भारतीय शास्त्रीय नृत्य की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए रविवार को हुए आरंगेत्रम् में बीटेक की स्टूडेंट कीर्ति गट्टानी ने दक्षिण भारतीय नृत्य की परंपरा व उसमें मौजूद विभिन्न स्टेप को मंच पर ढाई घंटे तक प्रस्तुत किया। कीर्ति नौ वर्षों की साधना के बाद गुरु की आज्ञा ले पहली बार मंच पर उतरीं और महालक्ष्मी ऑडिटोरियम में दर्शकों के समक्ष अपनी परफॉर्मेंस दी।
प्रकाश गट्टानी और जयश्री गट्टानी की बेटी कीर्ति ने देवाधिदेव महादेव और आदिशक्ति को नमन करते हुए पुष्पांजलि से शुरुआत की। नृत्य के विभिन्न भागों और भावों को एक्सप्रेशन, गीत, ताल और दक्षिण भारतीय स्वरों से दिखाया। अलारिपू से नृत्य का परिचय दिया। जतिस्वरम् के बाद वर्णम्, शब्दम्, कीर्तनम् में हनुमान चालीसा जैसी शास्त्रीय रचनाओं की भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
एक नृत्य में आठ से नौ प्रकार के स्टेप दिखाने के बाद तिल्लाना से समापन किया। मंगलम् की प्रस्तुति देकर उन्होंने गुरू, परिजनों, मेहमानों व दर्शकों को नमन किया। शास्त्रीय गायिका सुधा रघुरमन, बांसुरीवादक जी. रघुरमन, मृदंगवादक डॉ.राममूर्ति केशवन ने लाइव म्यूजिक देकर कीर्ति के आरंगेत्रम् को यादगार बनाया।
श्री गुरु गणेश नाट्यालय की निदेशक और गुरू कलाश्री रजनी शर्मा ने परिचय देते हुए बताया कि इस समय संस्था में 35 लड़कियां नृत्य सीख रही हैं। 5-6 शिष्याएं अपने आरंगेत्रम् की तैयारी कर रही हैं।
भरतनाट्यम की तंजावुर शैली से प्रशिक्षित शर्मा पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. सरोजा वैद्यनाथन की शिष्या हैं। मेहमान के रूप में औरोबिंदो सेंटर ऑफ न्यू एजूकेशन की डायरेक्टर मीरा सिंह, राव राजा महेंद्र सिंह, गणेश नाट्यालय दिल्ली के सीईओ सीवी कामेश, डॉ पूनम शर्मा मौजूद थे।
आरंगेत्रम्…
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