तेज़ धमाके, हवा में लहराती मिसाइलें: खाड़ी देशों और इसराइल में रहने वाले भारतीयों ने क्या देखा? – BBC

इसराइल और अमेरिका ने शनिवार को ईरान के शीर्ष नेताओं, अधिकारियों और सैन्य ठिकानों पर हमले किए. इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत हो गई.
साथ ही ईरानी सेना के चीफ़ ऑफ स्टाफ़ अब्दुल रहीम मोसवी, रक्षा मंत्री मेजर जनरल अज़ीज नासिरज़ादेह, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख जनरल मोहम्मद पाकपोर समेत कई सीनियर कमांडर भी मारे गए.
इसके जवाब में ईरान ने शनिवार को पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगी देशों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे.
इसराइल, बहरीन, कुवैत, क़तर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन इन हमलों का निशाना बन रहे हैं.
खाड़ी देशों में फैले इस संघर्ष ने वहां रह रहे भारतीयों समेत कई लोगों के लिए अनिश्चितता पैदा कर दी है.
बीबीसी के पत्रकारों ने इन देशों में रह रहे भारतीयों से बात की और जाना कि उन्होंने अब तक क्या देखा.
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दुबई में पिछले 16 वर्षों से रह रहे उद्यमी थॉमस जॉर्ज ने बीबीसी संवाददाता इशाद्रिता लाहिड़ी को बताया, " 28 फ़रवरी दोपहर करीब 2 बजे हमने पहली बार तेज धमाकों की आवाज़ सुनी. हमने आसमान में दो इंटरसेप्शन (मिसाइलों को हवा में मार गिराना) होते हुए देखे.''
''फिर क़रीब चार बजे दूसरी बार ज़्यादा तेज आवाज़ें सुनाई दीं. शाम साढ़े सात बजे और फिर आठ बजे भी धमाके हुए. उसके बाद करीब पांच-छह घंटे शांति रही. फिर रात 3 बजकर 40 मिनट पर एक और विस्फोट हुआ. 1 मार्च को हालात ज़्यादा नाज़ुक लग रहे थे.''
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थॉमस जॉर्ज ने बताया, ''सोते समय घर हल्का-सा हिल गया, जिससे मेरी और मेरे दोस्तों की नींद खुल गई. बाहर जाकर देखा तो आसमान में कई इंटरसेप्शन हो रहे थे. जब हवाई क्षेत्र बंद हुआ तो शुरुआत में घबराहट हुई. लेकिन पहले और दूसरे इंटरसेप्शन के बाद हमें भरोसा हो गया कि हम सुरक्षित हाथों में हैं."
"फिर खबरें आने लगीं कि कुछ जगहों पर मलबा गिरा है. थोड़ी देर के लिए डर फिर बढ़ा, लेकिन बाद में हालात सामान्य लगने लगे. यहां अभी ज़िंदगी सामान्य है."
उन्होंने कहा कि उड़ानों और कामकाज के सामान्य होने को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है.
थॉमस जॉर्ज ने बताया कि केरल में रह रहे उनके परिवार वाले बहुत चिंतित थे.
जॉर्ज ने कहा, "उन्हें ज़मीनी हालात का पता नहीं था. मैंने उन्हें बताया कि हम सुरक्षित हैं, खाना और ग्रॉसरी भी मंगा सकते हैं. इससे उन्हें तसल्ली हुई."
माधव श्रीमोहन सऊदी अरब में इंजीनियर हैं और इन दिनों दो दोस्तों के साथ बहरीन घूमने आए हैं.
करीब दिन के पौने बारह बजे वे सड़क पर थे. तभी उन्होंने दुकानदारों को दुकानें बंद करते देखा. पहले उन्हें लगा कि नमाज़ का समय है, लेकिन बाद में हमले की ख़बर मिली.
उन्होंने बताया, "हमारे होटल से 5-6 किलोमीटर दूर भारी ट्रैफ़िक जाम था और सायरन बज रहे थे. हमारा होटल अमेरिकी सैन्य अड्डे के बहुत पास था. हमले से ट्रैफ़िक अव्यवस्थित हो गया था.''
श्रीमोहन ने कहा, ''हमें बहरीन के गृह मंत्रालय से संदेश मिला कि इमरजेंसी गाड़ियों के लिए सड़क खाली करें. जहां मिसाइल गिरी वहां से हमारा होटल सिर्फ 150 मीटर दूर था. लोग घबराकर अपने सामान के साथ सड़कों पर निकल रहे थे.सारे परिवार होटल से बाहर आ रहे थे."
"हम डर गए थे. मेरे दोस्त बहुत घबराए हुए थे. वे होटल जाकर अपना सामान लेकर तुरंत निकल जाना चाहते थे. हमने होटल के पीछे से काला, घना धुआं उठते देखा. सूरज दिखाई नहीं दे रहा था. धुएं ने पूरे इलाके को ढक लिया था."
