ट्रंप ने कहा, जल्द खुल जाएगा होर्मुज़ स्ट्रेट – BBC

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में दोहराया है कि अमेरिका ने ईरान की मिलिट्री को ख़त्म कर दिया है.
सुमंत सिंह, चंदन कुमार जजवाड़े
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक नई पोस्ट में दोहराया है कि अमेरिका ने ईरान की मिलिट्री को ख़त्म कर दिया है, "जिसमें उनकी पूरी नेवी और एयर फोर्स, और बाक़ी सब कुछ शामिल है."
ट्रंप ने कहा, "होर्मुज़ स्ट्रेट जल्द ही खुल जाएगा" और पिछली पोस्ट में कही गई बात दोहराई कि खाली तेल टैंकर "अमेरिकी तेल" लेने के लिए बढ़ रहे हैं.
ईरान के साथ दो हफ़्ते के सशर्त सीज़फ़ायर के तहत, ट्रंप ने कहा कि ईरान के होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए राज़ी होने पर वह "बमबारी रोकने" पर सहमत हुए हैं.
28 फरवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले किए थे, उसके बाद से ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते की नाकेबंदी कर दी है.
होर्मुज़ दुनिया के सबसे बिज़ी तेल शिपिंग मार्गों में से एक है, जिससे युद्ध के पहले तक दुनिया का लगभग 20% तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस गुज़रते रहे हैं.
जिस समय ट्रंप ने होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर यह पोस्ट किया है, उस वक़्त इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच शांति वार्ता चल रही है, जिसे अब तक 'सकारात्मक' बताया जा रहा है.
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ईरान ने दावा किया है कि उसकी कड़ी चेतावनी के बाद अमेरिका का एक विध्वंसक जहाज़ होर्मुज़ स्ट्रेट से वापस लौट गया है.
मुंबई के ईरानी कॉन्सुलेट जनरल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इसकी जानकारी दी है.
एक्स पर की गई पोस्ट में लिखा है, ''ईरान ने पाकिस्तान के ज़रिए यह संदेश दिया कि ‘अगर यह जहाज़ आगे बढ़ता रहा, तो आधे घंटे के अंदर इसे निशाना बनाया जाएगा, और इससे ईरान-अमेरिका शांति वार्ता पर असर पड़ेगा.''
इस बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही है. शनिवार शाम चार बजे के क़रीब ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत शुरू हुई.
इस्लामाबाद में बीबीसी उर्दू के संवाददाता रुहान अहमद ने बताया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का पहला राउंड ख़त्म हो गया है.
दो सरकारी अधिकारियों ने बीबीसी उर्दू को पुष्टि की है कि ढाई घंटे की बातचीत में पाकिस्तानी मध्यस्थ भी मौजूद थे.
बातचीत के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार की रात इस्लामाबाद पहुंचा था, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल शनिवार की सुबह इस्लामाबाद आया था.
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक लंबी पोस्ट में संघर्ष के दौरान उनके प्रशासन द्वारा किए गए दावों को दोहराया: "उनकी नौसेना समाप्त हो चुकी है, उनकी वायुसेना खत्म हो चुकी है."
ट्रंप ने कहा, "उनका एंटी‑एयरक्राफ्ट सिस्टम अस्तित्वहीन है, राडार ख़त्म हो चुका है, उनके मिसाइल और ड्रोन कारख़ाने काफ़ी हद तक नष्ट कर दिए गए हैं, मिसाइलें और ड्रोन ख़ुद भी नष्ट हो चुके हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनके लंबे समय से चले आ रहे 'नेता' अब हमारे बीच नहीं हैं."
ईरान द्वारा समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने का ज़िक्र करने के बाद उन्होंने कहा कि अब अमेरिका "दुनिया भर के देशों के लिए उपकार के तौर पर होर्मुज़ स्ट्रेट की सफ़ाई शुरू कर रहा है."
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एक तरफ इस्लामाबाद में पाकिस्तान की मौजूदगी में अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत हो रही है, वहीं दूसरी तरफ इसराइल ने कहा है कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर उसका हमला जारी है.
इसराइल डिफेंस फोर्सेज़ (आईडीएफ़) का कहना है कि उसने पिछले चौबीस घंटों में लेबनान में हिज़्बुल्लाह के 200 से ज़्यादा ठिकानों पर हमला किया है.
