Iran Anti Ship Cruise Missile: इस मिसाइल की मारक दूरी 1000 किलोमीटर से अधिक है. इससे अब ईरान की पहुंच फारस की खाड़ी से आगे बढ़कर अरब सागर तक हो गई है. इस मिसाइल का नाम अबू महदी अल-मुहंदिस के नाम पर रखा गया है. जो साल 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए थे. इसे ईरान सख्त संदेश और सैन्य ताकत के प्रतीक के रूप में पेश कर रहा है.
Iran Anti Ship Cruise Missile: ईरान ने अपनी नई लंबी दूरी की एंटी-शिप क्रूज मिसाइल Abu Mahdi missile को तैनात कर दिया है. इस कदम को तेहरान की समुद्री सुरक्षा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. इस मिसाइल की मारक दूरी 1000 किलोमीटर से अधिक है. इससे अब ईरान की पहुंच फारस की खाड़ी से आगे बढ़कर अरब सागर तक हो गई है. इस मिसाइल का नाम अबू महदी अल-मुहंदिस के नाम पर रखा गया है. जो साल 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए थे. इसे ईरान सख्त संदेश और सैन्य ताकत के प्रतीक के रूप में पेश कर रहा है.
यह मिसाइल अमेरिकी नौसेना के लिए नई चुनौती बन सकती है. खासकर अरब सागर में तैनात विमानवाहक पोत जैसे USS Abraham Lincoln अब ईरान की संभावित मारक सीमा में आ सकते हैं. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के नौसेना प्रमुख ने कहा है कि इस मिसाइल का उद्देश्य दुश्मन को ईरानी तट से दूर रखना है. ईरान का दावा है कि यह मिसाइल दुश्मन के युद्धपोतों, फ्रिगेट और डेस्ट्रॉयर को निशाना बना सकती है.
मिसाइल की खासियत क्या है?
ईरान के अनुसार Abu Mahdi missile एक टर्बोजेट इंजन से चलने वाली क्रूज मिसाइल है. इसका वजन लगभग 1650 किग्रा है. इसमें करीब 410 किलोग्राम का वारहेड है. यह समुद्र की सतह के बहुत करीब उड़ान भरती है. जिससे रडार से पकड़ना मुश्किल हो जाता है. ईरान का दावा है कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित गाइडेंस सिस्टम और ड्यूल-सीकर तकनीक लगी है. जो इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बीच भी टारगेट तक पहुंचने में मदद करती है.
मिसाइलों का मकसद क्या है?
यह मिसाइल ईरान की एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल (A2/AD) रणनीति का हिस्सा है. इसका मकसद दुश्मन की नौसेना को ईरानी तट के करीब आने से रोकना है. पहले ईरान की मिसाइलें मुख्य रूप से होरमुज जलडमरूमध्य जैसे संकरे समुद्री मार्गों तक सीमित थीं. लेकिन अब नई मिसाइल खुले समुद्र तक खतरा बढ़ाती है. ईरान अपनी समुद्री रक्षा में ड्रोन, तेज हमला नौकाएं और अन्य छोटी दूरी की मिसाइलों को भी शामिल करता है. इससे चारों ओर से खतरा पैदा किया जा सके.
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इसका असर क्या पड़ेगा?
अरब सागर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए जरूरी समुद्री मार्ग है. इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य तनाव का असर तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है. यह मिसाइल अमेरिकी नौसेना के संचालन पैटर्न, दूरी और सुरक्षा व्यवस्था पर असर डाल सकती है.
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सचेंद्र सिंह का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से है. इन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई ‘संगम नगरी’ प्रयागराज में स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की है. पढ़ने और लिखने में इनकी ऐसी रूचि रही कि इन्होंने पत्रकारिता जगत से जुड़कर अपना करियर बनाने की ठान ली. फिलहाल सचेंद्र ज़ी मीडिया समूह से जुड़कर ‘ज़ी भारत : ZEE Bharat’ के डिजिटल प्लेटफॉर्म में अपना योगदान दे रहे हैं. …और पढ़ें
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