मध्य भारत में पोहा लोगों के जीवन का एक अहम अंग है। इंदौर जैसे शहर की हवा में पोहे की महक आती है। अब इसी पोहे की पैकिंग को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में पोहे की पैकिंग करते कुछ लोग नजर आ रहे हैं, यह लोग हाथों से और पोहे के बड़े से ढ़ेर के ऊपर बैठकर पैकेट में पोहा भरते हुए नजर आ रहे हैं। यह वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने प्रीमियम दिखने वाले इस पोहे की फैक्ट्री में स्वच्छता को लेकर चिंता जाहिर की है।
वीडियो की शुरुआत में एक गोदाम या फैक्ट्री में बड़ा सा कमरा है दिखाई देता है, जहां पर बहुत बड़ी मात्रा में पोहा दिखता है। कुछ लोग इसी पोहे के ढ़ेर के ऊपर बैठकर हरे रंग की प्रिंटेड पैकेजिंग में उसे भरते हुए नजर आते हैं। हालांकि, अभी इस बात पर कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि यह वायरल वीडियो कहां का है।
वीडियो में एक व्यक्ति हरे रंग की टीशर्ट पहने हाथों से जमीन पर फैले पोहे को भरता है। इसके बगल में ही एक नीली शर्ट पहने हुए एक व्यक्ति बैठा है, जिसके किनारे पर एक सीलिंग मशीन रखी हुई है। हरी टीशर्ट वाला व्यक्ति हाथों से पोहा भरकर मशीन पर रखता है। इसके बाद दूसरा व्यक्ति उसकी तौल करके उसे सीलिंग मशीन के ऊपर रख देता है। इसके बाद पैकेजिंग हो जाती है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि लोगों द्वारा बड़े चाव से खाया जाने वाला पोहा किसी ट्रे या साफ-सुथरी जगह पर नहीं रखा हुआ है, बल्कि सीधे फर्श पर फैला हुआ है।
दूसरी तरफ जो व्यक्ति पोहा के ढेर पर बैठकर लगातार हाथों से पैकेट भरता दिखता है। किसी के हाथों में दस्ताने नहीं हैं, न ही हेयर कवर या मास्क दिखाई दे रहा है। कैमरा घूमकर पोहा के बड़े ढेर और उसे संभालने के तरीके को दिखाता है।
इस वीडियो को पोस्ट करते हुए एक पेज ने कैप्शन में लिखा, “पैकेजिंग के बाहर से प्रीमियम और आकर्षक लग सकती है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले पोहा का आभास होता है। लेकिन जिस अत्यंत अस्वच्छ तरीके से इसे पैक किया जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। हमारा फूड सेफ्टी कहां है? भारतीय उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से लगातार समझौता किया जा रहा है और इस तरह की लापरवाही को अब नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।”
अभी तक इस वीडियो को लेकर कई लोगों ने फूड सेफ्टी पर सवाल उठाए हैं। एक यूजर ने लिखा, “लोगों को सस्ता और लोकल सामान खरीदना बंद करना होगा जहां गुणवत्ता नियंत्रण नहीं है। भारतीय केवल कीमत पर ध्यान देते हैं।” एक और ने फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी पैकिंग की हालत यह है और हम सबसे पहले उठकर पोहा ही खाते हैं।”
दूसरे ने टिप्पणी की, “प्रीमियम पैकेजिंग, लेकिन अस्वच्छ पैकिंग। ‘मेक इन इंडिया, ब्रेक द हेल्थ ऑफ इंडिया’ का परफेक्ट उदाहरण। FSSAI कहां है? या उन्हें ढूंढने के लिए माइक्रोस्कोप चाहिए?” किसी ने कहा, “पुराने दिन सुनहरे थे, आजकल सब खत्म हो गया।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “किस पर भरोसा करें, कहां जाएं? भारत में हर दिन जीना अब चुनौती बन गया है।”
उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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