Dragonfly 3 Suicide Drone: आर्मेनिया ने ड्रैगनफ्लाई 3 नाम का एक नया सुसाइड ड्रोन दिखाया है. इस ड्रोन का विंगस्पैन करीब 3 मीटर है. अधिकतम टेकऑफ वजन 42 किलोग्राम है. यह लगभग 5 किलोग्राम का पेलोड ले जा सकता है. इसकी उड़ान अवधि करीब एक घंटे बताई जा रही है. क्रूज स्पीड लगभग 126 किलोमीटर प्रति घंटा और ऑपरेशनल रेंज 120 किमी तक है.
Dragonfly 3 Suicide Drone: इजरायल के डिफेंस एक्सपोर्ट नेटवर्क को एक नए विवाद का सामना करना पड़ रहा है. आर्मेनिया ने हाल ही में एक नया लूटेरिंग म्यूनिशन यानी ‘सुसाइड ड्रोन’ पेश किया है. दावा किया कि उसकी तकनीक की जड़ें इजरायली सिस्टम से जुड़ी हो सकती हैं. इस खुलासे के बाद अजरबैजान नाराज बताया जा रहा है. जो इजरायल का करीबी सहयोगी रहा है. वहीं इस पूरे मामले में भारत का नाम भी चर्चा में आ गया है.
मामला साल 2020 के दूसरे नागोर्नो-कराबाख युद्ध से जुड़ी है. उस दौरान अजरबैजान ने इजरायल में बने लूटेरिंग म्यूनिशन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था. खास तौर पर Israel Aerospace Industries द्वारा बनाया गया IAI Harop उस युद्ध का घातक हथियार बनकर उभरा था. इसकी मारक क्षमता को अजरबैजान की बड़ी बढ़त के तौर पर देखा गया. यहां तक कि राष्ट्रपति Ilham Aliyev की हरॉप सिस्टम के साथ तस्वीर भी काफी चर्चित हुई थी.
सुसाइड ड्रोन की खासियत क्या है?
अब आर्मेनिया ने ड्रैगनफ्लाई 3 नाम का एक नया सुसाइड ड्रोन दिखाया है. इस ड्रोन का विंगस्पैन करीब 3 मीटर है. अधिकतम टेकऑफ वजन 42 किलोग्राम है. यह लगभग 5 किलोग्राम का पेलोड ले जा सकता है. इसकी उड़ान अवधि करीब एक घंटे बताई जा रही है. क्रूज स्पीड लगभग 126 किलोमीटर प्रति घंटा और ऑपरेशनल रेंज 120 किमी तक है.
भारत का भी नाम आया
इस विवाद में भारत का नाम इसलिए जुड़ रहा है. क्योंकि बीते कुछ सालों में भारत, इजरायल का बड़ा डिफेंस ग्राहक बनकर सामने आया है. Stockholm International Peace Research Institute के आंकड़ों के मुताबिक 2020 से 2024 के बीच इजरायल के कुल डिफेंस एक्सपोर्ट का बड़ा हिस्सा भारत को गया. मेक इन इंडिया नीति के तहत भारत विदेशी कंपनियों से तकनीक ट्रांसफर और लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर देता रहा है.
भारतीय प्रतिनिधिमंडल आर्मेनिया गए थे?
हाल ही में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने आर्मेनिया का दौरा किया. ड्रैगनफ्लाई 3 सिस्टम का निरीक्षण किया. यहीं अटकलें लगाई जा रही हैं कि इजरायल से भारत को ट्रांसफर हुई तकनीक या मैन्युफैक्चरिंग एक्सपर्टीज के जरिए आर्मेनिया को मदद मिली हो सकती है. हालांकि इस दावे की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
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इजरायल की कंपनी Israel Aerospace Industries ने इन दावों से दूरी बनाई है. कंपनी का कहना है कि वह रिपोर्ट में किए गए आकलनों को नहीं मानती है. उसके सभी अंतरराष्ट्रीय सहयोग, जिनमें भारत भी शामिल है. इजरायली कानून और डिफेंस एक्सपोर्ट कंट्रोल एजेंसी की निगरानी में होते हैं. आर्मेनिया के नए ड्रोन ने दक्षिण कॉकस क्षेत्र की पुरानी प्रतिस्पर्धा को फिर से चर्चा में ला दिया है. इजरायल के लिए यह संतुलन साधने की चुनौती है.
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सचेंद्र सिंह का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से है. इन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई ‘संगम नगरी’ प्रयागराज में स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की है. पढ़ने और लिखने में इनकी ऐसी रूचि रही कि इन्होंने पत्रकारिता जगत से जुड़कर अपना करियर बनाने की ठान ली. फिलहाल सचेंद्र ज़ी मीडिया समूह से जुड़कर ‘ज़ी भारत : ZEE Bharat’ के डिजिटल प्लेटफॉर्म में अपना योगदान दे रहे हैं. …और पढ़ें
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