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हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार आवाजों में से एक, आशा भोंसले अब इस संसार में नहीं हैं. रविवार को उनके निधन की खबर आने के बाद से ही बॉलीवुड फैन्स उन खूबसूरत यादों के समंदर में गोते लगा रहे हैं, जो आशा जी की आवाज की देन थीं. और आशा की आवाज याद करते हुए कई बार जेहन में एक चेहरा अपने आप उभर आता है— कैबरे क्वीन हेलेन. हेलेन का हिंदी फिल्मों में आना एक बगावत जैसा था, ऑलमोस्ट बगावत की तरह. और इस बगावत का ईंधन थी आशा की आवाज.
हेलेन के लिए और भी पॉपुलर फीमेल सिंगर्स ने गाने गाए थे. आशा की आवाज पर बाद में हेलेन जैसे और भी बागी चेहरों ने परफॉर्म किया. लेकिन आशा के साथ हेलेन की जोड़ी ऐसी थी जैसे दोनों एक ही किरदार का शरीर और आवाज हैं. ऐसे में एक दिलचस्प सवाल उठता है— ऐसा क्या था कि हेलेन और आशा एक दूसरे को ऐसे सूट करती थीं?
मजबूरी बनी अंदाज
हिंदी फिल्मों के प्लेबैक में आशा की एंट्री लेजेंड्स के बीच में हुई थी. शमशाद बेगम, गीता दत्त, सुरैया जैसी सिंगर्स का प्लेबैक पर राज था. खुद आशा की बड़ी बहन, लता मंगेशकर एक नई तरह की आवाज के साथ इंडस्ट्री में कामयाब होने लगी थीं. आशा ने कई बार बताया कि उन्हें शुरुआत में ऐसे गाने मिले जो बाकी टॉप सिंगर्स गाने के लिए राजी नहीं होती थीं.
कई बार ये गाने फिल्म की लीड एक्ट्रेस पर नहीं फिल्माए जाते थे. और कई बार ये गाने वेस्टर्न स्टाइल और फीमेल किरदार की रोमांटिक इच्छाओं का बयान होते थे, जो उस दौर के लिए एक नई बात थी. आशा ने अपने अंदाज से इन गानों को एक नया स्टाइल दिया, जिसके लिए उनकी पहचान बनने लगी.
बर्मा से माइग्रेट होकर आईं हेलेन के पास तब के ट्रेडिशनल हिंदी माहौल की ट्रेनिंग नहीं थी. उन्होंने एक्टिंग भी नहीं सीखी थी और घर चलाने की जरूरत ने उन्हें ये सब स्किल्स पॉलिश करने का मौका नहीं दिया था. इसलिए उन्होंने फिल्मों में बतौर बैकग्राउंड डांसर शुरुआत की और इस एक स्किल को ऐसा चमकाया कि इसके लिए वो नोटिस होने लगीं.
19 साल की उम्र में हेलेन का सोलो डांस नंबर ‘मेरा नाम चिन चिन चू’ जबरदस्त पॉपुलर हुआ, लेकिन उसे आवाज दी थी गीत दत्त ने. इसके बाद हेलेन की पॉपुलैरिटी बढ़ने लगी और तब शायद कंपोजर्स को उनके लिए एक ऐसी आवाज की जरूरत महसूस हुई जो उनके अंदाज को सूट कर सके. और ये अंदाज तब आशा की पहचान बनने लगा था. इस तरह हेलेन और आशा की जोड़ी बनी.
शंकर-जयकिशन ने शायद इसी खयाल के साथ फिल्म हलाकू (1956) में दो डांसर्स वाले आइटम नंबर ‘अजी चले आओ’ में लता और आशा को साथ में आजमाया. इस गाने में मीनू मुमताज के लिए लता गा रही थीं और हेलेन के लिए आशा. 1957 में फिल्म बड़ा भाई में हेलेन का एक चटपटा, शरारती और चुलबुले स्टाइल का डांस नंबर था— हेल्लो हेल्लो हेल्लो, हेल्लो हैदराबादी… कलकत्ता तुमसे आंख लड़ा और मुंबई होगा शादी!
अपने दौर के हिसाब से ये गाना काफी अलग स्टाइल का था और इसके लिए कंपोजर नाशाद (शौकत अली देहलवी) ने नई आवाज चुनी आशा की. हेलेन और आशा की जोड़ी बननी शुरू हो गई. मगर असली धमाका हुआ 1960-70 के दशक में. गंगा जमना (1961) के ‘तोरा मन बड़ा पापी’ में हेलेन स्क्रीन पर जो अदाएं दिखा रही थीं, आशा की आवाज उसे गाने में निभा रही थी.
हेलेन की अदाएं और आशा की वॉइस एक्टिंग
गुमनाम (1965) का गाना ‘पीके हम तुम जो चले आए हैं इस महफ़िल में’ इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि हेलेन और आशा की जोड़ी साथ में क्या करती थी. स्क्रीन पर हेलेन शराब के नशे में होने की एक्टिंग कर रही हैं. मगर सुरूर आशा की आवाज में है.
