ईरान: स्कूल अटैक में मारी गई लड़कियों को लेकर शोक और ग़ुस्सा, अमेरिका-इसराइल क्या कह रहे हैं? – BBC

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ईरान के एक स्कूल पर हुए हमले में मारी गई लड़कियों और स्टाफ़ को मंगलवार को दफ़ना दिया गया.
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि ये लोग अमेरिका और इसराइल की ओर से हुए हमले में मारे गए थे.
हालांकि अमेरिका ने अब तक हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है और कहा है कि वो जांच करवा रहा है कि हमला किसने किया है.
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक़, शनिवार को दक्षिणी ईरान के शहर मीनाब में लड़कियों के एक स्कूल पर हमला हुआ, जिसमें 160 से ज़्यादा लोग मारे गए. इनमें छात्राओं के अलावा स्कूल के स्टाफ़ के लोग भी शामिल थे.
यह हमला उस वक़्त हुआ जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान के सैन्य ठिकानों और लीडरशिप को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए थे.
बीबीसी ईरानी अधिकारियों की ओर से बताए गए मृतकों के आंकड़े की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं कर पाया है.
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यह स्कूल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के एक अड्डे के पास स्थित था.
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अमेरिकी सेना ने कहा है कि वह इस घटना से जुड़ी ख़बरों की जांच कर रही है, जबकि इसराइली सेना ने कहा है कि उसे उस क्षेत्र में किसी भी कार्रवाई की 'जानकारी नहीं' है.
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ईरान के सरकारी टेलीविज़न पर अंतिम संस्कार कार्यक्रम प्रसारित किया गया. इसमें शोक मनाने वाले सैकड़ों लोग सड़कों पर दिखाई दिए और उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि दी.
इस्लामिक रिपब्लिक के झंडे में लिपटे ताबूतों को भीड़ के बीच से ले जाया गया. इस बीच आसपास की आवाज़ें उन माता-पिता के दुख को बयां कर रहीं थीं जिन्होंने अपनी बेटियों को खोया है.
ईरानी अधिकारियों ने बताया कि शनिवार सुबह स्कूल पर तीन मिसाइलें दागी गईं. यह स्कूल आईआरजीसी के एक अड्डे से क़रीब 600 मीटर की दूरी पर था.
ईरान में हफ़्ते में छह दिन का काम होता है. वहां सप्ताह शनिवार से शुरू होता है, जो गुरुवार तक चलता है और शुक्रवार एकमात्र आधिकारिक अवकाश का दिन होता है.
इसका मतलब है कि हमले के समय स्कूल में लोगों की मौजूदगी की आशंका है.
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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने इस घटना को "बर्बर कृत्य" बताया और इसे "हमलावरों की ओर से किए गए अनगिनत अपराधों के रिकॉर्ड का एक और काला पन्ना" कहा.
देश के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची ने सोशल मीडिया पर 160 लोगों की कब्रें खोदे जाने की एक तस्वीर साझा की और लिखा, "मिस्टर ट्रंप की ओर से वादा की गई 'बचाव योजना' असल में ऐसी दिखती है."
बीबीसी ने विस्फोट के बाद के कुछ वीडियो क्लिप्स की पुष्टि की है. इनमें एक इमारत से धुआं उठता दिखाई देता है और आसपास भीड़ जमा है. कुछ लोग घबराहट में चीखते हुए भी सुनाई देते हैं.
अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठनों को अक्सर ईरान में वीज़ा देने से इनकार कर दिया जाता है, जिससे वहां जानकारी जुटाने की उनकी क्षमता काफ़ी सीमित हो जाती है.
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सोमवार को बीबीसी पत्रकार टॉम बेटमैन ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से पूछा कि क्या स्कूल की इमारत पर अमेरिकी मिसाइल से हमला हुआ था.
रुबियो ने जवाब में कहा, "अमेरिका जानबूझकर किसी स्कूल को निशाना नहीं बनाएगा. नागरिक ढांचे को निशाना बनाने में हमारी कोई रुचि नहीं है और साफ़ तौर पर ऐसा करने का कोई कारण भी नहीं है."
उन्होंने कहा, "मेरे पास इसकी जानकारी नहीं है कि यह कैसे हुआ, लेकिन यह स्पष्ट है कि अमेरिका किसी स्कूल को निशाना नहीं बनाएगा."
अमेरिकी मीडिया में जारी एक बयान में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने कहा, "हम इन ख़बरों को गंभीरता से ले रहे हैं."
उन्होंने कहा, "नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और अनजाने में होने वाले नुक़सान के जोखिम को कम से कम करने के लिए हम उपलब्ध सभी एहतियाती क़दम उठाते रहेंगे."
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