US airstrike Chabahar port: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के चाबहार फ्री ट्रेड-इंडस्ट्रियल जोन के पास स्थित सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोह लाकी इलाके में हुए इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में धमाकों की गूंज सुनाई दी. चाबहार भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम पोर्ट है, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का रास्ता देता है.
US airstrike Chabahar port: ईरान-अमेरिका का ईरान पर जॉइंट ऑपरेशन के 17 दिन हो चुके हैं. इसी बीच, अमेरिका ने एक ऐसे स्ट्रेटजिक लोकेशन पर एयर स्ट्राइक कर दी है. जिसका सीधा असर भारत के व्यापार पर पड़ने वाला है. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग अब और भी खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. सोमवार को अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान के चाबहार फ्री ट्रेड-इंडस्ट्रियल जोन यानी CFZ के बेहद करीब स्थित सैन्य ठिकानों पर जोरदार एयरस्ट्राइक की. इस हमले के बाद पूरे इलाके में डर का माहौल है और धुएं का गुबार देखा गया है.
अमेरिका ने ईरान में कहां किया हमला?
ईरान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण चाबहार इलाके में सोमवार को आसमान से आग बरसी. वॉयस ऑफ अमेरिका पर्शियन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने चाबहार फ्री ट्रेड जोन के ठीक पीछे स्थित कोह लाकी (Koh Laki) इलाके में सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया.
चश्मदीदों का कहना है कि हमले के वक्त इतने जोरदार धमाके हुए कि उनकी गूंज काफी दूर तक सुनाई दी. गौर करने वाली बात यह है कि यह संघर्ष अब अपने 17वें दिन में प्रवेश कर चुका है. इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2024 को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए थे, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत की खबर भी सामने आई थी. अब चाबहार जैसे व्यापारिक केंद्र के पास हमला होना दुनिया भर की चिंताएं बढ़ा रहा है.
क्या हुआ चाबहार के पास?
ताजा जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी जेट्स का मुख्य निशाना चाबहार फ्री जोन के पीछे स्थित कोह लाकी का पहाड़ी और सैन्य क्षेत्र था. यहां ईरान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने बताए जाते हैं. स्थानीय सूत्रों ने पुष्टि की है कि धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि लोग घरों से बाहर निकल आए. यह हमला उस समय हुआ है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और ईरान की जवाबी कार्रवाई की धमकियों के बीच अमेरिका अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है.
17 दिनों से जारी है भीषण जंग
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच यह सीधी जंग पिछले दो हफ्तों से ज्यादा समय से चल रही है. 28 फरवरी को जब इस युद्ध का आगाज हुआ, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह इतनी जल्दी चाबहार जैसे शांत और व्यापारिक महत्व वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाएगा. शुरुआती हमलों में ही ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत ने ईरान के शासन तंत्र को हिला कर रख दिया था. तब से अब तक लगातार दोनों ओर से वार-पलटवार का दौर जारी है.
चाबहार फ्री ट्रेड जोन की क्या है अहमियत?
चाबहार फ्री ट्रेड-इंडस्ट्रियल जोन ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है. इसकी स्थापना 1992 में विदेशी निवेश को खींचने और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए की गई थी. यह इलाका पाकिस्तान की सीमा के काफी करीब है. पिछले कुछ दशकों में यह ईरान के लिए एक बड़ा इंडस्ट्रियल और ट्रांजिट हब बनकर उभरा है. यही कारण है कि इसके पास सैन्य ठिकानों पर हमला होना ईरान की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों के लिए बड़ा झटका है.
भारत के लिए चाबहार क्यों है ‘लाइफलाइन’?
भारत के लिए चाबहार पोर्ट का महत्व किसी से छिपा नहीं है. यह पोर्ट भारत को सीधे अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने का रास्ता देता है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस रास्ते से भारत को पाकिस्तान जाने की जरूरत नहीं पड़ती. भारत ने इस पोर्ट के विकास में काफी पैसा और वक्त लगाया है.
साल 2024 में भारत ने इस पोर्ट को चलाने के लिए 10 साल का एक लंबा समझौता किया था. वहीं, यह इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का एक मुख्य हिस्सा भी है. इतना ही नहीं, भारत ने इसी रास्ते से 2023 में अफगानिस्तान को 20,000 टन गेहूं की मदद भेजी थी. इसके अलावा 2021 में ईरान को कीटनाशक भेजने के लिए भी इसी पोर्ट का इस्तेमाल हुआ था.
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प्रतिबंधों से छूट और मौजूदा संकट
अक्टूबर 2025 में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भारत को चाबहार पोर्ट के इस्तेमाल के लिए प्रतिबंधों से 6 महीने की छूट दी थी. भारत हमेशा से इसे मानवीय सहायता और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए इस्तेमाल करता रहा है. लेकिन अब जिस तरह से अमेरिका खुद चाबहार के नजदीकी इलाकों में बमबारी कर रहा है, उससे भारत की रणनीतिक योजनाओं पर असर पड़ सकता है. भारत शुरू से ही इस रूट के जरिए रूस और पूर्वी यूरोप तक पहुंच बनाने की कोशिश में जुटा है.
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आगे क्या होगा?
चाबहार के पास हुई इस एयरस्ट्राइक ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका अब ईरान के उन हिस्सों को भी निशाना बना रहा है जो आर्थिक रूप से रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं. कोह लाकी में हुए नुकसान का आकलन अभी किया जा रहा है, लेकिन इस हमले ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है. क्या ईरान अब भी शांति की बात करेगा या यह युद्ध और भीषण रूप लेगा, यह आने वाले कुछ दिन तय करेंगे.
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