गायक लखबीर सिंह से सवाल-भारत को हिन्दू राष्ट्र बनना चाहिए?: लक्खा बोले: फिर लोग खालिस्तान और पाकिस्तान की म… – Dainik Bhaskar

प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा शनिवार को भोपाल पहुंचे। लखबीर सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। लक्खा ने अपने एक सिख परिवार से होने के बावजूद हिन्दू भजन सम्राट बनने के सफर के बारे में भी बताया।
लक्खा से भास्कर ने पूछा कि क्या भारत को हिन्दू राष्ट्र बनना चाहिए? इससे आप कितने सहमत हैं?
लखबीर सिंह ने कहा – नहीं, नहीं… बनना चाहिए। हिन्दू राष्ट्र तो है ही भारत। आज से थोड़ी है। हिन्दू राष्ट्र अगर आप बनाएंगे तो और जो लोग यहां बस रहे हैं उनके दिमाग में भी आएगा। आगे तो कोई खालिस्तान मांगेगा कोई फिर पाकिस्तान मांगेगा। ऐसे तो फिर टुकडे़-टुकडे़ हो जाएगा। ये जैसा धर्म निरपेक्ष देश है, इसको वैसा ही रहना चाहिए। हम लोग सारे मिलकर रहें। एक दूसरे से प्रेम बनाएं सबसे सहानुभूति रखें। तभी हमारा देश तरक्की करेगा।
अब लखबीर सिंह से हुई पूरी बातचीत को पढ़िए..
भास्कर: एक सिख परिवार में जन्म लेकर देश का प्रसिद्ध भजन गायक बनने का सफर कैसा रहा?
भास्कर: आपका मशहूर करने वाला पहला भजन कौन सा है?
मैंने महादेव जी के बहुत भजन गाए। शिव शंकर डमरू वाले, जयति, जयति जय काशी वाले। ये सब फेमस हैं। प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी ऐसे माता के भजन तो पूरी दुनिया में मशहूर हुए। अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो, लोगों ने बड़ा प्रेम स्नेह और आशीर्वाद दिया तो मन बढ़ता गया आगे बढ़ते रहे और आज सब आपके सामने है।
भास्कर: आपका नाम लक्खा कैसे पड़ा?
भास्कर: आपको सिख समाज के कार्यक्रमों में भी उतना ही रिस्पांस मिलता है?
लोगों को अच्छा लगता है कि हम सिख समाज से आकर सनातन का प्रचार कर रहे हैं। एक्चुअली धर्म तो सनातन ही था। सिख तो हिन्दू से ही आए। बस विचारधारा में थोड़ा सा फर्क है। सिख समाज में एक अकालपुरख को माना जाता है कि एक अकालपुरख है जो आदमी को पालता भी है मारता भी है। बस विचारधारा थोड़ी सी अलग है बाकी कोई बात नहीं हैं।
भास्कर: भारत को हिन्दू राष्ट्र बनना चाहिए? आप कितने सहमत हैं?
लखबीर सिंह: नहीं, नहीं बनना चाहिए। हिन्दू राष्ट्र तो है ही भारत। आज से थोड़ी है। हिन्दू राष्ट्र अगर आप बनाएंगे तो और जो लोग यहां बस रहे हैं उनके दिमाग में भी आएगा। आगे तो कोई खालिस्तान मांगेगा कोई फिर पाकिस्तान मांगेगा। ऐसे तो फिर टुकडे़-टुकडे़ हो जाएगा। ये जैसा धर्म निरपेक्ष देश है इसको वैसा ही रहना चाहिए। हम लोग सारे मिलकर रहें। एक दूसरे से प्रेम बनाएं सबसे सहानुभूति रखें। तभी हमारा देश तरक्की करेगा।
भास्कर: किसी नेता ने कहा तो होगा?
भास्कर: आजकल रील का जमाना है लोग वायरल होने के लिए कुछ भी कंटेंट बनाते हैं। यंग जनरेशन को लेकर क्या कहेंगे?
भास्कर: आपको अपने जीवन का सबसे चुनौती पूर्ण समय कब लगा?
ऑर्केस्ट्रा के कार्यक्रम किए, फिल्मी गाने भी बहुत गाए। 1980 के बाद मेरा रुझान भजनों की तरफ ज्यादा बढ़ गया। फिर 1995 में गुलशन कुमार जी ने जमशेदपुर से बुलाया और दिल्ली में मैया का चोला है रंगला रिकॉर्ड किया। जिसे लोगों ने पसंद किया। 1997 में उनके निधन से पहले प्यारा सजा हैतेरा द्वार भवानी भजन गया, लेकिन वे दुर्भाग्य से उसे नहीं सुन सके।
उसके बाद माता रानी, श्याम बाबा, हनुमान जी महाराज, भोले बाबा और गुरु महाराज की बहुत कृपा रही। जीवन में बड़ा आनंद ही रहा। बस चुनौती वही रही जब पिता जी अचानक चले गए। मेरी शादी 8-9 अप्रैल को हुई। हम लोग पंजाब से 17 अप्रैल को वापस आए और पिता जी 28 अप्रैल को चल दिए। जीवन में अंधकार हो गया। फिर ईश्वर को याद करके कदम बढ़ाए।
भास्कर: आपको कभी वॉलीवुड़ की तरफ से ऑफर नहीं आया?
भास्कर: सब अपने शिष्य चेले बनाते हैं, क्या लखबीर सिंह किसी को तैयार कर रहे हैं कि आपके बाद कौन आपकी इस परंपरा को आगे बढ़ाएगा?
देखिए गाना एक अलग चीज है एक कलाकारी कैसी होनी चाहिए, कलाकार को कैसा होना चाहिए। उस पर चीजें बहुत निर्भर करती हैं। आदमी जैसा गायक है वैसी उसकी वेशभूषा रहन सहन बोली वैसी हो उसके काम भी अच्छे होने चाहिए। लोग ये सब देखते हैं। लोग मुझे बहुत सम्मान देते हैं कुछ न कुछ अच्छा तो होगा। ऐसा ही मैं अपने बच्चों को सिखाना चाहता हूं मुझे पूरी उम्मीद है कि बड़ा बेटा इ परंपरा को आगे लेकर जाएगा।
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