नशे में डूबीं हेलेन की चाल लड़खड़ा रही है, शरीर काबू में नहीं है. और गाने में हिचकियां आशा ले रही हैं, उनकी आवाज बीच-बीच में अचानक ऐसे डूबती है जैसे कोई पक्का शराबी, शराब में डूबता है.
60 के दशक में लोगों को पहले इसी बात से पसीने आने लगे कि स्क्रीन पर एक महिला किरदार शराब पीकर बेकाबू हुआ जा रहा है. ऊपर से ये बेतरतीबी आशा की आवाज में और अपीलिंग साउंड कर रही है. दोनों ने ये अंदाज फिर से दोहराया सच्चाई (1969) के गाने ‘कबसे धरी है सामने बोतल शराब की’ में.
हेलेन और आशा की जोड़ी का पीक मोमेंट 70 के दशक में आया. द ट्रेन (1970) के गाने ‘ओ मेरी जां मैंने कहा’ में हेलेन की अदाएं और गाना गाते हुए आशा का अपनी सांसों को तोड़ना-मरोड़ना, लोगों के पसीने छुड़ाने लगा. एक की इमेज स्क्रीन पर आग लगा रही थी, दूसरी की आवाज कानों से होकर दिमाग हिला रही थी. कारवां (1971) का ‘पिया तू अब तो आजा’ हेलेन और आशा की जुगलबंदी से फायर बन गया था.
‘शोला सा मन दहके आके बुझा जा’ को हेलेन की अदाएं आंच दे रही थीं, तो आशा की आवाज उसे शोला बना रही थीं. ये मैजिक डॉन (1978) के ‘ये मेरा दिल’ गाने में फिर अपने शबाब पर था. ये जोड़ी सिर्फ एक दूसरे को सूट नहीं करती थी, पूरा भी करती थी. हेलेन की अदाएं, डांस, आउटफिट और अदायगी से जो चीज छूट जाती थी, आशा की आवाज उसे भर देती थी. यही वजह है कि इस तरह के जिन डांस नंबर्स में आशा और हेलेन साथ नहीं थीं, उनमें भी दोनों के साथ होने का आभास होता था.
हेलेन के सबसे पॉपुलर गानों में से एक ‘कांटा लगा’, लता मंगेशकर ने गाया है. लेकिन लोगों की याददाश्त कई बार इस गाने को आशा के साथ जोड़ देती है. लता की गायकी के कद पर तो कभी कोई सवाल उठा ही नहीं सकता, वो इतनी परफेक्ट थीं. ‘कांटा लगा’ भी उन्होंने पूरा निभाया. मगर इस गाने में आपको सांसों की तोड़-मरोड़, आवाज का एकदम से सॉफ्ट हो जाने वाली आशा की वॉइस-एक्टिंग नहीं सुनाई देगी.
इसी तरह हेलेन का ‘तू मूंगड़ा’ भी लोगों को आशा का गाना लग जाता है. मगर ये लता और आशा की ही बहन, उषा मंगेशकर ने गाया है. लेकिन आपको ध्यान से सुनने पर फील हो जाएगा कि इसमें आशा की अदाकारी का मूड नहीं है, उषा का अल्हड़ अंदाज है. ये दोनों बातें अलग-अलग होती हैं. आशा की आवाज ही दोनों को अलग-अलग कर सकती थी.
आशा स्टाइल मूड की वजह से ही ‘मैंने होंठों से लगाई तो हंगामा हो गया’ सिर्फ ऑडियो में सुनने पर लग सकता है कि इसमें हेलेन होंगी. मगर अनहोनी (1973) का ये गाना 70s में हेलेन की तरह कई वैम्प कैरेक्टर करने वालीं बिंदु पर फिल्माया गया है. इसी तरह हेलेन वाले गाने जैसा फील देने वाला ‘रात अकेली है बुझ गए दिए’ में तनुजा और ‘दिलबर दिल से प्यारे’ में अरुणा ईरानी हैं.
हेलेन और आशा के गाने बागी तेवर वाले थे. ये जोड़ी लोगों को शॉक कर देती थी, सिनेमा में फीमेल किरदारों के प्रेजेंटेशन को चैलेंज करती थी. इस जोड़ी के गाने हिंदी सिनेमा में मॉडर्न होते फीमेल किरदारों की पहचान बने. हेलेन और आशा के गानों की बात करते ही एक पूरी पीढ़ी के चेहरे पर आज भी वो भाव आ जाता है कि ‘क्या बवाल किया था दोनों ने!’
इसलिए एक बार आशा काअ हेलेन को ये कहना कि ‘मैं ने एक बार हेलेन को कहा था आशा भोंसले के निधन पर जब हेलेन हिंदुस्तान टाइम्स से कहती हैं ‘मुझे बनाने में उनका बहुत बड़ा रोल था’, तो एक सच्चे बॉलीवुड फैन को इस जोड़ी का वो जादू याद आता है जो फिर से नहीं क्रिएट हो सकता!
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