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एनसीईआरटी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नौवीं के लिए हिंदी की नई पुस्तक जारी की है। 'गंगा' नामक …और पढ़ें
छात्रों में बहेगी भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक ज्ञान की गंगा (फोटो- एक्स)
एएनआई, नई दिल्ली। एनसीईआरटी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नौवीं के लिए हिंदी की नई पुस्तक जारी की है।
‘गंगा’ नामक इस पुस्तक में परशुराम-लक्ष्मण संवाद, रानी लक्ष्मीबाई की शौर्य गाथा और रैदास के पद सरीखे पाठ हैं। यह पुस्तक छात्रों में भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक ज्ञान बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
‘गंगा’ नामक यह पुस्तक भारतीय सभ्यता में नदी की प्रतिकात्मक भूमिका को दर्शाने के उद्देश्य से तैयार की गई है, जो अविरल प्रवाह और देश भर में हिंदी भाषा के प्रसार को प्रतिबिंबित करती है।
हिंदी की इस नई पुस्तक में रैदास के पद, राम-लक्ष्मण-परशुराम-संवाद, भारतीय जय विजय करें और झांसी की रानी जैसे पाठ शामिल हैं। ये कहानियां और कविताएं राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत हैं।
गंगा नदी की तरह हिंदी भी हमारी संभ्यता और संस्कृति की पहचान है। हिंदी देश के बड़े हिस्से में बोली, समझी और पढ़ी जाती है। पुस्तक में इसका उल्लेख किया गया है।
यह पुस्तक भक्ति और राष्ट्रवादी सामग्री के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करती है और भाषाई शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करती है। पुस्तक में नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों पर लाला लाजपत राय के विचार भी शामिल किए गए हैं।
इस पाठ्यपुस्तक का उद्देश्य न केवल छात्रों में भाषाई क्षमताओं को मजबूत करना है बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, इतिहास और मूल्यों से भी जोड़ना है।
एनसीईआरटी एक से आठवीं तक की कक्षाओं के लिए पहले ही नई पाठ्यपुस्तकें जारी कर चुका है। जबकि नौवीं की पुस्तकें नए पाठ्यक्रम के तहत चरणबद्ध तरीके से जारी की जा रही हैं।