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इजरायल डिफेंस फोर्सेस (आईडीएफ) अब लेबनान में अपनी बदली हुई रणनीति के तहत हमले कर रहे हैं. अपने इस ऑपरेशन में आईडीएफ ने पुलों, बिजली आपूर्ति, गैस स्टेशन और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर तबाह कर दिया है. इसी क्रम में बुधवार रात को इजरायली वायुसेना ने दक्षिणी लेबनान के एक बड़े गैस स्टेशन पर भीषण हवाई हमले किए. ग्राउंड जीरो पर मौजूद हमारे संवाददाता अशरफ वानी ने टायर शहर के गैस स्टेशन से अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में ताजा हालातों की जानकारी दी है.
मुड़े हुए लोहे और जली हुई कंक्रीट के ढांचे अब उस पेट्रोल पंप की पहचान बन गए हैं जो कभी यहां की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा हुआ करता था.
मैं इस वक्त दक्षिण के एक तबाह हो चुके गैस स्टेशन के पास खड़ा हूं, जहां रात में हुए हवाई हमले ने इस गैस स्टेशन को मलबे में बदल दिया.
ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, जो पेट्रोल पंप कभी इलाके की जिंदगी की धड़कन हुआ करता था, वहां अब सिर्फ जली हुई कंक्रीट और राख बची है.
स्थानीय लोगों और अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में क्षेत्र भर में कई ईंधन स्टेशन और पेट्रोल पंप निशाना बनाए गए हैं. उनका कहा है कि वो अपनी हर जरूरत के लिए इसी स्टेशन पर निर्भर थे. यहां से गाड़ियों, जनरेटर और जरूरी सेवाओं के लिए पेट्रोल मिलता था.
‘न ईंधन, न बिजली’
एक स्थानीय व्यक्ति ने मलबे के पास खड़े होकर दर्द बयां करते हुए कहा, ‘हम हर चीज के लिए इसी जगह पर निर्भर थे. अब हमें नहीं पता कि हम कैसे काम चलाएंगे- न ईंधन है, न बिजली, हमारे पार कुछ भी नहीं है. परिवहन ठप होने से जरूरी सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ा है.’
उधर, इजरायल का दावा है कि वह केवल उन ठिकानों को निशाना बना रहा है, जिनका संबंध हिज्बुल्लाह से है. लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि इन हमलों का असर सैन्य रणनीति से कहीं आगे निकल चुका है. ईंधन स्टेशन नष्ट होने से अस्पतालों और छोटे व्यवसायों को चलाने वाले जनरेटर बंद होने की कगार पर हैं. लेबनान में पहले से जारी बिजली संकट ने इस स्थिति को और भी भयावह बना दिया है.
यहां देखें ग्राउंड रिपोर्ट
कीमतों में भारी उछाल
दक्षिणी लेबनान के जो कुछ पेट्रोल पंप अभी सुरक्षित बचे हैं, वहां सुबह से ही वाहनों की मीलों लंबी कतारें देखी जा रही हैं. ईंधन की कमी के कारण कालाबाजारी भी शुरू हो गई है, जिससे कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है. कई परिवारों के लिए ये महज एक असुविधा नहीं, बल्कि अस्तित्व का संकट बन गया है. लोगों में डर है कि आने वाले दिनों में उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी तरह छिन सकती हैं.
हमलों के बाद पूरे इलाके में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. जैसे ही धुएं के गुबार के बीच राहतकर्मी मलबे में खोजबीन कर रहे हैं, वैसे-वैसे इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि इन हमलों का मानवीय असर कितना व्यापक हो सकता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि नागरिक ढांचे का इस तरह नष्ट होना पहले से ही नाजुक स्थिति को और खराब कर सकता है.
अनिश्चितता के साये में लोग
फिलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि तबाह हो चुके इन ईंधन स्टेशनों की मरम्मत कब तक हो पाएगी या इन्हें दोबारा कब शुरू किया जा सकेगा. नागरिक ढांचे को निशाना बनाए जाने से लोग अब अनिश्चितता के बीच जीने को मजबूर हैं. साथ ही लोग अपनी बुनियादी सुरक्षा और जरूरतों को लेकर बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं.
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