खामेनेई के शोक में बड़ा इमामबाड़ा, पिक्चर गैलरी और पुराने लखनऊ में दुकानें बंद, दुआओं का दौर – Hindustan Hindi News

Lucknow News: ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई की मौत के दूसरे दिन पुराने लखनऊ में सन्नाटा पसरा रहा। हुसैनाबाद, चौक, नक्खास, चौपटिया, अकबरी गेट, बिल्ललौचपुरा समेत तमाम क्षेत्रों की दुकाने पूरी तरह बंद रहीं। अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के गम में तीन दिन के शोक की घोषणा की गई है, जिसका असर सबसे ज्यादा पुराने लखनऊ में देखने को मिला। यहां सन्नाटा रहा। लोगों ने दुकानें बंद रखीं।

अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खामेनेई की मौत एक मार्च को हुई थी। मौत की खबर के बाद भारत के कई शहरों के साथ ही लखनऊ में भी आक्रोश देखने को मिला और हजारों की संख्या में लोगों ने सैयद अली खामेनेई को खिराजे अकीदत पेश की और अमेरिका और इजरायल के खिलाफ अजादारी रोड पर प्रदर्शन किया। आयतुल्लाह के निधन पर मौलाना कल्बे जवाद, मौलाना यासूब अब्बास ने तीन दिन के शोक की घोषणा की थी। जिसका असर सोमवार को भी दिखा। अकबरी गेट से लेकर गोल दरवाजे, चौपटिया, नक्खास, हुसैनबाद, ठाकुरगंज, मुफ्तीगंज व अन्य क्षेत्रों की दुकाने बंद रहीं। वहीं शियाओं ने घरों में काले झण्डे लगाकर मातम मनाया और विरोध दर्ज कराया।

आयतुल्लाह खामेनेई के निधन पर शहर की कई मस्जिदों में नमाज के बाद खास दुआ की गई। शियो के साथ ही सुन्नी मस्जिदों में ही ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई मगफिरत के लिए दुआओं के हाथ उठे।

आयतुल्लाह खामेनेई के निधन पर तीन दिन के शोक की घोषणा के दूसरे दिन मौलाना कल्बे जवाद ने वीडियो जारी किया। जिसमें मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि अयातुल्लाह खामेनेई सिर्फ शियो के नेता नहीं थे बल्कि सभी मुस्लिमों के नेता थे, जिन्दगी भर उन्होंने मजलूमों का साथ दिया। उनके निधन पर तीन दिन का शोक है लेकिन बाजार में जिनकी दुकाने हैं। उन पर दुकाने बंद करने की किसी प्रकार की जबरदस्ती नहीं है। दुकानें सिर्फ अपनी मर्जी से वे ही लोग बंद करें जो जालिमों के खिलाफ और मजलूमों के साथ हैं। उन्होंने कहा कि जो मजलूमों के साथ हैं वे अपने घरों में काले झण्डे लगाएं।

आयतुल्लाह खामेनेई के निधन पर शोक में बड़ा इमामबाड़ा के साथ ही पिक्चर गैलरी व अन्य पर्यटन स्थल बंद रहे। जिन लेागों को जानकारी नहीं थी वे पर्यटक सुबह बड़ा इमामबाड़ा घूमने आए और जब उन्हे पता चला कि इमामबाड़ा बंद हैं तो वे लौट गए। सोमवार को बड़ा इमामबाड़ा घूमने के लिए गाजीपुर, हरदोई, बाराबंकी से कई युवा पंहुचे थे। उन्होंने बताया कि यहां पंहुचने के बाद इमामबाड़े पर ताला देखा और पता चला कि तीन दिन के शोक में बंद हैं इसलिए वापस जा रहे हैं। अब होली के बाद दोबारा आएंगे।

मजलिसे उलमा ए हिन्द के महासचिव मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने दिल्ली में आयतुल्लाह खामेनई के प्रतिनिधि को शोक संदेश भेजा। जिसमें उन्होंने कहा कि रहबर-ए-इंकेलाब-ए-इस्लामी आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनई की शहादत की दुखद खबर ने आलम-ए-इस्लाम को गहरे शोक में डाल दिया है। उनकी जिन्दगी जुल्म के खिलाफ संघर्ष से भरी रही। उन्होंने न सिर्फ ईरान बल्कि पूरी दुनिया के मजलूमों की आवाज बनकर इंकलाब किया।

उन्होंने शहादत स्वीकार की मगर जालिमों के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया। रहबर-ए-मुअज्जम की शख्सियत से दुश्मन भी नावाकिफ नहीं था। उनकी शहादत इस बात की जिंदा दलील है, देखना यह है कि हम उनकी शख्सियत से क्या सीख लेते हैं। मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने इस अवसर पर मुसलमानों, विशेष रूप से ईरान की जनता, उनके खानदान, तमाम उलमा, तमाम शियों की सेवा में संवेदना और शोक व्यक्त किया।

योगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं। 
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