आईडीएफ़ ने एक बयान में कहा कि उसकी वायु सेना हमले कर रही है और दक्षिणी लेबनान में काम कर रही ज़मीनी सेनाओं का समर्थन कर रही है.
उसने यह भी कहा कि वह इसराइल पर हमलों को रोकने के लिए लॉन्चरों को निशाना बना रही है.
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि दक्षिणी लेबनान में हुए हमलों में छह लोग मारे गए हैं, जबकि पांच अन्य घायल हुए हैं.
इस बीच इसराइल ने देश के उत्तरी हिस्से में ऊपरी गैलिली क्षेत्र में एक एयरक्राफ़्ट के घुसने की चेतावनी दी है. अभी इसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाई है.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम समझौते का पूरा सम्मान होना चाहिए और इसे लेबनान तक बढ़ाया जाना चाहिए.
ईरान का कहना है कि मंगलवार को तय हुए दो हफ़्ते के युद्धविराम समझौते के दायरे में लेबनान भी था. हालांकि अमेरिका और इसराइल ऐसा मानने से इनकार कर रहे हैं.
इससे पहले बुधवार को इसराइल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ इन हमलों में 350 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और 1200 से ज़्यादा घायल हुए हैं.
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बताया है कि मासोमेह एब्तेकार के बेटे को देश में हिरासत में लिया गया है.
मासोमेह एब्तेकार ने साल 1979 में तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्ज़े के मामले में भूमिका निभाई थी.
अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की है कि ईसा हाशमी, मरियम तहमासेबी और उनके बेटे को अमेरिकी इमिग्रेशन और कस्टम एनफ़ोर्समेंट ने हिरासत में ले लिया है.
ईसा हाशमी, मासोमेह एब्तेकार और मोहम्मद हाशमी के बेटे हैं.
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ''मासोमेह एब्तेकार, जिन्हें 'स्क्रीमिंग मैरी' के नाम से भी जाना जाता है, उन इस्लामी आतंकवादियों की प्रवक्ता थीं जिन्होंने 1979 में तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर धावा बोल दिया था और 52 अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाकर रखा था.''
उन्होंने लिखा, ''साल 2014 में, ओबामा प्रशासन ने उनके बेटे और उनके परिवार को अमेरिका में प्रवेश करने के लिए वीज़ा दिया. जून 2016 में ओबामा प्रशासन ने उन्हें 'डायवर्सिटी इमिग्रेंट वीज़ा प्रोग्राम' के तहत कानूनी तौर पर स्थायी निवासी का दर्जा दिया.''
रूबियो ने लिखा, ''इस हफ़्ते मैंने उनके कानूनी तौर पर स्थायी निवासी का दर्जा समाप्त कर दिया और आज सैयद ईसा हाशमी, मरियम तहमासेबी और उनका बेटा, अमेरिका से बाहर निकाले जाने की प्रक्रिया पूरी होने तक अमेरिकी इमिग्रेशन और कस्टम्स एनफ़ोर्समेंट की हिरासत में हैं.''
रूबियो का कहना है, ''अमेरिका कभी भी अमेरिका-विरोधी आतंकवादियों या उनके परिवारों का घर नहीं बन सकता और ट्रंप प्रशासन के तहत, ऐसा कभी नहीं होगा.''
बीते सप्ताह अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बताया था कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के मेजर जनरल रहे कासिम सुलेमानी की भतीजी और उनकी बेटी को फ़ेडरल एजेंट्स ने हिरासत में लिया है.
यह कार्रवाई विदेश मंत्री मार्को रूबियो के उस फ़ैसले के बाद की गई थी, जिसमें दोनों के क़ानूनी तौर पर स्थायी निवासी (एलपीआर) के दर्जे को समाप्त कर दिया गया था.
अमेरिका ने 3 जनवरी 2020 को बग़दाद हवाई अड्डे के पास ड्रोन से हमला कर ईरान के अल-क़ुद्स फ़ोर्स के प्रमुख क़ासिम सुलेमानी को मार डाला था.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि वह ईरान में युद्ध के दौरान उर्वरक की कीमतों पर 'क़रीबी नज़र' रख रहे हैं.
ट्रुथ सोशल पर एक ताज़ा पोस्ट में ट्रंप ने यह भी कहा है कि वह "ईरान में ‘आज़ादी की लड़ाई’ के दौरान उर्वरक की कीमतों पर क़रीबी नज़र रख रहे हैं."
