ईरान ने हिंद महासागर में भेजा अपना दूसरा युद्धपोत, समंदर में घात लगाए बैठी है अमेरिकी पनडुब्बी; क्या होगा श्रीलंका का फैसला? – Zee News

Iran warship Indian Ocean: हिंद महासागर में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपना दूसरा युद्धपोत श्रीलंका की समुद्री सीमा के करीब भेजा है. इससे क्षेत्र में सुरक्षा और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. इससे पहले एक ईरानी जहाज पर हमले की घटना ने हालात को और संवेदनशील बना दिया था. कोलंबो सरकार ने आपात बैठक बुलाकर स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है. भारत समेत कई देश क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा पर करीबी नजर बनाए हुए हैं.
Iran warship Indian Ocean: मिडिल ईस्ट की जंग अब हिंद महासागर तक पहुंच गई है. श्रीलंका के गाले तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत ‘आइरिस देना’ को टॉरपीडो मारकर डुबो दिया है, जिसमें 87 नाविकों की जान चली गई है. इस भीषण हमले के ठीक एक दिन बाद, ईरान का दूसरा युद्धपोत श्रीलंका की समुद्री सीमा के करीब पहुंच गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी मच गई है.
फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरूवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने एक आपातकालीन सुरक्षा बैठक बुलाई. मामला बेहद गंभीर है, ईरान ने अपने दूसरे युद्धपोत को सुरक्षा देने के लिए श्रीलंका से उसकी समुद्री सीमा में प्रवेश की अनुमति मांगी है. श्रीलंका को डर है कि अगर उसने ईरानी जहाज को पनाह दी, तो अमेरिकी सेना उस पर भी हमला कर सकती है.
यह तनाव तब शुरू हुआ जब बुधवार को भारत के विशाखापत्तनम से युद्धाभ्यास कर लौट रहे ईरानी जहाज ‘आइरिस देना’ को अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नष्ट कर दिया. इस हमले में 87 ईरानी नाविक मारे गए और दर्जनों अभी भी लापता हैं. श्रीलंका के अस्पतालों में 32 घायल ईरानी नाविकों का इलाज चल रहा है, जबकि गाले पोर्ट पर मारे गए सैनिकों के शव सौंपने की तैयारी की जा रही है.
आइरिस देना’ पर हुआ अटैक
अमेरिकी रक्षा मंत्री पेट हेगसेथ ने गर्व से इस हमले की पुष्टि की है. उन्होंने कहा, “एक अमेरिकी पनडुब्बी ने उस ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया जो खुद को अंतरराष्ट्रीय पानी में सुरक्षित समझ रहा था.” यह जहाज गाले से करीब 40 किलोमीटर दूर दक्षिण में डूबा.
जैसे ही जहाज पर हमला हुआ, उसने संकट का संदेश भेजा, लेकिन जब तक श्रीलंका की नौसेना वहां पहुंची, जहाज डूब चुका था. श्रीलंका के नौसेना प्रवक्ता बुद्धिका संपत ने बताया कि अभी भी लापता नाविकों के लिए तलाशी अभियान जारी है.
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श्रीलंका की बढ़ी मुश्किलें
ईरान का दूसरा युद्धपोत, जिस पर 100 से ज्यादा क्रू सदस्य सवार हैं, फिलहाल श्रीलंका की समुद्री सीमा के ठीक बाहर खड़ा है. श्रीलंका के मीडिया मंत्री नलिंदा जयतिस्सा ने संसद को बताया कि जहाज ने ‘सुरक्षा कारणों’ से श्रीलंका के पानी में आने की इजाजत मांगी है.
राष्ट्रपति दिसानायके के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि श्रीलंका पारंपरिक रूप से गुटनिरपेक्ष रहा है और ईरान उसके चाय निर्यात का एक बड़ा खरीदार भी है. अगर वे इजाजत देते हैं, तो अमेरिका के साथ रिश्ते बिगड़ सकते हैं और अगर नहीं देते, तो मानवीय आधार पर आलोचना हो सकती है.
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एस. जयशंकर ने की ईरान से बात
इस बढ़ते तनाव के बीच भारत भी पूरी तरह सतर्क है. भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार दोपहर को अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से फोन पर लंबी बात की. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि भारत क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर ‘गंभीर रूप से चिंतित’ है.
भारत की चिंता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में करीब 1 करोड़ भारतीय रहते हैं और भारत की ऊर्जा सप्लाई का रास्ता भी यहीं से गुजरता है. भारत ने बार-बार कूटनीति और बातचीत के जरिए युद्ध को खत्म करने की अपील की है.
12 से ज्यादा देश चपेट में
यह जंग अब सिर्फ ईरान और इजरायल के बीच नहीं रही है. अमेरिका द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ ने पूरी दुनिया को हिला दिया है.
ईरान- सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को मौत के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है.
यूएई और सऊदी अरब- ईरान ने दुबई के लग्जरी होटलों और सऊदी की तेल रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले किए हैं.
तुर्की और साइप्रस- यहां भी मिसाइलें गिरी हैं, जिससे नाटो (NATO) देश एक्टिव हो गए हैं.
फ्रांस और स्पेन- फ्रांस ने अपनी नौसेना को सुरक्षा के लिए तैनात किया है, जबकि स्पेन ने अमेरिका को अपने बेस इस्तेमाल करने से मना कर दिया है, जिससे डोनाल्ड ट्रम्प नाराज हैं.
आगे क्या होगा?
मौजूदा हालात बताते हैं कि ईरान का यह युद्ध अब कंट्रोल से बाहर हो चुका है. श्रीलंका जैसे शांतिप्रिय देश का इसमें खिंचा चले आना वैश्विक सुरक्षा के लिए अच्छा संकेत नहीं है. अगर ईरान के दूसरे जहाज पर भी हमला होता है, तो हिंद महासागर का यह क्षेत्र एक नए युद्ध के मैदान में बदल जाएगा.
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प्रशांत सिंह के लेख रिसर्च-आधारित, फैक्ट-चेक्ड और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित होते हैं. ये जियोपॉलिटिक्स और रक्षा से जुड़ी खबरों को आसान हिंदी में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. …और पढ़ें
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