्भरता कम करना है. जरूरत पड़ने पर तेजी से जवाब देने की क्षमता बढ़ाना है.
क्षेत्रीय असर और बढ़ती चिंता
ईरान की ओर से इस कदम की आलोचना की गई है. इसे उकसाने वाला कदम बताया गया है. इससे फारस की खाड़ी में तनाव और बढ़ सकता है. अगर अमेरिका ईरान की जमीन के खिलाफ इसी तरह के ड्रोन तैनात करता है. तो यह सीधे टकराव की आशंका बढ़ा सकता है. इससे ड्रोन हथियारों की होड़ को भी तेज कर सकती है.
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सचेंद्र सिंह का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से है. इन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई ‘संगम नगरी’ प्रयागराज में स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की है. पढ़ने और लिखने में इनकी ऐसी रूचि रही कि इन्होंने पत्रकारिता जगत से जुड़कर अपना करियर बनाने की ठान ली. फिलहाल सचेंद्र ज़ी मीडिया समूह से जुड़कर ‘ज़ी भारत : ZEE Bharat’ के डिजिटल प्लेटफॉर्म में अपना योगदान दे रहे हैं. …और पढ़ें
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