ईरानी Fattah और Fattah-2 मिसाइल की एंट्री, हवा में रास्ता बदलकर रडार को लगाएगी चूना; अमेरिकी ठिकानों का होगा बुरा हाल – Zee News

Iran Fattah-2 hypersonic missile: फतह-2 इससे एक कदम आगे है. इसमें पुरानी री-एंट्री व्हीकल की जगह ‘हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल’ लगाया गया है. यह हवा में ऊंची गति से ग्लाइड करते हुए दिशा बदल सकता है. कई दिशाओं में घूमकर हमला कर सकता है. ऐसे हथियारों को रोकना मौजूदा मिसाइल रक्षा सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है.
Iran Fattah-2 hypersonic missile: ईरान ने 28 फरवरी को फतह बैलिस्टिक मिसाइल के लॉन्च का वीडियो जारी किया. इसके अगले ही दिन 1 मार्च को फतह-2 मिसाइल दागे जाने की भी खबर सामने आई. फतह-2 को फतह का उन्नत वर्जन बताया जा रहा है.  अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमला किया गया. ऐसे समय में इन दोनों मिसाइलों के लॉन्च से ईरान की ताकत में इजाफा होगा. 
क्या खास है फतह और फतह-2 में?
फतह मिसाइल में नई पीढ़ी का ‘मैन्युवरिंग री-एंट्री व्हीकल’ लगाया गया है. यह टारगेट के पास पहुंचते समय दिशा बदल सकती है. इससे इसे रोकना मुश्किल हो जाता है. इसकी मारक क्षमता करीब 1400 किमी बताई जाती है. यह अंतिम समय में मैक 13 से मैक 15 की रफ्तार पकड़ सकती है.
फतह-2 और भी घातक
फतह-2 इससे एक कदम आगे है. इसमें पुरानी री-एंट्री व्हीकल की जगह ‘हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल’ लगाया गया है. यह हवा में ऊंची गति से ग्लाइड करते हुए दिशा बदल सकता है. कई दिशाओं में घूमकर हमला कर सकता है. ऐसे हथियारों को रोकना मौजूदा मिसाइल रक्षा सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है.
ईरान ने बड़ी संख्या में सामान्य बैलिस्टिक मिसाइलें भी दागीं. इनका मकसद दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को थकाना या कमजोर करना था. इसके बाद फतह और फतह-2 जैसी महंगी और उन्नत मिसाइलों का इस्तेमाल अहम ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया. कतर में एक मिसाइल डिफेंस रडार को निशाना बनाया गया है. इन मिसाइलों का इस्तेमाल ताकत का प्रदर्शन है. ताकि दिखाया जा सके कि ईरान के पास अभी और भी विकल्प मौजूद हैं.
रक्षा सिस्टम के लिए चुनौती
इजरायल का एरो सिस्टम और अमेरिकी सेना का THAAD जैसे सिस्टम तेज रफ्तार मिसाइलों को रोकने के लिए बनाए गए हैं. लेकिन हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल दिशा बदलते हुए उड़ सकता है. इससे उसे ट्रैक करना और इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल हो जाता है.तकनीकी और लागत का सवाल
फतह-2 को फतह से कहीं अधिक जटिल और महंगा माना जा रहा है. हाइपरसोनिक तकनीक में 2000 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान सहने की क्षमता है. खास कंपोजिट मटेरियल और बेहद सटीक नेविगेशन सिस्टम की जरूरत होती है. हालांकि यह साफ नहीं है कि ईरान के पास इन मिसाइलों की संख्या कितनी है. लेकिन अगर इनका बड़े पैमाने पर उत्पादन हुआ है. यह पश्चिमी और इजरायली मिसाइल रक्षा योजनाओं के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.
पहले भी हुआ इस्तेमाल
ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps ने 18 जून 2025 को दावा किया था कि फतह मिसाइल का इस्तेमाल इजरायली ठिकानों के खिलाफ किया गया था. इसे ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस III’ का हिस्सा बताया गया. यह इजरायल की मिसाइल रक्षा को भेदने में सफल रही. फतह और फतह-2 मिसाइलों की तैनाती ने पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष को और खतरनाक बना दिया है. अगर हाइपरसोनिक तकनीक बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती है. आने वाले समय में मिसाइल रक्षा की पूरी रणनीति बदल सकती है.
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सचेंद्र सिंह का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से है. इन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई ‘संगम नगरी’ प्रयागराज में स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की है. पढ़ने और लिखने में इनकी ऐसी रूचि रही कि इन्होंने पत्रकारिता जगत से जुड़कर अपना करियर बनाने की ठान ली. फिलहाल सचेंद्र ज़ी मीडिया समूह से जुड़कर ‘ज़ी भारत : ZEE Bharat’ के डिजिटल प्लेटफॉर्म में अपना योगदान दे रहे हैं. …और पढ़ें
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