चैती छठ 2026: नहाय-खाय के साथ महापर्व शुरू, आज होगा खरना, जानें पूरा शेड्यूल – Hindustan Hindi News

लोक आस्था के महापर्व चैती छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय के साथ रविवार को हो गई। राजधानी पटना और पटना सिटी के विभिन्न गंगा घाटों पर सुबह से ही व्रती छठ पूजा की शुद्धि संकल्प के लिए गंगा स्नान करने पहुंची। वहीं परिवार के सदस्य गंगाजल लेने घाट पर आए। इस दौरान घर से गंगा घाट तक छठ गीतों से माहौल भक्तिमय रहा। चार दिवसीय व्रत के पहले दिन भरणी नक्षत्र में नहाय-खाय के प्रसाद के रूप में कद्दू-भात का भोग लगाया गया। आज करेंगे खरना :ज्योतिषाचार्य पीके युग ने बताया कि छठ व्रती सोमवार को व्रत के दूसरे दिन कृतिका नक्षत्र और विष्कम्भ योग में खरना करेंगे। इसकी तैयारी सुबह से की जाएगी। गेहूं गंगाजल में धोने और सुखाने के बाद इसे पिसवाया जाएगा। दोपहर बाद से खरना प्रसाद तैयार करने में व्रती जुट जाएंगे। खरना में गुड़ से बनी खीर, केला, रोटी का भोग लगाया जाएगा। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत की शुरुआत होगी। मंगलवार को व्रती रोहिणी नक्षत्र और प्रीति योग में अस्ताचलगामी सूर्य को और चौथे दिन बुधवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य मृगशिरा नक्षत्र और आयुष्मान व सौभाग्य योग में देने के साथ ही महापर्व संपन्न होगा। इसे लेकर बाजारों में भीड़ उमड़ने लगी है।

नहाय-खाय के साथ रविवार (22 मार्च) से लोक आस्था के महापर्व चार दिवसीय चैती छठ पूजा की शुरुआत हो गई। राजधानी के विभिन्न गंगा घाटों पर सुबह से ही व्रती छठ पूजा की शुद्धि संकल्प के लिए गंगा स्नान करने पहुंची। चार दिवसीय व्रत के पहले दिन भरणी नक्षत्र में नहाय-खाय के प्रसाद के रूप में कद्दू-भात का भोग लगाया गया।
ज्योतिषाचार्य पीके युग ने बताया कि छठ व्रती सोमवार को व्रत के दूसरे दिन कृतिका नक्षत्र और विष्कम्भ योग में खरना करेंगे। इसकी तैयारी सुबह से की जाएगी। गेहूं गंगाजल में धोने और सुखाने के बाद इसे पिसवाया जाएगा। दोपहर बाद से खरना प्रसाद तैयार करने में व्रती जुट जाएंगे। खरना में गुड़ से बनी खीर, केला, रोटी आदि का भोग लगाया जाएगा। इसके बाद कठिन 36 घंटे का निर्जला व्रत की शुरुआत होगी।
संक्षिप्त विवरण
योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव
योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।
न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।
करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर
योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।
एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य
योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):

राशिफल (डेली एवं वीकली)
ग्रह-गोचर
दशा-महादशा
अंकज्योतिष
सामुद्रिक शास्त्र
वास्तु शास्त्र
फेंगशुई
रत्न-उपाय
व्रत-त्योहार एवं पूजा-विधि
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