उन्होंने आगे लिखा, "अमेरिका उर्वरक पर एकाधिकार रखने वाली कंपनियों की ओर से कीमतों में मनमानी बढ़ोतरी को स्वीकार नहीं करेगा."
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दुनिया के क़रीब एक-तिहाई उर्वरक, जैसे यूरिया, पोटाश, अमोनिया और फॉस्फेट आम तौर पर होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर गुज़रते हैं.
अमेरिका कुछ उर्वरकों का ख़ुद ही उत्पादन करता है लेकिन कुछ उर्वरकों के लिए वह आयात पर निर्भर है.
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से उर्वरकों के उत्पादन की लागत और इसकी कीमतों में इज़ाफ़ा हुआ है.
विश्व व्यापार संगठन के आंकड़ों से पता चलता है कि जब से ईरान युद्ध शुरू हुआ है, इस जलमार्ग से उर्वरक से जुड़े उत्पादों की ढुलाई में भारी गिरावट आई है.
चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उर्वरक उपभोक्ता है जो कच्चे माल और तैयार उत्पाद दोनों के आयात पर बहुत अधिक निर्भर है.
मध्य पूर्व में युद्ध के कारण शिपिंग मार्गों में व्यवधान के कारण भारत की उर्वरक आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ गया है.
यूरिया बनाने का मुख्य कच्चा माल नेचुरल गैस है और भारत इसका लगभग 85% आयात करता है.
इनमें से अधिकांश खाड़ी देशों से होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर आता है.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया है, ''बड़ी संख्या में खाली तेल टैंकर अमेरिका की ओर बढ़ रहे हैं ताकि वे दुनिया के सबसे अच्छे और मीठे तेल (और गैस) को भर सकें."
ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया, "दुनिया की दो सबसे बड़ी ऑयल इकोनॉमी को मिलाकर जितना तेल होता है, अमेरिका के पास उससे भी ज़्यादा तेल है, और उसकी क्वालिटी भी बेहतर है."
ट्रंप ने तेल के ख़रीदारों से कहा, ''हम आपका इंतज़ार कर रहे हैं. जल्दी आइए.''
ट्रंप ने यह पोस्ट ऐसे समय में की है जब अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच युद्ध के दौरान वैश्विक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आया है.
बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें इस हफ़्ते की शुरुआत में 111 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुँच गई थीं, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ़्ते के लिए सशर्त युद्धविराम समझौते पर सहमति बनने के बाद तेल की कीमतों में क़रीब 15% की गिरावट आई है.
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते में होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलना भी शामिल है.
होर्मुज़ स्ट्रेट जहाज़ों की आवाजाही का एक अहम समुद्री रास्ता है. ईरान ने यहाँ से जहाज़ों के गुज़रने पर नाकेबंदी कर रखी है, जिससे पेट्रोल, डीज़ल, गैस और खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है.
कच्चे तेल की कीमतें 28 फ़रवरी को संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर से अब भी ज़्यादा हैं. उस समय इसकी कीमत क़रीब 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी.
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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम समझौते का पूरा सम्मान होना चाहिए और इसे लेबनान तक बढ़ाया जाना चाहिए.
मैक्रों ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ''मैंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ मध्य-पूर्व की स्थिति पर चर्चा की और युद्धविराम के लिए अपने समर्थन को दोहराया, जिसका पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए. इस युद्धविराम को बिना किसी देरी के लेबनान तक बढ़ाया जाना चाहिए.''
उन्होंने बताया, ''हमने होर्मुज़ स्ट्रेट में पूरी तरह से स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही को जल्द से जल्द बहाल करने की आवश्यकता पर चर्चा की. इस्लामाबाद में अभी-अभी चर्चाएँ शुरू हुई हैं, इसलिए हम तनाव कम करने, जहाज़ों के आने-जाने की आज़ादी सुनिश्चित करने, और इस क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले किसी समझौते को पूरा करने में योगदान के लिए एक-दूसरे के साथ लगातार संपर्क में रहने पर सहमत हुए.''
इससे पहले मैक्रों ने एक अन्य पोस्ट में बताया कि उन्होंने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के साथ एक बैठक की और मध्य पूर्व समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की.
उन्होंने बताया, ''हमने लेबनान में संघर्षविराम का पालन करने और उसे लागू करने, होर्मुज़ स्ट्रेट में शिपिंग की स्वतंत्रता को बनाए रखने का आह्वान किया, और एक मज़बूत, स्थायी कूटनीतिक समाधान की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.''
