एपस्टीन फ़ाइल्स में नाम आने के बाद यूएई में हंगामा, कारोबारी सुलतान अहमद सुलायेम ने दिया इस्तीफ़ा – BBC

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यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन से जुड़ी फ़ाइलों में नाम आने के बाद दुबई के वैश्विक पोर्ट ऑपरेटर डीपी वर्ल्ड के चेयरमैन और सीईओ सुल्तान अहमद बिन सुलायेम को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा है.
हाल में जारी एपस्टीन फ़ाइल्स से पता चला है कि अमीराती मुग़ल ने एक दशक के अंदर एपस्टीन के साथ सैकड़ों ईमेल्स का आदान-प्रदान किया था.
हालांकि, इन फ़ाइलों में नाम आने को किसी भी तरह के अपराध का प्रमाण नहीं माना गया है और बीबीसी ने सुलायेम से प्रतिक्रिया मांगी है.
डीपी वर्ल्ड ने पिछले शुक्रवार को घोषणा की कि सुलायेम का इस्तीफ़ा 'तत्काल प्रभाव' से लागू हो गया है. कंपनी ने एस्सा काज़िम को नया चेयरमैन और युवराज नारायन को मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है. कंपनी की वेबसाइट से सुलायेम की तस्वीर भी हटाए जाने की भी सूचना है.
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डीपी वर्ल्ड दुबई के स्वामित्व वाली लॉजिस्टिक्स कंपनी है, जो छह महाद्वीपों में पोर्ट टर्मिनल संचालित करती है और वैश्विक व्यापार ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. हाल के दिनों में कंपनी पर उसके साझेदारों की ओर से दबाव बढ़ा है.
बीते सप्ताह की शुरुआत में ब्रिटेन की डेवलपमेंट फ़ाइनेंस एजेंसी और कनाडा की दूसरी सबसे बड़ी पेंशन फ़ंड ला कैस ने कंपनी में नए निवेश को निलंबित करने की घोषणा की.
इसके अलावा, एपस्टीन फ़ाइल्स में नाम आने के बाद डीपी वर्ल्ड की फ़ंडिंग पाने वाली प्रिंस ऑफ़ वेल्स की संस्था अर्थशॉट प्रोजेक्ट ने यूके चैरिटी कमीशन को रिपोर्ट किया है.
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इन दस्तावेजों से पता चलता है कि खाड़ी के सबसे प्रभावशाली शख़्सियत और एपस्टीन के बीच बहुत क़रीबी और कई तरह के रिश्ते थे. एपस्टीन ने सुलायेम का परिचय अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कारोबार से जुड़े कई लोगों से ईमेल के जरिए कराया. साल 2016 में सुलायेम ने प्रिंस ऑफ़ वेल्स को डीपी वर्ल्ड के लंदन गेटवे पोर्ट का दौरा भी कराया था.
दो अमेरिकी सांसदों रो खन्ना और थॉमस मैसी ने आरोप लगाया कि सुलायेम एपस्टीन फ़ाइल्स में आए 'छह प्रभावशाली लोगों' में से एक हैं. अमेरिकी न्याय विभाग को जिस क़ानून के तहत पिछले साल एपस्टीन फ़ाइल्स को सार्वजनिक करना पड़ा, उसका समर्थन इन दोनों सांसदों ने किया था. इनका कहना है कि कुछ दस्तावेजों में अनुचित तरीके से संपादन किया गया.
नौ फ़रवरी को मैसी ने जिन दस्तावेजों का ज़िक्र किया उनमें 2009 का एक ईमेल शामिल बताया गया है, जिसमें एपस्टीन ने कथित तौर पर 'टॉर्चर वीडियो' का ज़िक्र किया था.
ईमेल प्राप्त करने वाले ने जवाब में चीन और अमेरिका के बीच यात्रा की बात कही थी. ईमेल का पूरा संदर्भ स्पष्ट नहीं है.
अमेरिकी अधिकारियों ने खुलासा किया कि वह ईमेल सुलायेम को भेजा गया था.
