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Why breast size suddenly increased: प्यूबर्टी किसी भी महिला के शरीर का वो समय होता है जब उसके शरीर में हार्मोनल और फिजिकल चैंजेज होते हैं. यह एक नैचुरल प्रोसेस है जिसमें एस्ट्रोजन जैसे सेक्स हार्मोन के बढ़ने से शरीर फर्टिलिटी की ओर आगे बढ़ता है. इस समय उनके ब्रेस्ट की ग्रोथ होती है, शरीर के शेप में बदलाव होता है, पीरियड्स शुरू होते हैं और कई इमोशनल बदलाव भी होते हैं. अधिकांश लड़कियों में प्यूबर्टी लगभग 8 से 13 साल की उम्र के बीच शुरू होती है. लेकिन अमेरिका की रहने वाली समर रॉबर्ट (Summer Robert) उन लड़कियों में से एक हैं जिन्हें प्यूबर्टी से पहले ही यानी 7 साल की उम्र से ही उनके शरीर में बदलाव शुरू हो गए थे.
दरअसल, समर रॉबर्ट को एक ऐसी समस्या थी जिसके कारण 7 साल की उम्र से ही उनके ब्रेस्ट का साइज बढ़ना शुरू हो गया था. Metro.co.uk को दिए इंटरव्यू में समर ने कहा, ‘मैं स्कूल में भी बड़े स्तनों के कारण काफी अजीब दिखती थी क्योंकि उनका आकार लगातार बढ़ रहा था. अब 18 साल बाद, 25 साल की उम्र में भी मेरे ब्रेस्ट का साइज लगातार बढ़ रहा है. 4 फीट 9 इंच लंबाई होने के साथ मेरे ब्रेस्ट का वजन ही 25 किलो से अधिक है.’
डॉक्टर्स के मुताबिक, समर को मैक्रोमैस्टिया (Macromastia) की एडवांस स्टेज जाइगेंटोमैस्टिया (Gigantomastia) है जिसके कारण ब्रेस्ट टिश्यू काफी तेजी से बढ़ते हैं. ये बीमारी क्या है, किन लोगों को होती है, इसका ट्रीटमेंट क्या है, इस बारे में जान लीजिए.
समर ने इंटरव्यू के दौरान बताया, ‘जब मैं 15 साल की हुई तो कुछ ही महीनों में मेरे ब्रेस्ट का साइज बढ़कर डबल हो गया. ऐसे में मेरी मां मुझे डॉक्टर के पास ले गई तो उन्होंने कहा कि वो सिर्फ प्यूबर्टी के कारण ऐसा हो रहा है. मेरा बॉयफ्रेंड मुझसे 11 साल बड़ा था. मैं उससे मिलने जबरदस्ती जाती थी लेकिन उसने भी मेरे साथ गलत किया.’
’16 साल की उम्र में बड़े ब्रेस्ट के कारण मैंने स्कूल छोड़ दिया और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में काम करने लगी लेकिन वहां भी मेरा हरासमेंट होने लगा. इसके बाद मैं अपने पिता के रेस्टोरेंट में शेफ बन गई लेकिन मुझे बहुत अधिक सेक्सुअलाइज्ड (Over-sexualised) समझा जाता था और दूसरे शेफ मुझे परेशान करते थे.’
‘एक साल बाद यानी 17 साल की उम्र में मैं फिर से डॉक्टर के पास गई तो उन्होंने मुझसे कहा कि मैं बहुत मोटी हूं इसलिए ब्रेस्ट का साइज भी बढ़ रहा है. उन्होंने मुझे वजन कम करने के लिए कहा जब कि मेरी लोअर बॉडी पर बिल्कुल भी फैट नहीं था.’
‘मैंने अपनी खाने की आदतें बदल लीं और काफी हद तक वजन कम कर लिया, लेकिन फिर भी मेरा ब्रेस्ट साइज कम नहीं हुआ. मैं डाइटिंग के कारण बीमार होने लगी तो मेरा परिवार रोने लगा और मैंने तब सही से खाना शुरू किया.’
’23 साल की उम्र में जब मुझे मेरे ब्रेस्ट में गांठ महसूस हुई तब जाकर एक डॉक्टर ने माना कि उन्हें ब्रेस्ट साइज कम करने के लिए सर्जरी की जरूरत है. डॉक्टर ने जब मुझे कैंसर स्पेशलिस्ट के पास भेजा तो उन्होंने कहा ये कैंसर तो नहीं है लेकिन आपको ब्रेस्ट कम कराने के लिए सर्जरी करानी चाहिए क्योंकि ये खतरनाक है.’
‘7 महीने बाद उन्होंने सर्जरी के लिए कहा लेकिन बीएमआई काफी कम होने के कारण उन्होंने सर्जरी करने से मना कर दिया. आखिरकार मैंने अब इन भारी ब्रेस्ट के साथ ही जीने का मन बना लिया. चलते समय मेरी पीठ में इतना तेज दर्द होता है जैसे कमर टूट गई हो. अगर मैं बर्तन धो रही हूं या घर की सफाई कर रही हूं, तो मैं नॉर्मल खड़ी नहीं हो सकती. मुझे ब्रा पहननी ही पड़ती है क्योंकि ब्रेस्ट का वजन 25 किलो से अधिक है.’
