क्या है UGC का नया नियम? जिसे लेकर देशभर में मचा बवाल, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची बात – News24 Hindi

—विज्ञापन—
UGC के नए नियमों को लेकर पूरे देश में इस समय विरोध जारी है. UGC को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भी पत्र भेजा गया है. पत्र में ये आरोप लगाए गए हैं कि जातिगत भेदभाव करने के लिए ये बिल लाया जा रहा है. वहीं, कई संगठनों का कहना है कि ये नियम सवर्णों के खिलाफ है. यह भी कहा जा रहा है कि सरकार इसे लेकर बीच का रास्ता निकालने की तैयारी कर रही है.
केंद्र सरकार ने बड़े शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए नए नय नियम लागू किए हैं. अब देश के सभी कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में भेदभाव की शिकायतों की जांच के लिए समानता समितियां बनाना जरूरी होगा.
वहीं, यूजीसी के नए नियमों के अनुसार, इन समितियों में ओबीसी, एससी , एसटी, दिव्यांग और महिलाओं का होना बेहद जरूरी और अनिवार्य कर दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि इन नियमों का मुख्य उद्देश्य कैंपस में सभी जाति के छात्रों को एक साथ लेकर चलना और माहौल को बेहतर बनाए रखना है. इसके अलावा पिछड़े वर्ग के छात्रों की शिकायत को समय पर सुलझाना है.
नोटिस के अनुसार, हर संस्थान को एक ‘समान अवसर केंद्र’ EOC खोलना होगा. यह केंद्र वंचित वर्गों के लिए बनी योजनाओं को लागू करने पर नजर रखेगा और छात्रों को पढ़ाई, पैसे और समाज से जुड़े मामलों में सलाह भी देगा. इसका मुख्य काम कैंपस में विविधता और समानता को बढ़ावा देना होगा. अगर किसी कॉलेज में समिति के कम से कम पांच सदस्य नहीं हैं, उस कॉलेज का काम उससे जुड़ी यूनिवर्सिटी का केंद्र संभालेगा.
EOC का काम संबंधित समुदाय को समता एवं समानता के अवसर उपलब्ध कराना, समावेश लाना, छात्र, शिक्षण, गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बीच समता को बढ़ाना, छात्रों के बीच भेदभाव की भावना को कम करना, वंचित वर्ग से जुड़े छात्र समूहों की सहायता करना और शिकायतों के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाना होगा.
कई सामाजिक संगठन ने नए नियमों को संविधान विरोधी, सामाजिक न्याय विरोधी और सवर्ण वर्ग पर सीधा हमला करार दिया है. राष्ट्रपति को भेजे गए एक ज्ञापन में कहा गया है कि ये विनियम समानता की आड़ में सवर्ण वर्गों के छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास है. यह कदम उच्च शिक्षा संस्थानों में वर्षों से चले आ रहे सामाजित न्याय के संघर्ष को पीछे धकेलने वाला है.
उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए यूजीसी की तरफ से 13 जनवरी को अधिसूचित प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगलेशंस, 2026 के एक प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.
इस नियम को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें यूजीसी के नए नियम 3(सी) को मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह प्रावधान उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नाम पर कुछ वर्गों (खासकर सामान्य वर्ग) के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देता है और इससे कुछ समूहों को शिक्षा से बाहर किया जा सकता है. याचिका में यह भी कहा गया है कि यूजीसी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के विपरीत है और उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंचाता है.
UGC के नए नियमों को लेकर पूरे देश में इस समय विरोध जारी है. UGC को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भी पत्र भेजा गया है. पत्र में ये आरोप लगाए गए हैं कि जातिगत भेदभाव करने के लिए ये बिल लाया जा रहा है. वहीं, कई संगठनों का कहना है कि ये नियम सवर्णों के खिलाफ है. यह भी कहा जा रहा है कि सरकार इसे लेकर बीच का रास्ता निकालने की तैयारी कर रही है.
केंद्र सरकार ने बड़े शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए नए नय नियम लागू किए हैं. अब देश के सभी कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में भेदभाव की शिकायतों की जांच के लिए समानता समितियां बनाना जरूरी होगा.
वहीं, यूजीसी के नए नियमों के अनुसार, इन समितियों में ओबीसी, एससी , एसटी, दिव्यांग और महिलाओं का होना बेहद जरूरी और अनिवार्य कर दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि इन नियमों का मुख्य उद्देश्य कैंपस में सभी जाति के छात्रों को एक साथ लेकर चलना और माहौल को बेहतर बनाए रखना है. इसके अलावा पिछड़े वर्ग के छात्रों की शिकायत को समय पर सुलझाना है.
नोटिस के अनुसार, हर संस्थान को एक ‘समान अवसर केंद्र’ EOC खोलना होगा. यह केंद्र वंचित वर्गों के लिए बनी योजनाओं को लागू करने पर नजर रखेगा और छात्रों को पढ़ाई, पैसे और समाज से जुड़े मामलों में सलाह भी देगा. इसका मुख्य काम कैंपस में विविधता और समानता को बढ़ावा देना होगा. अगर किसी कॉलेज में समिति के कम से कम पांच सदस्य नहीं हैं, उस कॉलेज का काम उससे जुड़ी यूनिवर्सिटी का केंद्र संभालेगा.
EOC का काम संबंधित समुदाय को समता एवं समानता के अवसर उपलब्ध कराना, समावेश लाना, छात्र, शिक्षण, गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बीच समता को बढ़ाना, छात्रों के बीच भेदभाव की भावना को कम करना, वंचित वर्ग से जुड़े छात्र समूहों की सहायता करना और शिकायतों के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाना होगा.
कई सामाजिक संगठन ने नए नियमों को संविधान विरोधी, सामाजिक न्याय विरोधी और सवर्ण वर्ग पर सीधा हमला करार दिया है. राष्ट्रपति को भेजे गए एक ज्ञापन में कहा गया है कि ये विनियम समानता की आड़ में सवर्ण वर्गों के छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास है. यह कदम उच्च शिक्षा संस्थानों में वर्षों से चले आ रहे सामाजित न्याय के संघर्ष को पीछे धकेलने वाला है.
उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए यूजीसी की तरफ से 13 जनवरी को अधिसूचित प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगलेशंस, 2026 के एक प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.
इस नियम को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें यूजीसी के नए नियम 3(सी) को मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह प्रावधान उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नाम पर कुछ वर्गों (खासकर सामान्य वर्ग) के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देता है और इससे कुछ समूहों को शिक्षा से बाहर किया जा सकता है. याचिका में यह भी कहा गया है कि यूजीसी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के विपरीत है और उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंचाता है.
न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
—विज्ञापन—
—विज्ञापन—
B.A.G Convergence Limited
Film City, Sector 16A, Noida, Uttar Pradesh 201301
Phone: 0120 – 4602424/6652424
Email: info@bagnetwork.in

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News