राजस्थान की चर्चित जेलों में शामिल जोधपुर सेंट्रल जेल से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जेल परिसर में आयोजित इफ्तार पार्टी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामला सामने आते ही अधिकारियों ने देर रात सघन तलाशी अभियान चलाया, जिसमें जेल परिसर से 13 मोबाइल फोन और 11 सिम कार्ड बरामद किए गए। इस घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था और अंदर चल रहे संभावित नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जेल सूत्रों के अनुसार 13 मार्च को अधिकारियों के निर्देश पर एक बैरक में बंद कैदियों के लिए इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था। इस दौरान कई बंदियों ने एक साथ रोजा खोला और भोजन किया। इसी दौरान किसी कैदी ने छिपाकर रखे मोबाइल फोन से पार्टी की फोटो और वीडियो बना लिए। बाद में इन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया। जैसे ही ये तस्वीरें सामने आईं, जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और तुरंत मामले की जांच शुरू कर दी गई।
जेल अधीक्षक प्रदीप लखावत के निर्देश पर रात में वार्ड नंबर 7 की बैरक नंबर 3 में आधुनिक उपकरणों की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया गया। तलाशी के दौरान यहां से 7 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 4 कीपैड मोबाइल और 11 सिम कार्ड बरामद किए गए। जांच में सामने आया कि कई मोबाइल फोन को शौचालय, फर्श और नालियों में छिपाकर रखा गया था ताकि तलाशी के दौरान वे आसानी से पकड़े न जाएं।
इसके अलावा दो मोबाइल सीधे बंदियों के पास से भी मिले। बरामदगी के बाद सभी मोबाइल और सिम कार्ड को जब्त कर लिया गया है और उनके उपयोग की जांच शुरू कर दी गई है।
जेल सूत्रों के मुताबिक इफ्तार पार्टी के दौरान कैदी वसीम खान, वहिद खान, शेखर, सुभाष और करीम ने मोबाइल से सेल्फी ली थी और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया था। बताया जा रहा है कि सेल्फी लेने के लिए मोबाइल फोन कैदी सलीम द्वारा वार्ड 10 की बैरक नंबर 2 में बंद कैदी नरपत पुत्र चौथाराम से लिया गया था।
जब जेल प्रशासन ने नरपत की बैरक की तलाशी ली तो उसके बिस्तर से बिना सिम कार्ड का एक मिनी कीपैड मोबाइल बरामद हुआ। वहीं बंदी करीम पुत्र सलीम के पास से रेडमी कंपनी का एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी मिला, जिसे तुरंत जब्त कर लिया गया।
तलाशी अभियान के दौरान अधिकारियों को कई मोबाइल फोन जेल के अलग-अलग हिस्सों में छिपाकर रखे हुए मिले। इनमें कुछ फोन शौचालय के पास, कुछ फर्श के नीचे और कुछ नालियों के पास छिपाए गए थे। इससे अंदेशा जताया जा रहा है कि जेल के भीतर मोबाइल फोन का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जिसके जरिए कैदी बाहरी लोगों से संपर्क में रहते हैं।
तलाशी अभियान के दौरान कुछ कैदियों ने विरोध और हंगामा भी किया। हालांकि सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया और अभियान जारी रखा। इसके बाद अन्य बैरकों में भी सघन तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें कई संदिग्ध स्थानों की जांच की गई।
इस घटना के बाद जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल फोन और सिम कार्ड जेल के अंदर कैसे पहुंचे, यह जांच का विषय बन गया है। प्रारंभिक जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि जेल के अंदर किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हो सकती है।
जेल प्रशासन ने बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड को जब्त कर उनकी तकनीकी जांच शुरू कर दी है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन मोबाइल फोन का इस्तेमाल किस-किस से संपर्क करने के लिए किया जा रहा था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि जेल के भीतर मोबाइल फोन पहुंचाने में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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