‘मैं जिम नहीं जा सकती, दौड़ नहीं लगा सकती. लेकिन उन्होंने अब अपनी कमजोरी को ताकत में बदला और नए प्रोफेशन से महीने के 75 हजार पाउंड यानी करीब 73-75 लाख रुपये कमाती हैं.’
Clevelandclinic के मुताबिक, मैक्रोमैस्टिया और जाइगेंटोमैस्टिया दोनों ही बहुत अधिक बढ़े हुए ब्रेस्ट की स्थितियां हैं. फर्क सिर्फ साइज बढ़ने की गंभीरता और बढ़े हुए टिश्यू के वजन या वॉल्यूम में होता है. जाइगेंटोमैस्टिया को मैक्रोमैस्टिया की एक्सट्रीम या एडवांस स्टेज माना जाता है जिसमें ब्रेस्ट असामान्य रूप से बहुत तेजी से बढ़ने लगते हैं. आसान शब्दों में समझें तो ब्रेस्ट हाइपरट्रॉफी में ब्रेस्ट के कनेक्टिव टिश्यू और ग्रंथियां बहुत बड़ा आकार ले लेती हैं.
मैक्रोमैस्टिया ऐसी स्थिति है जिसमें ब्रेस्ट इतने बड़े हो जाते हैं कि रोजमर्रा की जिंदगी, पोश्चर, दर्द और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है.
मैक्रोमैस्टिया उस स्थिति को भी कहते हैं जिसमें यदि ब्रेस्ट टिश्यू का वजन 2–2.5 किलो से कम होता है. लेकिन यदि उसका वजन 2–2.5 किलो या उससे अधिक होता है तो उसे जाइगेंटोमैस्टिया कहते हैं. यदि महिला के ब्रेस्ट का वजन उनके शरीर के कुल वजन के 3 प्रतिशत से अधिक हो तो जाइगेंटोमैस्टिया की स्थिति होती है.
PubMed में पब्लिश हुई रिसर्च के मुताबिक, अधिकतर मामलों में कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आता लेकिन माना जाता है कि ब्रेस्ट टिश्यू कुछ हार्मोन्स जैसे एस्ट्रोजन, प्रोलैक्टिन, ग्रोथ फैक्टर्स के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं जिसके कारण साइज अधिक तेजी से बढ़ने लगता है.
कुछ रिसर्च में हाइपरप्रोलैक्टिनीमिया, ऑटोइम्यून बीमारियां जैसे म्यास्थीनिया ग्रेविस, क्रॉनिक आर्थराइटिस, हाशिमोटो थायरॉइडाइटिस और हॉर्मोनल असंतुलन को बढ़े हुए ब्रेस्ट साइज का रिस्क फैक्टर बताया गया है.
PubMed की अन्य स्टडी के मुताबिक, जाइगेंटोमैस्टिया के काफी मामले प्यूबर्टी या प्रेग्नेंसी पीरियड में दिखते हैं क्योंकि उस समय अचानक से हॉर्मोनल बदलाव होते हैं.
Neurology.org के मुताबिक, लगातार गर्दन, पीठ और कंधों में दर्द, ब्रा स्ट्रैप की जगह पर गहरे निशान, खराब पोश्चर (कुबड़ापन), सिरदर्द, सांस फूलना, ब्रेस्ट में दर्द मैक्रोमैस्टिया के लक्षण होते हैं. इसके साथ ही ब्रेस्ट के नीचे और बीच में रैश, फंगल इंफेक्शन, त्वचा पर छाले, हाथों‑उंगलियों में झनझनाहट/सुन्नपन, इसमें स्किन और नर्व से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं.
Newbirkdaleclinic के मुताबिक, इस समस्या के लाइफस्टाइल पर भी काफी प्रभाव पड़ते हैं जैसे, एक्सरसाइज, दौड़ना, झुकना या खेलकूद में दिक्कत, सही फिटिंग ब्रा/कपड़े न मिलना. बॉडी‑इमेज इश्यू, शर्म, सोशल एंग्ज़ाइटी, डिप्रेशन के लक्षण भी महिलाओं द्वारा बताए गए हैं.
Harrisplasticsurgery.com के मुताबिक, मैक्रोमैस्टिया का मुख्य इलाज ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी है, जिसे रिडक्शन मैमोप्लास्टी कहते हैं. इसमें सर्जन अतिरिक्त ब्रेस्ट टिश्यू, फैट और ढीली स्किन को हटा देते हैं ताकि ब्रेस्ट छोटे, हल्के और सही आकार के हो जाते हैं. इससे पीठ-कंधे का दर्द, स्किन इरिटेशन और चलने-फिरने की परेशानी दूर हो जाती है. सर्जरी जनरल एनेस्थीसिया में 2-5 घंटे लगती है, हॉस्पिटल में 1-2 दिन रहना पड़ता है और पूरी रिकवरी में 4-6 हफ्ते लग जाते हैं.
नॉन‑सर्जिकल मैनेजमेंट में सपोर्टिव ब्रा, फिजिकल थेरेपी, पेन मैनेजमेंट और वेट मैनेजमेंट से कुछ हद तक दर्द और पोश्चर में राहत मिल सकती है, लेकिन यह मूल समस्या (टिश्यू) को नहीं घटाते. अगर हार्मोनल समस्या हो तो डॉक्टर कभी दवा भी देते हैं, पर ज्यादातर मामलों में सर्जरी ही असली फायदा देती है.
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