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उत्तराखंड शिक्षा विभाग की लापरवाही उजागर हुई है। यह गड़बड़ी शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाती है, साथ ही महंगी किताबें बेचने का आरोप भी है। …और पढ़ें
एनसीईआरटी की ओर से छापी गई हिंदी की पुस्तक मल्हार। जागरण
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। निजी विद्यालयों की मनमानी पर डंडा चला रहा शिक्षा विभाग खुद ही सवालों के घेरे में है।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें छापकर ज्यादा दामों पर बेचने और सरकारी स्कूलों में हिंदी की पाठ्यक्रम से बाहर हो चुकी पुस्तकें भेजने से जैसे कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में अधिकारियों से जवाब देते नहीं बन रहा है। वहीं, अब बाजार में बेचने को छापी गई कक्षा सात की हिंदी की मल्हार पुस्तक के आवरण (कवर) परिचय में गड़बड़ी उजागर हुई है।
उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा की ओर से छपवाई गई एनसीईआरटी के नए पाठ्यक्रम की यह किताब बाजार में बिक रही है, जिसका राज्य स्तर पर कवर पेज बदला गया है। राष्ट्रीय परिषद की किताब में गांव का सुंदर दृश्य, वर्षा और बरगद के पेड़ को छापा गया है।
किताब के अंदर आवरण परिचय में बैनियन ट्री लिखा गया है। चित्रांकन और ले-आउट के लिए जोएल गिल को श्रेय दिया गया है। जबकि, उत्तराखंड शिक्षा विभाग की ओर से छापी गई कक्षा सात की मल्हार पुस्तक के कवर पेज पर चित्र पूरी तरह से अलग है। इसमें बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं बारिश से बचाव करते नजर आ रहे हैं। लेकिन, इस किताब के आवरण परिचय में भी बैनियन ट्री ही छापा गया है।
शिक्षा विभाग ने किताब का मुख्य पेज तो बदल दिया, लेकिन आवरण परिचय में संशोधन नहीं किया गया, जिम्मेदार भले इसे छोटी सी चूक बताकर टाल दें, अध्ययन सामग्री के पहले ही पेज पर इस प्रकार की गड़बड़ी शिक्षा के सिस्टम पर सवाल खड़े करती है।
एनसीईआरटी ने कक्षा सात में हिंदी की मल्हार पुस्तक लागू की है। शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में सिलेबस से बाहर हो चुकी बसंत भाग-दो को भेज रहा है। जबकि, राज्य प्रकाशन की नई किताब बाजार में आ चुकी है। एनसीईआरटी किताब 65 रुपये में मिल रही है। जबकि, राज्य में छपवाई गई किताब का मूल्य 117.92 रुपये है।
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