एक फेल मिशन से पड़ी थी नेवी सील की नींव, 46 साल बाद ईरान का सीना चीर निकाल लाए अमेरिकी पायलट – AajTak

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नेवी सील टीम 6 अमेरिका की सबसे मजबूत और खास सैन्य यूनिट है. यह यूनिट दुनिया के सबसे मुश्किल और खतरनाक काम करती है. 2011 में इसने पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था. अब 2026 में इसी यूनिट ने ईरान के जाग्रोस पहाड़ों से एक घायल अमेरिकी पायलट को बचाया है. दोनों काम बहुत अलग-अलग थे लेकिन एक बात बिल्कुल एक जैसी थी – पूरी यूनिट बिना किसी नुकसान के वापस लौट आई. 
नेवी सील टीम 6 क्या है और यह कैसे बनी?
नेवी सील टीम 6 को DEVGRU भी कहते हैं. यह अमेरिकी नौसेना की स्पेशल फोर्स यूनिट है. यह 1980 में बनी थी जब ईरान में अमेरिकी हॉस्टेज बचाने का अभियान डेजर्ट वन फेल हो गया था. उस समय कई अमेरिकी सैनिक मारे गए थे. इसलिए अमेरिका ने फैसला किया कि एक ऐसी यूनिट बनाई जाए जो दुनिया में कहीं भी घुसकर सबसे मुश्किल काम कर सके. इस यूनिट के सदस्य बहुत कड़ी ट्रेनिंग लेते हैं. 
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उन्हें सालों तक समुद्र, जंगल, पहाड़ और शहर में लड़ने की ट्रेनिंग दी जाती है. वे बिना सोचे-समझे किसी भी मौसम में काम कर सकते हैं. वे रात में भी देख सकते हैं. चुपके से दुश्मन के पास पहुंच सकते हैं. टीम 6 के सदस्यों को SEAL कहते हैं जो Sea, Air and Land का छोटा रूप है. 
Navy SEAL Team 6
वे पानी से, हवा से और जमीन से हमला कर सकते हैं. उनकी ट्रेनिंग इतनी कठिन है कि सिर्फ कुछ ही लोग इसे पूरा कर पाते हैं. वे हमेशा तैयार रहते हैं कि अगर टेक्नोलॉजी दुश्मन के हाथ लग जाए तो उसे नष्ट कर दें.
2011 में ओसामा बिन लादेन का अभियान कैसा था?
2011 में नेवी सील टीम 6 ने पाकिस्तान के एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को मारा था. उस समय 24 SEAL कमांडो दो स्टेल्थ ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों में पाकिस्तान के अंदर घुसे. वे 40 मिनट तक जमीन पर रहे. उन्होंने बिन लादेन को मार गिराया और उसकी लाश ले गए.
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एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था लेकिन उन्होंने उसे जलाकर नष्ट कर दिया ताकि उसकी खास स्टेल्थ टेक्नोलॉजी पाकिस्तान या किसी दुश्मन के हाथ न लगे. पूरे अभियान में एक भी अमेरिकी सैनिक घायल नहीं हुई न मरा. सिर्फ दो हेलीकॉप्टर और 24 सैनिकों ने पूरा काम किया. यह एक स्कैलपेल की तरह था – छोटा, सटीक और बिना निशान छोड़े.
2026 में ईरान के जाग्रोस पहाड़ों में पायलट बचाव अभियान
3 अप्रैल को एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान ईरान के ऊपर गिर गया. उसमें बैठा वेपन सिस्टम ऑफिसर (WSO) पैराशूट से कूद गया. वह जाग्रोस पहाड़ों के कोहगिलुये और बोयर-अहमद प्रांत में 7000 फुट ऊंची पहाड़ी पर उतरा. उसके पास सिर्फ एक पिस्तौल, एक एन्क्रिप्टेड बीकन और SERE ट्रेनिंग थी.
Navy SEAL Team 6
SERE ट्रेनिंग मतलब दुश्मन के इलाके में छिपकर जीने की ट्रेनिंग. वह 24 घंटे से ज्यादा समय तक पहाड़ों में छिपा रहा. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) और स्थानीय बख्तियारी कबीले वाले उसे ढूंढ रहे थे. ईरानी टीवी पर उसके लिए इनाम की घोषणा कर दी गई थी.
अमेरिका ने पूरा जोर लगाया. सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशंस सैनिक, दर्जनों फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर, साइबर, स्पेस और खुफिया एजेंसियां सब काम पर लग गईं. इजरायल ने भी मदद की. इजरायली खुफिया एजेंसी ने IRGC के सैनिकों की रीयल टाइम लोकेशन बताई. इजरायली एयर फोर्स ने 36 घंटे के लिए अपने हमले रोक दिए ताकि बचाव का रास्ता साफ रहे. CIA ने धोखा देने वाली खबरें फैलाईं ताकि ईरानी सैनिक गलत जगह जाएं.
