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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को व्यापार वार्ताओं को लेकर यूपीए सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि उस दौर का आर्थिक कुप्रबंधन भारत को आत्मविश्वास के साथ बातचीत करने से रोकता रहा. उन्होंने कहा, “यूपीए सरकार के वर्षों में कुछ व्यापार समझौते करने की कोशिश जरूर हुई, लेकिन पूरी प्रक्रिया अनिश्चितता और असंगति से भरी रही. बड़े पैमाने पर उनके आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत आत्मविश्वास की स्थिति से बातचीत नहीं कर पाया. उन्होंने ऐसा माहौल तैयार नहीं किया जिससे वार्ता नतीजे तक पहुंच सके. बातचीत शुरू होती और फिर टूट जाती. लंबे समय तक चर्चा के बावजूद ठोस उपलब्धि बहुत कम रही.”
प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार ने नीतिगत फैसलों के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूत किया. उन्होंने कहा, “जब हम सत्ता में आए तो हमने नीतियों आधारित शासन के जरिए आर्थिक पुनरुत्थान का नेतृत्व किया, बुनियादी आर्थिक ढांचे को मजबूत किया और नियम आधारित व्यवस्था बनाई. जब हमने राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत बदलाव और सुधार आधारित दृष्टिकोण सुनिश्चित किया, तब दुनिया भारत में निवेश करना चाहती है.”
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उन्होंने हाल के वर्षों में हुए समझौतों का जिक्र करते हुए कहा, “ये व्यापार समझौते भले हाल में हुए हों, लेकिन ये अधिक प्रतिस्पर्धी घरेलू उद्योग, आत्मविश्वासी दृष्टिकोण और खुले नजरिये का परिणाम हैं. हमारे पास अब 38 साझेदार देशों के साथ समझौते हैं, जो भारत के व्यापार इतिहास में अभूतपूर्व उपलब्धि है.”
एमएसएमई क्षेत्र पर असर को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “हम इन ऐतिहासिक समझौतों में ताकत की स्थिति से प्रवेश कर रहे हैं. मेड इन इंडिया की सोच ने हमारे एमएसएमई में नया आत्मविश्वास और ऊर्जा भरी है.”
प्रधानमंत्री ने कहा कि ये समझौते सिर्फ शुल्क में कमी तक सीमित नहीं हैं. उन्होंने कहा, “ये आपूर्ति श्रृंखला के एकीकरण और उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करते हैं. ये विनिर्माण शुल्क को धीरे धीरे उदार बनाते हैं, सेवाओं के एकीकरण को गहरा करते हैं और वस्त्र, जूते, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग जैसे श्रम प्रधान निर्यात के लिए नए अवसर बनाते हैं.”
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उन्होंने भरोसा जताया कि इससे युवाओं के लिए अवसर बढ़ेंगे और भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में और मजबूत भूमिका निभाएगा. पीएम मोदी एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा, “मुझे विश्वास है कि हमारे युवा अपने कौशल और प्रतिस्पर्धा से दुनिया पर प्रभाव डालेंगे और भारत को अधिक खुली, आत्मविश्वासी और वैश्विक रूप से जुड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में योगदान देंगे.”
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