हालांकि उन्होंने कहा, ''यहां कोई दहशत नहीं है लेकिन जो लोग भारत लौटना चाहते हैं, वे उड़ानों को लेकर चिंतित हैं."
दुबई में काम कर रहे टेक प्रोफेशनल सौम्यजीत चौधरी ने कहा, ''थोड़ी बेचैनी है, लेकिन हालात बहुत डरावने नहीं हैं क्योंकि बाहर सब सामान्य दिख रहा है. हम मिसाइलों को हवा में रोके जाते हुए सुनते हैं. कभी-कभी झटके महसूस होते हैं, खासकर जिन घरों में ज्यादा खिड़कियां या कांच की बालकनी है."
उन्होंने कहा, ''रात करीब ढाई बजे इमरजेंसी अलर्ट मिला. सरकार ने घर के अंदर रहने की सलाह दी. भारत में हमारे दोस्तों और परिवार को जो ख़बरें मिल रही हैं, वे हालात से ज्यादा डरावनी हैं. यहां सब कुछ नियंत्रण में है. लेकिन रोज़-रोज़ बालकनी से मिसाइल इंटरसेप्शन देखना सामान्य बात तो नहीं है."
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तेल अवीव में रहने वाले सोम रवि ने बीबीसी संवाददाता रूपसा सेनगुप्ता को बताया वो 20 साल पहले इसराइल आए थे.
उन्होंने कहा, "रविवार को सात-आठ बार सायरन बजे. हर बार हम तुरंत बंकर में चले जाते हैं. यहां स्कूल, पार्क, घर और बस स्टॉप तक में बंकर हैं. तेल अवीव में बाकी सब सुरक्षित है."
निस्सिन मोसेरी 1963 में इसराइल आए थे और अब 80 वर्ष से अधिक उम्र के हैं.
उन्होंने बताया, ''पिछले एक-दो घंटे से शांति है. कल रात हर कुछ घंटे में सायरन बजते थे और हमें बंकर की ओर भागना पड़ता था. हमारे घर में बंकर है, लेकिन मेरी उम्र और बीमारी के कारण वहां पहुंचना कठिन है. मैं अपने केयरगिवर पर निर्भर हूं."
बिजनेसमैन बेनी नायडू 1990 के दशक में इसराइल गए थे और तेल अवीव में दुकान चलाते हैं.
उन्होंने कहा, "सुबह से हालात कुछ बेहतर हैं. मैं और मेरा परिवार सुरक्षित जगह पर हैं. भारतीय समुदाय के लोग मेरी दुकान पर आते हैं."
उन्होंने बताया कि सायरन बजते ही लोग बंकर की ओर भागते हैं. कुछ घरों में निजी बंकर भी हैं. उन्होंने कहा, ''अब हम इसके आदी हो चुके हैं."
नायडू शादी के बाद इसराइल में बस गए थे और अब बिजनेस कर रहे हैं. उन्होंने यहां की नागरिकता ले ली है. उनके तीन बेटे हैं, जिनमें से दो इसराइली सेना में काम कर चुके हैं. वे चाहते हैं कि उनका सबसे छोटा बेटा भी ऐसा करे.
वहीं दुबई के जुमेराह लेक टावर्स में रहने वाले 33 वर्षीय वर्किंग प्रोफ़ेशनल पुश्किन ने बताया, "शनिवार सुबह तेज आवाज़ सुनी, लगा कि बादल गरज रहे हैं. लेकिन मौसम साफ था. बाद में खबरों से पता चला कि मिसाइल इंटरसेप्शन के कारण विस्फोट हुआ था. पूरे दिन ऐसे धमाके और कंपन महसूस हुए."
"हम सरकार की एडवाइजरी का पालन कर रहे हैं और उम्मीद है कि जल्द हालात सामान्य होंगे."
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दुबई में रोनक कोटेचा ने बीबीसी हिन्दी के लिए वहां रहे कुछ लोगों से बात की.
उनसे जुमेराह विलेज सर्कल में रहने वाली कश्मीरा दत्तानी ने बताया, "पिछले 24 घंटों से हम हमले की आवाजें सुन रहे हैं. लेकिन लोग ज्यादा डरे हुए नहीं हैं. रेस्तरां खुले हैं. यहां हालात सामान्य हैं. हमें भरोसा है कि दुबई सरकार स्थिति को संभाल लेगी."
तीन दशकों से दुबई में रह रहीं ज़ारना ने कहा, ''पिछले 24 घंटों में प्रशासन लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है. भगवान की कृपा से यहां कोई घायल नहीं हुआ. हमें यूएई सरकार और सुरक्षा बलों पर पूरा भरोसा है."
(दुबई से रोनक कोटेचा की अतिरिक्त रिपोर्टिंग)
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