ईरान में रहते हैं कितने भारतीय, ज्यादातर क्या करने जाते हैं वहां? अब तुरंत छोड़ना होगा देश – News24 Hindi

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ईरान में बढ़ते तनाव और हिंसक विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए भारत सरकार ने वहां रह रहे अपने नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की है. विदेश मंत्रालय ने 14 जनवरी 2026 को नई गाइडलाइन जारी करते हुए भारतीयों को तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह दी है और गैर-जरूरी यात्रा पर पूरी तरह रोक लगा दी है. मिडिल ईस्ट में अमेरिका की तरफ से मिली ताजा धमकियों के बाद हालात बेहद नाजुक हो गए हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर भारतीय छात्रों के वीडियो भी सामने आ रहे हैं जो वहां लगे कर्फ्यू और महंगाई के कारण हो रहे दंगों की कहानी बयां कर रहे हैं. तेहरान और अन्य बड़े शहरों में रह रहे करीब 10 हजार से ज्यादा भारतीयों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली में हलचल तेज है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ईरान में इस वक्त लगभग 10,000 से अधिक भारतीय प्रवासी (NRI और PIO) मौजूद हैं. इनमें सबसे बड़ी चिंता उन 1500 से 2000 छात्रों की है जो वहां मेडिकल और धार्मिक शिक्षा ले रहे हैं. खास बात यह है कि इनमें जम्मू-कश्मीर के छात्रों की तादाद काफी ज्यादा है. ये छात्र तेहरान, मशहद और कोम जैसे शहरों में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं. इसके अलावा चाबहार बंदरगाह और तटीय इलाकों में भारतीय कामगार और इंजीनियर तैनात हैं जो सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं. भारत सरकार इन सभी के साथ दूतावास के जरिए लगातार संपर्क बनाए हुए है ताकि किसी भी आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित निकाला जा सके.
यह भी पढ़ें: भारतीय आर्मी चीफ की हुंकार से हड़बड़ाया मुनीर, हाई अलर्ट पर है पाकिस्तानी सेना… आखिर किस बात का डर?
ईरान में बिगड़ते हालात को देखते हुए एक बार फिर बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन की चर्चा शुरू हो गई है. भारत का इतिहास रहा है कि संकट के समय उसने अपने नागरिकों को कभी अकेला नहीं छोड़ा. 1990-91 में कुवैत से 1.70 लाख भारतीयों को सुरक्षित लाना दुनिया का सबसे बड़ा नागरिक बचाव अभियान माना जाता है. हाल ही में 2025 में ‘ऑपरेशन सिंधु’ के जरिए भी भारतीयों को निकाला गया था. हालांकि अभी एयरलिफ्ट की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन तेहरान स्थित दूतावास ने सभी भारतीयों को प्रदर्शन वाले इलाकों से दूर रहने और अपनी जानकारी अपडेट रखने को कहा है. प्रशासन किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील कर रहा है.
ईरान के तेहरान, मशहद, जाहेदान और बंदर अब्बास जैसे प्रमुख शहरों में भारतीय समुदाय मुख्य रूप से व्यापार और शिक्षा से जुड़ा है. वहां महंगाई के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने अब राजनीतिक अस्थिरता का रूप ले लिया है जिसके कारण शाम 6 बजे के बाद कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया जाता है. भारतीय छात्र और व्यापारी इस समय घरों में कैद रहने को मजबूर हैं. हालांकि ईरान के राजदूत ने भारतीयों की गिरफ्तारी की खबरों को गलत बताया है, लेकिन जमीन पर हालात सामान्य नहीं हैं. भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा सर्वोपरि है और नागरिकों को सलाह दी है कि स्थिति बिगड़ने से पहले ही वे कमर्शियल उड़ानों के जरिए स्वदेश वापस लौट आएं.
ईरान में बढ़ते तनाव और हिंसक विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए भारत सरकार ने वहां रह रहे अपने नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की है. विदेश मंत्रालय ने 14 जनवरी 2026 को नई गाइडलाइन जारी करते हुए भारतीयों को तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह दी है और गैर-जरूरी यात्रा पर पूरी तरह रोक लगा दी है. मिडिल ईस्ट में अमेरिका की तरफ से मिली ताजा धमकियों के बाद हालात बेहद नाजुक हो गए हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर भारतीय छात्रों के वीडियो भी सामने आ रहे हैं जो वहां लगे कर्फ्यू और महंगाई के कारण हो रहे दंगों की कहानी बयां कर रहे हैं. तेहरान और अन्य बड़े शहरों में रह रहे करीब 10 हजार से ज्यादा भारतीयों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली में हलचल तेज है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ईरान में इस वक्त लगभग 10,000 से अधिक भारतीय प्रवासी (NRI और PIO) मौजूद हैं. इनमें सबसे बड़ी चिंता उन 1500 से 2000 छात्रों की है जो वहां मेडिकल और धार्मिक शिक्षा ले रहे हैं. खास बात यह है कि इनमें जम्मू-कश्मीर के छात्रों की तादाद काफी ज्यादा है. ये छात्र तेहरान, मशहद और कोम जैसे शहरों में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं. इसके अलावा चाबहार बंदरगाह और तटीय इलाकों में भारतीय कामगार और इंजीनियर तैनात हैं जो सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं. भारत सरकार इन सभी के साथ दूतावास के जरिए लगातार संपर्क बनाए हुए है ताकि किसी भी आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित निकाला जा सके.
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ईरान में बिगड़ते हालात को देखते हुए एक बार फिर बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन की चर्चा शुरू हो गई है. भारत का इतिहास रहा है कि संकट के समय उसने अपने नागरिकों को कभी अकेला नहीं छोड़ा. 1990-91 में कुवैत से 1.70 लाख भारतीयों को सुरक्षित लाना दुनिया का सबसे बड़ा नागरिक बचाव अभियान माना जाता है. हाल ही में 2025 में ‘ऑपरेशन सिंधु’ के जरिए भी भारतीयों को निकाला गया था. हालांकि अभी एयरलिफ्ट की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन तेहरान स्थित दूतावास ने सभी भारतीयों को प्रदर्शन वाले इलाकों से दूर रहने और अपनी जानकारी अपडेट रखने को कहा है. प्रशासन किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील कर रहा है.
ईरान के तेहरान, मशहद, जाहेदान और बंदर अब्बास जैसे प्रमुख शहरों में भारतीय समुदाय मुख्य रूप से व्यापार और शिक्षा से जुड़ा है. वहां महंगाई के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने अब राजनीतिक अस्थिरता का रूप ले लिया है जिसके कारण शाम 6 बजे के बाद कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया जाता है. भारतीय छात्र और व्यापारी इस समय घरों में कैद रहने को मजबूर हैं. हालांकि ईरान के राजदूत ने भारतीयों की गिरफ्तारी की खबरों को गलत बताया है, लेकिन जमीन पर हालात सामान्य नहीं हैं. भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा सर्वोपरि है और नागरिकों को सलाह दी है कि स्थिति बिगड़ने से पहले ही वे कमर्शियल उड़ानों के जरिए स्वदेश वापस लौट आएं.
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