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लेबनान के हिज़्बुल्लाह गुट ने कहा कि उसने मिसाइलों और ड्रोन से इसराइली सैनिकों को निशाना बनाया है.
हिज़्बुल्लाह ने कहा कि उसने उत्तरी इसराइल के किरयात शमोना शहर को निशाना बनाया और यारा बैरक पर मिसाइलें दागीं.
वहीं लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के नबातीह में ज़ेफ़्टा शहर पर इज़राइल के हमले के बाद तीन लोगों की मौत हो गई है.
मंत्रालय का कहना है कि मारे गए लोगों में से लेबनानी सिविल डिफेंस का एक सदस्य था, दो अन्य लोग घायल हुए हैं.
हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी मौत कब हुई. वहीं समाचार एजेंसी रॉयटर्स की तस्वीरों में शनिवार को लेबनान में हवाई हमलों के बाद धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है.
शनिवार को लेबनान में हिज़्बुल्लाह के राजनेता हसन फदलल्लाह ने इसराइल के साथ प्रस्तावित बातचीत के मुद्दे पर लेबनानी सरकार की आलोचना की है.
इससे पहले बुधवार को इसराइल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ इन हमलों में 350 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और 1200 से ज़्यादा घायल हुए हैं.
इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने इन हमलों को युद्ध शुरू होने के बाद से हिज़्बुल्लाह पर किया गया 'सबसे बड़ा प्रहार' बताया है.
ईरान का कहना है कि मंगलवार को तय हुए दो हफ़्ते के युद्धविराम समझौते के दायरे में लेबनान भी था. हालांकि अमेरिका और इसराइल ऐसा मानने से इंकार कर रहे हैं.
गुरुवार को हिज़्बुल्लाह ने कहा कि उसने 'सीज़फ़ायर के उल्लंघन के जवाब में रात में इसराइल की ओर मिसाइलें दागीं.'
हिज़्बुल्लाह ने यह भी धमकी दी कि जब तक लेबनान के ख़िलाफ़ 'इसराइली-अमेरिकी आक्रामकता' ख़त्म नहीं होती, वह अपने हमले जारी रखेगा.
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गुवाहाटी प्रेस क्लब ने शनिवार को असम विधानसभा चुनाव के दौरान मीडिया के साथ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बर्ताव की निंदा करते हुए विरोध जताया.
अपना विरोध जताने गुवाहाटी प्रेस क्लब में इकट्ठा हुए पत्रकारों ने असम की मौजूदा सरकार के कामकाज को "अलोकतांत्रिक" बताते हुए सत्ता पक्ष के रवैये को मीडिया को डराने की कोशिश बताया.
गुवाहाटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष खगेन कलिता ने पत्रकारों के विरोध प्रदर्शन पर कहा, "पिछले कुछ समय से यह देखा गया है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मीडिया को निशाना बनाते हुए कई तीखे और धमकी भरे बयान दिए हैं.''
उन्होंने कहा, ''सीएम सवाल पूछने वाले पत्रकारों के साथ अशिष्ट व्यवहार कर रहे हैं. फिर चाहे बात बीबीसी के सवाल पूछने की हो, लल्लनटॉप की हो या फिर स्थानीय मीडिया के पत्रकारों की हो. मुख्यमंत्री सवाल पूछने वाले पत्रकारों पर न केवल ग़लत टिप्पणियां करते हैं बल्कि मीडिया को एक तरह से चेतावनी दे रहे हैं."
हिमंत बिस्वा सरमा या राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
हाल की कुछ घटनाओं का ज़िक्र करते हुए कलिता कहते हैं, "सीएम के इस तरह के अशिष्ट व्यवहार के कारण उनको फ़ॉलो करने वाले नेता और कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने दो दिन पहले असमिया प्रतिदिन अख़बार जला दिया और उनके लखीमपुर स्थित कार्यालय पर पत्थरबाज़ी की.''
''लिहाज़ा आज सारे पत्रकार गुवाहाटी प्रेस क्लब में अपना विरोध जताने इकट्ठा हुए थे. हम जल्द ही इन बातों से देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, चुनाव आयोग, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया समेत प्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी को एक ज्ञापन सौंपकर अवगत कराएंगे.''
इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए वरिष्ठ पत्रकार त्रिदीप लहकर ने कहा, "मीडिया के साथ इस तरह के व्यवहार को लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता. हम इस मुद्दे पर फिर से यहां के सिविल सोसाइटी के साथ एक बैठक करेंगे ताकि इस तरह के असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक व्यवहार पर रोक लगाई जा सके.''
उन्होंने कहा, “इसके अलावा प्रदेश के सभी शहरों में मौजूद प्रेस क्लब से संपर्क कर उन्हें सत्ताधारी लोगों के ऐसे व्यवहार के ख़िलाफ़ मज़बूती से आवाज़ उठाने के लिए कहा जाएगा."
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अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के बीच इस्लामाबाद में मुलाक़ात हुई है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसकी घोषणा की है.
प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि मध्य पूर्व युद्ध को समाप्त करने के लिए शांति वार्ता "शुरू हो चुकी है."
बयान में कहा गया है कि बैठक के दौरान शरीफ़ ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में प्रगति को आसान बनाने के लिए उत्सुक है.
इससे पहले, मीडिया ने बताया कि ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची के नेतृत्व में एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ से मुलाक़ात की.
बैठक के बारे में कोई भी जानकारी जारी नहीं की गई.
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ईरानी मीडिया ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के साथ बैठक से पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की बैठक की एक तस्वीर प्रकाशित की है.
इस बीच एक अमेरिकी अधिकारी ने उन रिपोर्टों का खंडन किया जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ने ईरान की ज़ब्त संपत्तियों को फ़्री करने पर सहमित जताई है.
पहले समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने "एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र" के हवाले से कहा था कि अमेरिका क़तर और अन्य विदेशी बैंकों में जमा ईरानी संपत्तियों को फ़्री करने पर सहमत हो गया है.
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ईरान के सरकारी न्यूज़ चैनल आईआरआईएनएन के रिपोर्टर का कहना है कि अमेरिका के साथ बातचीत में अगर ईरान की शर्तें पूरी नहीं होती हैं तो वह इस बातचीत से बाहर हट सकता है.
आईआरआईएनएन चैनल पर इस्लामाबाद से लाइव रिपोर्टिंग कर रही एक संवाददाता ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान की पहले से तय शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो बातचीत अब भी रद्द हो सकती है.
उन्होंने कहा कि उन बातचीत से पीछे हटना, जो ईरान के "हितों, मांगों और सीमा रेखा" का सम्मान नहीं करतीं, अपने आप में एक "उपलब्धि" मानी जा सकती है. जिसे ईरानी अधिकारी "ज़ोरदार कूटनीति" कहते हैं.
सरकारी टीवी अमेरिका पर भरोसे की कमी पर ज़ोर दे रहा है. रिपोर्टों में यह तर्क दिया गया है कि बातचीत में ईरान का पलड़ा भारी है और अगर उसकी शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो वह बिना बातचीत के भी बाहर निकल सकता है.
इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच जिस शर्तों पर युद्धविराम हुआ था, ईरान के मुताबिक़ वे शर्तें थीं-
वहीं इस बातचीत में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और शुक्रवार को ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ ने कहा था कि लेबनान में युद्धविराम और ईरान की फ़्रीज़ की गई संपत्तियों को बहाल करना बातचीत शुरू होने से पहले होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि ये दोनों शर्तें पहले ही तय हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक लागू नहीं की गई हैं.
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पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर कई तरह के सवाल हैं. इन सभी सवालों के जवाब मिलने में अभी वक़्त ज़रूर लगेगा, लेकिन फ़िलहाल चार ऐसे अहम सवाल हैं, जिन पर कई लोगों की नज़र है.
बातचीत में कौन-कौन शामिल है?
बातचीत के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और विशेष सलाहकार जेरेड कुशनर, और शांति वार्ता के लिए विशेष दूत बनाए गए स्टीव विटकॉफ़ शामिल हैं. ये लोग पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुँच गए हैं.
वहीं हाल ही में सरकार के एक अहम चेहरे के तौर पर उभरे ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची बातचीत में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य हैं.
पाकिस्तान की क्या भूमिका है?
बातचीत के लिए पहुँचे दोनों पक्षों का स्वागत पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक़ डार और पाकिस्तान की सेना के प्रमुख आसिम मुनीर ने किया. पाकिस्तान युद्ध में शामिल इन दोनों देशों के बीच एक अहम मध्यस्थ है, और इसने दो हफ़्ते की नाज़ुक युद्धविराम संधि कराने में अहम भूमिका निभाई है.
