ईरान युद्ध के बीच मालदीव ने भारत से मांगा ईंधन, सरकार कर रही विचार – Jagran

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत पड़ोसी देशों को ऊर्जा आपूर्ति जारी रखे हुए है। ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में व्य …और पढ़ें
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत अपने पड़ोसी देशों को ऊर्जा आपूर्ति जारी रखे हुए है। उन्होंने कहा कि मालदीव सरकार ने भी हमसे पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों आधार पर संपर्क किया है।
इन अनुरोधों पर हमारी उपलब्धता और घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा ईंधन शोधक है, वाणिज्यिक समझौतों के तहत बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को ईंधन की आपूर्ति कर रहा है।
विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, मालदीव आमतौर पर अपने ईंधन का अधिकांश हिस्सा ओमान से प्राप्त करता है। मध्य पूर्व से तेल और तेल उत्पादों का परिवहन ईरान युद्ध के कारण बाधित हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया है।
जायसवाल ने कहा कि भारत मारीशस और सेशेल्स के साथ भी वर्तमान ऊर्जा स्थिति पर चर्चा कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘हमें अभी तक उनसे कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है।’ उन्होंने ने बताया कि भारत, ईरान और अन्य देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे अपने तेल और एलपीजी जैसे उत्पादों से भरे टैंकरों के सुरक्षित निकालने के लिए बातचीत कर रहा है।
अब तक भारत खाड़ी देशों से छह एलपीजी टैंकरों को निकालने में सफल रहा है। केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने बताया कि भारतीय ध्वज वाले अठारह जहाज अभी भी जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं।

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