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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मॉरीशस में 9वें हिंद महासागर सम्मेलन में पश्चिम एशिया की स्थिति पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने नागरिकों, बुनियादी ढांच …और पढ़ें
सुनिश्चित हो दोबारा ना हो पश्चिम एशिया संघर्ष- जयशंकर (फाइल फोटो)
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में शांति को लेकर इस्लामाबाद में शनिवार को वार्ता शुरू होने से कुछ घंटे पहले भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पूरे हालात पर भारत की स्थिति साफ तौर पर रखी।
उन्होंने कहा कि भारत नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने तथा समुद्री आवागमन को बाधित करने का कड़ा विरोध करता है। जयशंकर ने जोर दिया कि इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है।
साथ ही कहा कि हमें उन मूल मुद्दों का समाधान निकालना चाहिए जिससे इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न ना हो। जयशंकर मारीशस में 9वें इंडियन ओसियन कांफ्रेंस में यह बात कही।
जयशंकर ने कहा कि, “इन अशांत समय में, पश्चिम एशिया की स्थिति स्पष्ट रूप से हमारे विशेष ध्यान की मांग करती है। हम सभी इस संघर्ष को लेकर गहरी चिंता में हैं और हम शीघ्र ही सामान्य स्थिति में वापसी देखना चाहते हैं। हम नागरिकों, बुनियादी ढांचे और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने का दृढ़ता से विरोध करते हैं।”
उन्होंने कहा, “यह अत्यंत आवश्यक है कि नौवहन सुरक्षित और निर्बाध बना रहे। यहां सबसे प्रासंगिक बात यह है कि हममें से प्रत्येक ने इस संघर्ष के आर्थिक प्रभाव को बहुत गहराई से महसूस किया है। जब ऊर्जा दुर्लभ और महंगी हो जाती है, तो इसका पूरे समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।”
जयशंकर ने कहा, “जब व्यापार सीमित हो जाता है, तो यह केवल कारोबार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में आजीविका पर असर डालता है। जब उर्वरक प्राप्त करना अधिक कठिन हो जाता है, तो इसके खाद्य सुरक्षा पर स्पष्ट परिणाम होते हैं। ये वे तात्कालिक चुनौतियां हैं जो इस सम्मेलन में हमारी मुलाकात के समय हमारे सामने हैं। लेकिन कुछ बुनियादी मुद्दे भी हैं जिन्हें हमें संबोधित करना चाहिए, क्योंकि यह कोई गारंटी नहीं है कि ऐसी स्थितियाँ दोबारा नहीं आएंगी।”
इस कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और अन्य पड़ोसी देशों के नेताओं से अलग-अलग मुलाकातें कीं। इन बैठकें में हिंद महासागर क्षेत्र में साझा नीति और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। उन्होंने ‘पड़ोसी प्रथम’ के तहत क्षेत्रीय एकजुटता पर जोर दिया।
गौरतलब है कि इन चर्चाओं में पाकिस्तान को शामिल नहीं किया गया है। जयशंकर ने इस बारे में अपनी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने पहले नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल से मुलाकात की। फिर भूटान के विदेश मंत्री डी एन ढुंगयेल से मुलाकात की। इस बैठक में बांग्लादेश के विदेश मंत्री डा. खलीलुर रहमान, ओमान, मारीशस व सेशेल्स के विदेश मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया था।
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