बलिया के जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय में भारतीय सामाजिक अनुसंधान परिषद और राजनीति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ। समकालीन भारत में मानवाधिकार तथा सामाजिक न्याय को बढ़ावा’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठ
समापन सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि सतत विकास की अवधारणा सर्वप्रथम भारत ने दी। उन्होंने भारतीय संस्कृति में प्रकृति के साथ सहजीवन और विविधता में एकता को मानवाधिकारों का सबसे बड़ा संरक्षक बताया।
कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने 2047 में एक ऐसे भारत की कल्पना की जो न केवल विकसित हो, बल्कि समर्थ, सशक्त और सहिष्णु भी हो। उन्होंने कहा कि विश्व को कुटुंब समझने की भारतीय परंपरा ही विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त करेगी।
तकनीकी सत्रों में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. विजय कुमार वर्मा ने पर्यावरण और शहरीकरण पर चर्चा की, जबकि बीएचयू के डॉ. अमरनाथ पासवान ने गरिमामय जीवन के अधिकार पर प्रकाश डाला। जेएनयू के डॉ. सागर ने नैतिक पत्रकारिता की वकालत की।
डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ आशुतोष शुक्ल ने सोशल मीडिया को हाशिए के समाज की आवाज बताया। प्रो. हिमांशु बौरई ने मीडिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सकारात्मक रिपोर्टिंग पर जोर दिया।
कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. रजनी चौबे के नेतृत्व में आयोजित इस संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय वैभव कुमार द्विवेदी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनोज कुमार ने किया।
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