बातचीत कितने समय तक चलेगी?
यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि बातचीत कितनी देर तक चलेगी. हालाँकि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर से संबंधित तस्नीम न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार बातचीत एक दिन की है, और यह संभवतः शनिवार शाम को संपन्न होगी.
बातचीत में मुख्य बाधा क्या हैं?
दोनों पक्षों के बीच विवाद के मुख्य बिंदुओं में होर्मुज़ स्ट्रेट पर तेहरान का कड़ा नियंत्रण, लेबनान में चल रहा संघर्ष और ईरान के पास जमा समृद्ध यूरेनियम का भंडार शामिल हैं.
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पाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने बीबीसी से कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली संघर्षविराम वार्ता में लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए.
योजना एवं विकास मंत्री अहसान इक़बाल ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस वीकेंड प्रोग्राम में कहा कि पाकिस्तान का मानना है कि यह संघर्षविराम पूरे क्षेत्र में होना चाहिए और उम्मीद है कि इसराइल "इस ऐतिहासिक मौक़े पर बाधा नहीं बनेगा."
उन्होंने कहा, "हम यह नहीं कर सकते कि क्षेत्र के एक हिस्से में ख़ून बहता रहे और दूसरे हिस्से पर बातचीत होती रहे. मेरा मानना है कि इसराइल को ज़्यादा ज़िम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए और इन वार्ताओं के आगे बढ़ने से पहले कोई फ़ायदा उठाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए."
इक़बाल ने कहा कि पाकिस्तान दोनों पक्षों को साथ लाने की पूरी कोशिश करेगा, जिससे कि वे "किसी समझौते पर पहुंच सकें."
उन्होंने कहा कि अगर दोनों पक्ष "संघर्षविराम को आगे बढ़ाने और एक और दौर की बातचीत" पर सहमत हो जाते हैं, तो वह इसे "कामयाबी" मानेंगे.
अमेरिका और ईरान ने मध्य पूर्व में युद्ध रोकने के लिए दो हफ़्तों के संघर्षविराम पर सहमति जताई है, लेकिन लेबनान में इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच लड़ाई जारी है.
अमेरिका और इसराइल ने संकेत दिया है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है, जबकि ईरान और वार्ता में एक प्रमुख मध्यस्थ पाकिस्तान का कहना है कि इसे शामिल किया जाना चाहिए.
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अमेरिका‑ईरान शांति समझौता कितना टिकाऊ? वार्ताकारों की 5 बड़ी चुनौतियां
पाकिस्तान कैसे बना अमेरिका‑ईरान शांति वार्ता का मंच: पर्दे के पीछे की बड़े दांव वाली कूटनीति
इस्लामाबाद वार्ता: अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों में कौन-कौन शामिल हैं?
अमेरिका से बातचीत के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंचा, समझौते में किसे बताया जा रहा बड़ा रोड़ा
वैभव सूर्यवंशी को कोहली ने दिया 'गिफ़्ट' तो शशि थरूर ने की जमकर तारीफ़
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संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की योजना का स्वागत किया है और दोनों पक्षों से इसमें 'अच्छी मंशा' के साथ शामिल होने की अपील की है.
शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र की प्रेस ब्रीफ़िंग में महासचिव के प्रवक्ता स्टेफन डुजैरिक ने कहा कि गुटेरेस ने "सभी पक्षों से अपील की है कि वे इस कूटनीतिक अवसर का फ़ायदा उठाएं और अच्छी मंशा के साथ एक स्थायी और व्यापक समझौते की दिशा में बातचीत करें, जिससे कि तनाव कम हो और फिर से संघर्ष की स्थिति न बने".
डुजैरिक ने कहा, "महासचिव ने इस बात को दोहराया है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का कोई विकल्प नहीं है और यह पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय क़ानून, जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर भी शामिल है, के अनुरूप होना चाहिए."
उन्होंने यह भी बताया कि गुतेरेस के विशेष दूत क्षेत्र में मौजूद हैं, जिससे कि कूटनीतिक प्रयासों को समर्थन मिल सके.
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पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इसहाक़ डार ने राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का स्वागत किया.