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बचाव टीम ने इस्फहान से 50 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में एक पुरानी एयरस्ट्रिप पर फॉरवर्ड आर्मिंग और रीफ्यूलिंग पॉइंट बनाया. दो MC-130J कमांडो II ट्रांसपोर्ट प्लेन और AH-6 लिटिल बर्ड हेलीकॉप्टर उतरे. लेकिन दोनों बड़े प्लेन वहां अटक गए. नेवी सील टीम 6 के ऑपरेटर्स ने उन्हें नष्ट कर दिया. उन्होंने चार्ज लगाकर क्लासिफाइड एवियोनिक्स, कम्युनिकेशन सिस्टम और सॉफ्टवेयर उड़ा दिए ताकि ईरानी उन्हें न पा सकें. 
फिर उन्होंने और प्लेन बुलाए. तीन और ट्रांसपोर्ट प्लेन आए. गोलीबारी के बीच लैंड किए. SEAL टीम 6 ने घायल WSO को और फंसे हुए रेस्क्यू टीम को ले लिया. सब सुरक्षित ईरान से बाहर निकल गए. कोई भी अमेरिकी मरा या घायल नहीं हुआ. WSO को कुवैत ले जाकर इलाज किया गया. यह अमेरिका का 2026 ईरान जंग में पहला कन्फर्म्ड ग्राउंड ऑपरेशन था.
नेवी सील टीम 6 के हथियार और उपकरण क्या हैं?
नेवी सील टीम 6 के पास दुनिया के सबसे आधुनिक और घातक हथियार होते हैं. वे HK416 असॉल्ट राइफल इस्तेमाल करते हैं. यह राइफल बहुत सटीक है, कम रिकॉइल देती है और रेगिस्तान, पहाड़ या समुद्र किनारे हर जगह काम करती है. इसके साथ वे Mk48 मशीन गन रखते हैं जो भारी फायरिंग के लिए बनी है. लंबे समय तक लगातार गोली चला सकती है. 
Navy SEAL Team 6
उनकी पिस्तौल Sig Sauer P226 या Glock 17 होती है जो क्लोज रेंज में बहुत तेज और भरोसेमंद है. लंबी दूरी से निशाना लगाने के लिए Mk 13 स्नाइपर राइफल और कभी-कभी .50 कैलिबर Barrett स्नाइपर राइफल भी ले जाते हैं जो एक किलोमीटर दूर से भी दुश्मन को मार सकती है.
उनके पास नाइट विजन गॉगल्स और थर्मल इमेजिंग डिवाइस होते हैं जिनसे वे अंधेरे में भी दुश्मन को साफ देख सकते हैं. बॉडी आर्मर उन्हें गोली से बचाता है. उनके पास एन्क्रिप्टेड रेडियो और सैटेलाइट कम्युनिकेशन डिवाइस होते हैं ताकि वे अमेरिका से सीधे बात कर सकें. वे छोटे ड्रोन और स्पेशल विस्फोटक चार्ज भी ले जाते हैं जो सिर्फ टेक्नोलॉजी नष्ट करने के लिए इस्तेमाल होते हैं. 
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2011 और 2026 दोनों अभियानों में उन्होंने हेलीकॉप्टर और प्लेन नष्ट किए क्योंकि उन्हें पता था कि अगर दुश्मन को स्टेल्थ टेक्नोलॉजी या क्लासिफाइड सॉफ्टवेयर मिल गया तो वह बहुत बड़ा नुकसान होगा. उनका सिद्धांत बहुत साफ है – हथियार और मशीनें खर्च हो सकती हैं लेकिन जान और सीक्रेट टेक्नोलॉजी नहीं.
दोनों अभियानों में समानता और फर्क क्या था?
2011 का एबटाबाद अभियान छोटा स्कैलपेल था – सिर्फ दो हेलीकॉप्टर और 24 SEAL. साल 2026 का देहदाश्त (ईरान) अभियान बड़ा स्लेजहैमर था जो स्कैलपेल में लिपटा हुआ था. 2011 में सिर्फ SEAL टीम ने काम किया. 2026 में सैकड़ों सैनिक, दर्जनों विमान, हेलीकॉप्टर, साइबर टीम, स्पेस सैटेलाइट और इजरायली मदद सब लगे. लेकिन मूल काम SEAL टीम 6 ने ही किया. दोनों बार उन्होंने अपनी मशीनें नष्ट कीं ताकि टेक्नोलॉजी न बचे. 
दोनों बार कोई अमेरिकी नहीं मरा. 1980 का डेजर्ट वन फेल हुआ था लेकिन 2026 का देहदाश्त सफल रहा. वही यूनिट जिसे डेजर्ट वन की असफलता के बाद बनाया गया था, अब 46 साल बाद उसी ईरान में सफल हो गई. 
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