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बीबीसी न्यूज़ अरबी के अनुसार, ईमेल से संकेत मिलता है कि सुलायेम और एपस्टीन के बीच साल 2007 से ही संपर्क था. ईमेल रिकॉर्ड बताते हैं कि दोनों के बीच घनिष्ठ संबंध विकसित हुआ. वे एक-दूसरे को यात्रा योजनाएं, कारोबारी सलाह और संपर्कों के साथ छपे समाचार साझा करते थे. वे फूहड़ जोक्स भी एक दूसरे को भेजते थे.
जून 2013 के एक ईमेल में एपस्टीन ने सुलायेम को 'अपने सबसे भरोसेमंद दोस्तों में से एक' बताया. दोनों ने दुबई में 'इस्लामिक' डिज़िटल मुद्रा शुरू करने जैसे कारोबारी विचारों पर चर्चा की.
कई ईमेल्स में यह भी संकेत मिलता है कि सुलायेम ने अपने, अपनी बेटी और परिवार के अन्य सदस्यों के स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर भी एपस्टीन से सलाह ली.
रिकॉर्ड से पता चलता है कि दोनों के बीच संपर्क कम से कम 2017 तक जारी रहा. यह अवधि एपस्टीन की 2008 की पहली आपराधिक सज़ा के बाद की है, जिसमें उन्हें 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को देह व्यापार के लिए मजबूर करने का दोषी ठहराया गया था.
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जारी ईमेल से संकेत मिलता है कि सुल्तान अहमद बिन सुलायेम और जेफ़री एपस्टीन के बीच कई संदेशों में उनके आसपास की लड़कियों और महिलाओं पर चर्चा हुई. हालांकि, इन ईमेल का संदर्भ हर बार स्पष्ट नहीं है.
2013 में सुलायेम की ओर से भेजे गए एक ईमेल में दो महिलाओं के आने का ज़िक्र बताया गया है. इसमें एक "मोल्दावियन" महिला को उसकी तस्वीर की तुलना में कम आकर्षक बताया गया, जबकि "यूक्रेनियन" की तारीफ़ की गई.
चार साल बाद के ईमेल से पता चलता है कि सुलायेम ने एपस्टीन की "निजी मसाज थेरेपिस्ट" को तुर्की के एक होटल में सभी उपचारों का प्रशिक्षण दिलाने की व्यवस्था की. होटल के एक संपर्क ने तब पुष्टि की थी कि उसे "विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम" दिया जाएगा. ईमेल से यह भी पता चलता है कि संबंधित महिला के पास रूसी पासपोर्ट था.
साल 2015 के एक अलग ईमेल में सुलायेम ने एपस्टीन से कहा कि उन्हें लगता है "रूस सभी सुंदर महिलाओं का सोर्स है."
दो अलग-अलग ईमेल, जिन्हें सुलायेम की ओर से भेजा गया बताया गया, में उन्होंने एक आयरिश और एक उज़्बेक गर्लफ्रेंड के होने की बात कही. 2017 में एक ईमेल में उन्होंने लिखा, "ये मेरी नई 22 वर्षीय उज़्बेक (गर्लफ़्रेंड) है." इस पर एपस्टीन ने जवाब में उसकी उम्र को लेकर टिप्पणी की और लिखा, "उसके पासपोर्ट के अनुसार अब वो 23 की है, ओल्ड."
सालों साल चले ईमेल्स के आदान-प्रदान से संकेत मिलता है कि सुलायेम विवाहित थे और एक समय पर उनकी दो पत्नियां थीं.
कम से कम एक मौके पर सुलायेम ने अपने मित्र को अश्लील और नस्लवादी चुटकुले भी भेजे.
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इन दस्तावेज़ों से पता चलता है कि एपस्टीन ने सुलायेम की ओर से लॉर्ड मैंडेलसन के साथ लॉबिंग की. उस समय मैंडेलसन ब्रिटेन के बिज़नेस सेक्रेटरी थे. सुलायेम अपनी कंपनी को लंदन गेटवे पोर्ट संचालित करने की अनुमति दिलाने की कोशिश कर रहे थे.
