किरायेदार का ड्रामा खत्म! बिना मकान मालिक बने हर महीने कमाएं किराया – AajTak

आमतौर पर जब हम ‘रियल एस्टेट में निवेश’ की बात करते हैं, तो दिमाग में एक ही तस्वीर आती है. करोड़ों का लोन, रजिस्ट्री के चक्कर, पेंट-पुताई की सिरदर्दी और सबसे ऊपर ‘किरायेदार का ड्रामा’. हर महीने किराया मांगने की झिझक और घर खाली होने पर नया किरायेदार ढूंढने की भागदौड़.
लेकिन भारत अब बदल चुका है. अब आप बिना एक ईंट खरीदे या बिना किसी किरायेदार से बात किए, देश की सबसे प्रीमियम कमर्शियल प्रॉपर्टीज से हर महीने ‘रेंटल इनकम’ कमा सकते हैं. 
कैसे कमाएं मुनाफा?
अब निवेशक ‘जमीन का मालिक’ बनने के बजाय ‘मुनाफे का हिस्सेदार’ बनना पसंद कर रहे हैं. बड़ी कंपनियां बड़े-बड़े आईटी पार्क और मॉल्स बनाती हैं. अब आप इन पूरी बिल्डिंग्स को खरीदने के बजाय इनके एक छोटे हिस्से को ‘डिजिटल’ तरीके से खरीद सकते हैं. बिल्डिंग का रखरखाव, साफ-सफाई और किरायेदार (बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां) संभालने की जिम्मेदारी एक प्रोफेशनल ‘ऑपरेटर’ की होती है, जबकि आपको हर महीने आपके निवेश के अनुपात में किराया मिलता रहता है.
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बिना मकान खरीदे कैसे कमाएं पैसा? 
REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट): यह बिल्कुल म्युचुअल फंड जैसा है, आप शेयर बाजार के जरिए REITs के यूनिट्स खरीदते हैं. ये ट्रस्ट बड़े ऑफिस स्पेस और मॉल्स से किराया वसूलते हैं और उसका 90% हिस्सा अपने निवेशकों को डिविडेंड (किराये) के रूप में बांट देते है. आप मात्र कम पैसे से निवेश शुरू कर सकते हैं. 
फ्रैक्शनल ओनरशिप (Fractional Ownership): कल्पना कीजिए कि गुरुग्राम के साइबर सिटी में एक ऑफिस की कीमत ₹50 करोड़ है. आप अकेले इसे नहीं खरीद सकते, लेकिन ‘फ्रैक्शनल ओनरशिप’ प्लेटफॉर्म्स के जरिए आप 100 अन्य लोगों के साथ मिलकर इसमें ₹10 लाख या ₹25 लाख निवेश कर सकते हैं. आपको ग्रेड-A प्रॉपर्टी का मालिकाना हक मिलता है और किराया सीधे आपके बैंक खाते में आता है. 
को-लिविंग और स्टूडेंट हाउसिंग: अब बिल्डर्स फ्लैट बेचकर गायब नहीं होते. वे ‘होटल मॉडल’ पर काम कर रहे हैं. आप फ्लैट खरीदते हैं, लेकिन उसका मैनेजमेंट कंपनी करती है. वे ही स्टूडेंट्स या प्रोफेशल्स को रखते हैं और आपको एक फिक्स्ड या रेवेन्यू-शेयरिंग रेंटल देते हैं. 
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मकान मालिक’ बनने से बेहतर क्यों है यह तरीका?
पारंपरिक तरीके से ‘मकान मालिक’ बनने के मुकाबले यह नया डिजिटल मॉडल (REITs और फ्रैक्शनल ओनरशिप) इसलिए बेहतर है क्योंकि यह आपको भारी-भरकम कर्ज और रोजमर्रा के प्रबंधन की चिंताओं से मुक्त करता है. जहां एक भौतिक संपत्ति खरीदने के लिए करोड़ों की पूंजी, रजिस्ट्री के चक्कर और फिर किरायेदारों के साथ बिजली-पानी या मरम्मत जैसे ‘ड्रामा’ को झेलना पड़ता है, वहीं यह आधुनिक तरीका आपको मात्र कुछ हजार या लाख रुपयों में देश की सबसे बेहतरीन कमर्शियल प्रॉपर्टीज का हिस्सा बनने का मौका देता है. बड़ी कंपनियों से किराया मिलता है, जिसे प्रोफेशनल टीमें मैनेज करती हैं. 
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