ईरान जंग के बीच ट्रंप की धमकी बेअसर! स्पेन ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों को खदेड़ा, क्या NATO में होने वाली है बड़ी बगावत? – Zee News

Spain US conflict NATO crisis: ईरान युद्ध के बीच स्पेन ने अमेरिका के लड़ाकू विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है, जिससे NATO में बड़ी दरार के संकेत मिल रहे हैं. प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज के इस फैसले से अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन प्रभावित हुए हैं और बॉम्बर्स को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है. ट्रम्प ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए व्यापारिक प्रतिबंध की धमकी दी है.
Spain US conflict NATO crisis: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे महायुद्ध ने अब यूरोप के अंदर भी एक बड़ी दरार पैदा कर दी है. दरअसल, स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने अमेरिका के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपने देश के हवाई क्षेत्र अमेरिकी युद्धक विमानों के लिए बंद कर दिए हैं. फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध के शुरुआती दिनों से ही स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज इस सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते रहे हैं. वे यूरोप के इकलौते ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं जिन्होंने खुल कर इस युद्ध का विरोध किया है.
ठन गई है आर-पार की जंग 
स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गरीटा रोबल्स ने सोमवार को एलान किया कि अब से ईरान पर हमले में शामिल किसी भी अमेरिकी विमान को स्पेन के आसमान से गुजरने की इजाजत नहीं दी जाएगी. उन्होंने साफ कहा, “हमने मोरोन और रोटा सैन्य बेस का इस्तेमाल ईरान युद्ध के लिए करने से मना कर दिया है. हमने अमेरिकी सरकार को यह शुरू से ही स्पष्ट कर दिया था.”
स्पेन के इस सख्त फैसले का मतलब है कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ के तहत उड़ने वाले अमेरिकी बॉम्बर्स और टैंकर विमान अब स्पेन की सीमा में नहीं घुस सकेंगे. इसका सीधा असर अमेरिकी हमले की क्षमता पर पड़ा है. करीब 15 KC-135 टैंकर विमानों को मजबूरन स्पेन छोड़कर फ्रांस और जर्मनी जाना पड़ा है.
वहीं, अमेरिका को अपने खतरनाक B-52 और B-1 बॉम्बर्स के लिए अब इंग्लैंड के फेयरफोर्ड एयर बेस का सहारा लेना पड़ रहा है. स्पेन के इस कदम ने न केवल अमेरिका की सैन्य रणनीति को पेचीदा बना दिया है, बल्कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पेड्रो सांचेज के बीच एक बड़ा व्यापारिक और कूटनीतिक युद्ध भी छेड़ दिया है.
कैसे फंस गया वॉशिंगटन?
स्पेन के हवाई क्षेत्र को बंद करने से अमेरिका के सामने कई तकनीकी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं.
फ्यूल और बम का गणित: अमेरिकी बॉम्बर्स अब इंग्लैंड से उड़ान भर रहे हैं. हालांकि उनके पास ईरान तक जाने की रेंज है, लेकिन दूरी ज्यादा होने के कारण उन्हें ईंधन ज्यादा भरना पड़ रहा है. विज्ञान यह कहता है कि जितना ज्यादा ईंधन, उतने ही कम बम. यानी अब अमेरिकी विमान पहले के मुकाबले कम हथियार ले जा पा रहे हैं.
फ्रांस का जोखिम: इंग्लैंड से उड़ने वाले विमानों को उत्तर से दक्षिण तक पूरा फ्रांस पार करना पड़ता है. अगर पेरिस ने भी इजाजत नहीं दी, तो उन्हें पूरे आइबेरियन प्रायद्वीप का चक्कर लगाकर जिब्राल्टर के रास्ते घुसना होगा, जो बहुत लंबा रास्ता है.
इमरजेंसी की छूट: स्पेन ने केवल एक ही रियायत दी है अगर किसी विमान को कोई आपातकालीन स्थिति आती है, तभी उसे लैंडिंग या ट्रांजिट की अनुमति मिलेगी.
ट्रम्प की धमकी- “स्पेन के साथ धंधा बंद कर दो”
प्रधानमंत्री सांचेज के इस फैसले से डोनाल्ड ट्रम्प बुरी तरह भड़क गए है. ट्रम्प ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान कहा, “स्पेन का व्यवहार बहुत खराब रहा है.” उन्होंने अपने ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट को आदेश दिया है कि स्पेन के साथ सभी व्यापारिक सौदे काट दिए जाएं.
वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अल-जजीरा से कहा कि अगर नाटो सदस्य केवल अपनी रक्षा के लिए अमेरिका का इस्तेमाल करेंगे और जरूरत पड़ने पर बेस नहीं देंगे, तो अमेरिका को इस गठबंधन में रहने पर दोबारा विचार करना होगा.
सांचेज की जिद के पीछे क्या कारण है?
आखिर 54 वर्षीय पेड्रो सांचेज अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश से क्यों टकरा रहे हैं? इसके पीछे कुछ गहरे राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं. सांचेज एक कमजोर गठबंधन सरकार चला रहे हैं, जिसमें छोटी वामपंथी पार्टियां और कैटलन अलगाववादी शामिल हैं. ये सभी दल अमेरिकी हस्तक्षेप के कट्टर विरोधी हैं. सांचेज को अपनी कुर्सी बचाने के लिए उनकी बात माननी पड़ रही है.
इतना ही नहीं, सांचेज पर और उनकी पत्नी पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं. जानकारों का मानना है कि ‘युद्ध विरोधी’ रुख अपनाकर वे जनता का ध्यान इन घोटालों से भटकाना चाहते हैं. स्पेन में हाल ही में हुए चुनाव दिखाते हैं कि वहां की जनता युद्ध के सख्त खिलाफ है. “नो टू वॉर” का नारा सांचेज को वोट दिलाने में मदद कर रहा है.
इजराइल पर भी लगाया है बैन
स्पेन केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि इजरायल के खिलाफ भी सख्त रहा है. पिछले अक्टूबर में स्पेन की संसद ने इजरायल पर पूर्ण हथियार प्रतिबंध लगाने का कानून पास किया था. सांचेज ने गाजा युद्ध के दौरान भी इजराइल की कड़ी आलोचना की थी, जिससे दोनों देशों के रिश्ते काफी खराब हो गए थे.
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प्रशांत सिंह के लेख रिसर्च-आधारित, फैक्ट-चेक्ड और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित होते हैं. ये जियोपॉलिटिक्स और रक्षा से जुड़ी खबरों को आसान हिंदी में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. …और पढ़ें
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