अक्तूबर 2009 के एक ईमेल में एपस्टीन ने मैंडेलसन से कहा था, "सुल्तान के साथ अच्छा व्यवहार करें."
ईमेल सिरीज़ से यह संकेत भी मिलता है कि इससे कुछ सप्ताह पहले सुलायेम और मैंडेलसन के बीच एक बैठक तय की गई थी, जिसका मक़सद ब्रिटिश सरकार को डीपी वर्ल्ड के साथ डील के लिए राज़ी करना था.
दस्तावेजों के अनुसार, एपस्टीन ने सुलायेम को मैंडेलसन के लिए एक पत्र का मसौदा तैयार करने में मदद की और बिज़नेस सेक्रेटरी का निजी ईमेल पता भी साझा किया.
हालांकि यह साफ़ नहीं है कि एपस्टीन की इस भूमिका से परियोजना की अंतिम मंज़ूरी पर कोई असर पड़ा या नहीं. हालांकि, आदान-प्रदान से संकेत मिलता है कि वह सुलायेम और वरिष्ठ राजनीतिक हस्तियों के बीच अनौपचारिक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे.
इस मामले में मैंडेलसन की ओर से किसी ग़लत आचरण का संकेत नहीं है. इस मामले में बीबीसी ने उनसे टिप्पणी मांगी है.
मार्च 2016 के एक ईमेल में सुलायेम ने एपस्टीन को बताया कि उन्होंने लंदन गेटवे पोर्ट पर प्रिंस विलियम का स्वागत किया और अगले दिन बकिंघम पैलेस में उनके साथ एक कार्यक्रम में शामिल हुए. एपस्टीन ने जवाब में "फ़न" लिखा.
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दस्तावेज़ों में ऐसे ईमेल शामिल हैं जिनसे संकेत मिलता है कि एपस्टीन ने सुलायेम का परिचय अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कारोबार से जुड़े कई लोगों से कराया. इनमें इसराइल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुद बराक और डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सलाहकार स्टीव बैनन का नाम शामिल है.
बाद के पत्राचार से पता चलता है कि सुलायेम और ये हस्तियां सीधे ईमेल के जरिए संवाद कर रहे थे, जबकि एपस्टीन को कॉपी में रखा जाता था या संदेश उन्हें भी भेजा जाता था.
साल 2015 के एक ईमेल में, जिसे सुलायेम की ओर से भेजा गया बताया गया, यह पूछा गया कि क्या एपस्टीन ने एलन मस्क से उनका "प्रस्ताव" साझा किया है. हालांकि, प्रस्ताव का विवरण नहीं दिया गया.
दस्तावेज़ों के अनुसार, एपस्टीन ने कीनिया, सेनेगल, गैबॉन और डीआर कांगो के अफ्रीकी राष्ट्रपतियों से परिचय कराने की पेशकश भी की थी. बीबीसी ने जो दस्तावेज़ देखे हैं, उससे यह स्पष्ट नहीं है कि यह पेशकश स्वीकार की गई या नहीं.
साल 2017 में सुलायेम ने ट्रंप के राष्ट्रपति शपथ ग्रहण समारोह के निमंत्रण को लेकर एपस्टीन से सलाह मांगी. उन्होंने लिखा, "क्या मुझे निमंत्रण स्वीकार करना चाहिए," और यह भी पूछा कि क्या "ट्रंप से हाथ मिलाना" संभव होगा.
साल 2013 के एक ईमेल में सुलायेम ने बताया कि उन्हें तत्कालीन प्रिंस एंड्रयू ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के सम्मान में आयोजित एक लंच में आमंत्रित किया था.
कई ईमेल्स में सुलायेम के न्यूयॉर्क स्थित एपस्टीन के घर या अमेरिकी वर्जिन आइलैंड्स में उनके द्वीप पर जाने की योजनाओं पर चर्चा का भी ज़िक्र है. दोनों नियमित रूप से एक-दूसरे को अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्रा योजनाओं की जानकारी देते थे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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