इस दौरान उन्होंने क्षेत्र और वैश्विक में स्थायी शांति हासिल करने के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता की तारीफ़ की.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में डार के हवाले से कहा गया कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान और अमेरिका "सार्थक बातचीत करेंगे".
उन्होंने यह दोहराया कि पाकिस्तान मध्य-पूर्व के संघर्ष का स्थायी और टिकाऊ समाधान निकालने के लिए दोनों पक्षों के बीच सहयोग जारी रखना चाहता है.
अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुँच चुके हैं.
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस, जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ कर रहे हैं.
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होनी है. इसको लेकर पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था हाई अलर्ट पर है.
तस्वीरों में देखिए इस्लामाबाद में कैसा है माहौल.
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ईरान से बातचीत के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुँच गया है.
बीबीसी उर्दू संवाददाता उमर दराज़ नांगियाना को पाकिस्तान के विमानन सूत्रों ने बताया है कि जेडी वेंस का 'एयर फ़ोर्स टू' विमान इस्लामाबाद में उतर चुका है.
पिछले 21 सालों के लंबे अंतराल के बाद किसी अमेरिकी उपराष्ट्रपति की यह पहली पाकिस्तान यात्रा है. इससे पहले, तत्कालीन अमेरिकी उपराष्ट्रपति डिक चेनी ने 2005 में पाकिस्तान का दौरा किया था.
इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता के लिए जेडी वेंस के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और राष्ट्रपति के दामाद जैरेड कुशनर भी आए हैं.
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ के नेतृत्व में एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल पहले ही इस्लामाबाद पहुँच चुका है.
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इसराइल ने अगले हफ़्ते अमेरिका में लेबनान के साथ औपचारिक शांति वार्ता शुरू करने पर सहमति जताई है, लेकिन उसने कहा है कि वह हिज़्बुल्लाह के साथ संघर्षविराम पर चर्चा नहीं करेगा.
यह बात शुक्रवार को अमेरिका में इसराइल के राजदूत माइकल लाइटर ने कही.
लाइटर ने कहा, "इसराइल ने आतंकवादी संगठन हिज़्बुल्लाह के साथ संघर्षविराम पर बातचीत से इनकार किया है. यह लगातार इसराइल पर हमले करता है और दोनों देशों के बीच शांति में सबसे बड़ी बाधा है".
इससे पहले यह ख़बर आई कि अमेरिका में लेबनान और इसराइल के राजदूतों के बीच कथित तौर पर फ़ोन पर बातचीत हुई.
लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के अनुसार, मंगलवार को प्रस्तावित वार्ता इसराइल-हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्षविराम पर केंद्रित होगी.
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अमेरिका से बातचीत के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुँच चुका है. इस टीम का नेतृत्व कर रहे ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने कहा है कि उन्हें अमेरिका पर 'भरोसा नहीं' है.
बीबीसी उर्दू के मुताबिक़, इस्लामाबाद पहुँचने पर ईरान के प्रतिनिधिमंडल के साथ आए ईरानी पत्रकारों से बात करते हुए ग़ालिबाफ़ ने कहा, "एक साल से भी कम समय में दो बार बातचीत के दौरान और हमारे नेक इरादों के बावजूद, हम पर हमला किया गया और कई युद्ध अपराध किए गए."
उन्होंने कहा, "हमारी मंशा अच्छी है, लेकिन हमें अमेरिका पर भरोसा नहीं है."
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी तसनीम के मुताबिक़, ग़ालिबाफ़ ने कहा, "अगर अमेरिका एक सच्चे समझौते के लिए तैयार है और ईरानी लोगों के वैध अधिकारों को मान्यता देता है, तो ईरान भी समझौते के लिए पूरी तत्परता दिखाएगा."
हालाँकि, उन्होंने चेतावनी दी कि "अगर अमेरिका इस वार्ता का इस्तेमाल सिर्फ़ शक्ति प्रदर्शन या धोखे की रणनीति के रूप में करना चाहता है, तो ईरान अपने लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी क्षमताओं पर भरोसा करने के लिए तैयार है."
ग़ालिबाफ़ ने ईरान पर हुए हालिया हमलों के दौरान उनके देश की ओर से की गई रक्षात्मक और जवाबी कार्रवाई का भी जिक्र किया.
उन्होंने कहा, "यह इस बात का सबूत है कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और अपनी संप्रभुता को बनाए रखने के लिए पूरी तरह से तैयार और दृढ़ संकल्पित है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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