अमेरिका ने पकड़े वेनेज़ुएला से जुड़े दो टैंकर, रूस ये बोला – BBC

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अमेरिका ने कहा है कि उसने वेनेज़ुएला से जुड़े दो तेल टैंकरों को ज़ब्त कर लिया है.
इनमें से एक टैंकर (जिसके बारे में बताया गया है कि उसमें कोई तेल नहीं था) उत्तरी अटलांटिक सागर में (आइसलैंड और ब्रिटेन के बीच) क़ब्जे़ में लिया गया. मैरिनेरा नाम के इस जहाज़ पर रूस का झंडा लगा था.
रूस के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से मांग की है कि वह "मैरिनेरा जहाज़ पर सवार रूसी नागरिकों के साथ मानवीय और उचित व्यवहार सुनिश्चित करे."
बीबीसी मॉनिटरिंग के मुताबिक़, मंत्रालय ने कहा है कि 'अमेरिका को रूस में उनकी जल्द से जल्द वापसी में बाधा नहीं डालनी चाहिए.'
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अमेरिकी तट रक्षक बल इस जहाज़ को वेनेज़ुएला के तट के पास रोकने के बाद इसका कई हफ़्तों से पीछा कर रहे थे. ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि इस दौरान टैंकर ने अपना नाम बदल लिया और रूसी झंडा लगा लिया.
वहीं ये भी रिपोर्ट्स हैं कि टैंकर को बचाने के लिए रूस की ओर से पनडुब्बी सहित सैन्य मदद रास्ते में थी, लेकिन उससे पहले ही टैंकर को ज़ब्त कर लिया गया.
दूसरा टैंकर, जो तेल लेकर जा रहा था और कैमरून के झंडे के तहत सफ़र कर रहा था. उसे कैरेबियन सागर में ज़ब्त किया गया.
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इस समय उसे अमेरिका के एक बंदरगाह की ओर सुरक्षा घेरे में ले जाया जा रहा है.
मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.
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रूस ने अपने झंडे के तहत चल रहे टैंकर को ज़ब्त किए जाने की कड़ी निंदा की है. रूस के परिवहन मंत्रालय ने कहा कि उसने इस जहाज़ (मैरिनेरा) को रूसी झंडा इस्तेमाल करने की अस्थायी अनुमति दी थी.
मंत्रालय ने यह भी कहा कि किसी भी देश को दूसरे देशों के अधिकार क्षेत्र में विधिवत रजिस्टर्ड जहाज़ों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है.
रूस के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से मांग की है कि वह "मैरिनेरा जहाज़ पर सवार रूसी नागरिकों के साथ मानवीय और उचित व्यवहार सुनिश्चित करे."
बीबीसी मॉनिटरिंग के अनुसार मंत्रालय ने कहा है कि 'अमेरिका को रूस में उनकी जल्द से जल्द वापसी में बाधा नहीं डालनी चाहिए.'
बीबीसी मॉनिटरिंग के रूस संपादक विटाली शेवचेंको के अनुसार इस घटना पर रूस की टिप्पणी जानबूझकर संयमित रही है, मानो इसका उद्देश्य अमेरिका को नाराज़ न करना या यह धारणा न बनाना हो कि मॉस्को रूसी झंडे वाले टैंकर की रक्षा करने पर आमादा है.
शेवचेंको के अनुसार, "कल, आधिकारिक समाचार एजेंसी तास ने विदेश मंत्रालय के हवाले से कहा कि वह 'असामान्य स्थिति पर गंभीरता से नज़र रख रहा है.' तास ने टैंकर को 'हमारा पोत' भी कहा. हैरानी की बात यह है कि इनमें से कोई भी बयान विदेश मंत्रालय के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रसारित नहीं हुआ और न ही मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया."
शेवचेंको बताते हैं कि टैंकर को ज़ब्त किए जाने के बाद, माहौल पहले तो शांत रहा, लेकिन अब थोड़ा बदल गया है.
उनके अनुसार, "रूसी परिवहन मंत्रालय का कहना है कि टैंकर के पास रूसी ध्वज फहराने की केवल 'अस्थायी अनुमति' थी, और किसी भी देश को दूसरे देशों के अधिकार क्षेत्र में पंजीकृत जहाज़ों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है."
रूसी अधिकारियों ने उन रिपोर्टों पर कोई टिप्पणी नहीं की है जिनमें कहा गया है कि मॉस्को ने टैंकर की सुरक्षा के लिए एक पनडुब्बी भेजी थी, लेकिन एक रायबार नाम की एक वेबसाइट ने दावा किया कि पनडुब्बी टैंकर के पास "24 घंटे देरी" से पहुंची थी.
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ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसने आज उत्तरी अटलांटिक में रूसी झंडे वाले टैंकर को ज़ब्त करने के अमेरिकी प्रयासों का समर्थन किया. मंत्रालय ने कहा है कि इस अभियान में रॉयल एयर फ़ोर्स (आरएएफ़) के विमान भी शामिल थे.
ब्रिटेन के रक्षा सचिव जॉन हीली ने इस बारे में ये बयान जारी किया है, "आज ब्रिटिश सशस्त्र सेनाओं ने रूस जा रहे जहाज़ बेला 1 को सफलतापूर्वक रोकने में अमेरिकी की मदद करते हुए कौशल का प्रदर्शन किया. यह कार्रवाई प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों पर नकेल कसने के वैश्विक प्रयासों का हिस्सा थी."
"एक कुख्यात इतिहास वाला यह जहाज़, प्रतिबंधों से बचने के रूसी-ईरानी गठबंधन का हिस्सा है जो मध्य पूर्व से लेकर यूक्रेन तक आतंकवाद और संघर्ष को बढ़ावा दे रहा है. ब्रिटेन अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, अपनी अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्थिरता की रक्षा के लिए गुप्त नौसैनिक बेड़े की गतिविधियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को तेज करना जारी रखेगा."
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जेम्स लैंडेल, राजनयिक संवाददाता
इससे पता चलता है कि डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफ़ा सैन्य कार्रवाई करने की इच्छा अभी भी कम नहीं हुई है.
वेनेज़ुएला के ख़िलाफ़ उनकी सैन्य आक्रामकता से यह बात निर्विवाद रूप से साबित हो गई. ऐसा लगता है कि वह टैंकरों पर कार्रवाई करके इस संदेश को और मज़बूत करना चाहते हैं.
ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब हमें नहीं पता, जिनमें यह भी शामिल है कि जहाज़ पर क्या क्या सामान लदा हुआ था.
यह अभियान दर्शाता है कि अमेरिका भले ही अकेले काम करना पसंद करता हो, लेकिन उसे सहयोगियों की भी ज़रूरत है.
अमेरिका इस तरह के अभियानों को अंजाम देने में इसलिए सक्षम है क्योंकि उसके पास दुनिया में बड़े सैन्य हवाई अड्डे हैं, जहां से अमेरिका ऐसे ऑपरेशन चला सकता है.
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