Iran-Israel war: ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद, ईरान लीडरशिप के संकट का सामना कर रहा है, जबकि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से ग्लोबल ऑयल सप्लाई को खतरा है. ऐसे में आइए जानते हैं अब दुनिया में क्या-क्या बदलने वाला है.
Khamenei Death Impact: ईरान-अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव था. वहीं, इजरायल को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से खतरा था. जिसका सीधा असर 28 फरवरी को दिखा. जब इजरायल-अमेरिका ने जॉइंट ऑपरेशन के तहत, ईरान पर ताबड़तोड़ कई हमले किए. इस बार टारगेट थे ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई. जिनकी मौत की पुष्टि 1 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान ने खुद की.
इस घटना के बाद आगे की स्थिति जानने से पहले आपको बता दें. इस्लामिक गणराज्य ईरान के 47 साल के इतिहास में से 45 साल तक करीब पूरी सत्ता Ali Khamenei के हाथ में रही. उन्होंने देश की अंदरूनी और बाहरी राजनीति पर लगभग पूरा अपना कंट्रोल रखा. अब चूंकि खामेनेई की मौत हो चुकी है, तो ईरान की जवाबी कार्रवाई भी लंबे समय तक चलेगी. ऐसे में आइए जानते हैं, अब ईरान, मिडिल ईस्ट, दुनिया और भारत के लिए आगे क्या होगा?
खामेनेई कैसे बने सुप्रीम लीडर?
Ruhollah Khomeini ने 1979 में ईरानी क्रांति का नेतृत्व किया और पहलवी शासन को हटाकर इस्लामिक गणराज्य की स्थापना की. दो साल बाद अली खामेनेई ईरान के राष्ट्रपति बने और 1989 में खुमैनी की मौत के बाद सुप्रीम लीडर बने. खामेनेई के नेतृत्व में ईरान एक ताकतवर क्षेत्रीय शक्ति बना और अमेरिका व इजरायल का बड़ा विरोधी बन गया. उन्होंने पूरे क्षेत्र में सहयोगी समूहों का नेटवर्क बनाया, जिसे “एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस” कहा जाता है.
उनके समय में ईरान ने अपनी स्वदेशी तकनीक विकसित की और उसकी सेना, खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC मजबूत हुई. जवाब में अमेरिका ने सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा. वहीं, उनकी मौत के बाद देश में अलग-अलग तस्वीरें दिखीं. इस्फहान, तेहरान और शिराज में कुछ जगह जश्न की खबरें आईं, जबकि सरकारी टीवी पर शोक मनाते लोगों की तस्वीरें दिखाई गईं.
अब ईरान में क्या होगा?
अमेरिका-इजरायल के जॉइंट ऑपरेशन में खामेनेई के साथ उनके परिवार के सदस्य बेटी, दामाद और पोता भी मारे गए. सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, आईआरजीसी के नए प्रमुख मेजर जनरल मोहम्मद पकपूर की भी मौत हो गई. अली शमखानी भी मारे गए, जो खामेनेई के लंबे समय से सुरक्षा सलाहकार थे. ऐसे में, सवाल उठने लगा कि ईरान का क्या होगा?
इसी सवाल का जवाब देते हुए, ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ सुजैन मेलोनी के मुताबिक ईरान में 3 संभावित स्थितियां हो सकती हैं. पहला- मौजूदा शासन बना रहेगा, दूसरा- सेना का कब्जा हो सकता है. तीसरा- शासन का पूरी तरह पतन होगा. अगर आखिरी दो स्थितियों को गलत ठहरा दिया जाए, तो पहली स्थिति के मुताबिक, जहां तक सुप्रीम लीडर के चुनने का सवाल है, इसके लिए 88 सदस्यीय धार्मिक निकाय ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ नया सुप्रीम लीडर चुनेगा. तब तक राष्ट्रपति समेत एक अस्थायी परिषद सत्ता संभालेगी.
दुनिया में क्या बदलेगा?
ईरान फिलहाल मिडिल ईस्ट में कतर, बहरीन, यूएई, कुवैत, सऊदी अरब और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी हैं. यूएई में भी ईरान ने कुछ नागरिक इलाकों को भी निशाना बनाया है. जिसके बाद, सऊदी अरब और यूएई ने आपसी मतभेद कम करने के संकेत दिए हैं. ऐसे में मिडिल ईस्ट में नई सेंटर पॉवर देखने को मिल सकती है.
वहीं, ईरान ने 21 किलोमीटर चौड़ी होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है. जिसके बाद अब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा पैदा होगा. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2 मार्च को ही यूरोपीय देशों में नेचुरल गैसों की कीमतों में 22% का इजाफा हो चुका है. ऐसे में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बेतहाशा इजाफा देखने को मिल सकता है.
भारत पर क्या असर होगा?
खाड़ी और मध्य पूर्व में करीब 90 लाख भारतीय रहते हैं. उनकी सुरक्षा पर अब सीधा असर पड़ेगा. भारत को मिलने वाली कुल विदेशी मुद्रा का लगभग 38% हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है. भारत अपनी लगभग 60% ऊर्जा जरूरत इसी क्षेत्र से आयात करता है. करीब 50% तेल. करीब 70% एलएनजी. अगर सप्लाई रुकी तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ेगा.
भारत पहले से रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिकी दबाव में है. ऐसे में यह स्थिति भारत के लिए कूटनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण है. भारत के ईरान से ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं. अब नए नेतृत्व के साथ तालमेल बैठाना भी एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा होगी. कुल मिलाकर, खामेनेई की मौत केवल ईरान की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और दुनिया की राजनीति को बदल सकती है. आने वाले दिन निर्णायक साबित होगा.
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