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Underwater Internet Cable: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुके युद्ध ने नई चिंता पैदा कर दी है. होर्मुज जलडमरूमध्य पहले ही अवरुद्ध हो चुका है, जिससे वैश्विक ऊर्जन आपूर्ति चोक हो गई. अब आशंका है कि ईरान अगला निशाना समुद्र तल पर बिछी इंटरनेट केबलों को बनाएगा, जहां से दुनिया का ज्यादातर इंटरनेट डेटा ट्रांसफर होता है.
होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने समुद्री खदानें बिछा दी हैं, जिससे शिपिंग कंपनियां और बीमा फर्में यातायात रोक चुकी हैं. लाल सागर के बाब-एल-मंदेब में हूती विद्रोहियों के हमले जहाजों को निशाना बना रहे हैं, जो क्षेत्र को जोखिम भरा बना रहे हैं. इन दोनों संकरे मार्गों के नीचे हजारों किलोमीटर लंबी फाइबर-ऑप्टिक केबलें बिछी हैं, जो वीडियो कॉल से लेकर बैंकिंग तक का डेटा ले जाती हैं.
कैपेसिटी ग्लोबल के अनुसार, लाल सागर से 17 पनडुब्बी केबलें गुजरती हैं, जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका के इंटरनेट ट्रैफिक का मुख्य हिस्सा ढोती हैं. इनके क्षतिग्रस्त होने से डेटा प्रवाह बाधित हो जाता है, जिसका असर लाखों उपयोगकर्ताओं पर पड़ता है. युद्धग्रस्त क्षेत्र में मरम्मत असंभव हो जाती है, क्योंकि विशेष जहाज खतरों से बचते हैं.
टेलीजियोग्राफी के मुताबिक, फारस की खाड़ी में एएई-1, फाल्कन, गल्फ ब्रिज और टाटा-टीजीएन गल्फ जैसी सक्रिय केबलें हैं, जो भारत के विदेशी डेटा कनेक्शन को सपोर्ट करती हैं. ये पतली लाइनें समुद्र तल पर फैली हैं और वैश्विक इंटरनेट का 99 प्रतिशत ट्रैफिक इन्हीं पर निर्भर है. किसी भी हमले से भारत में इंटरनेट स्पीड धीमी पड़ सकती है.
अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल ने यूएई व सऊदी जैसे गल्फ देशों में अरबों डॉलर लगाकर विशाल डेटा सेंटर बनाए हैं. इनका मकसद क्षेत्र को एआई का अगला हब बनाना था, जो एशिया-अफ्रीका से जुड़ते हैं. केबलें कटने पर ये सेंटर अलग-थलग पड़ जाएंगे, जिससे वैश्विक सेवाएं चरमरा जाएंगी.
टेलीजियोग्राफी के एलन मॉडिन के अनुसार, सक्रिय सैन्य अभियानों वाले क्षेत्रों में केबल मरम्मत जहाज नहीं जाते, क्योंकि जोखिम बहुत अधिक है. होर्मुज का सबसे संकरा हिस्सा महज 200 फीट गहरा है, जहां केबलें उथले पानी में हैं. खदानें या जानबूझकर कटौती से हफ्तों-महीनों तक लाइनें ठप रह सकती हैं.
2024 में गाजा युद्ध के समर्थन में हूतियों के हमलों ने लाल सागर की कई केबलों को नुकसान पहुंचाया था. एशिया-अफ्रीका में इंटरनेट स्पीड बुरी तरह घटी, और पूर्ण मरम्मत में महीनों लगे. केंटिक के डग मैडरी ने चेतावनी दी कि दोनों चोक पॉइंट्स एक साथ बंद होने पर वैश्विक तबाही होगी.
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ईरान के नौसैनिक जहाज डूब चुके हैं, लेकिन पानी के नीचे की टीमों और छाया बेड़े सक्रिय हैं. होर्मुज में खदानें पहले ही खतरा पैदा कर चुकी हैं. केबलें अभी काम कर रही हैं, लेकिन मरम्मत जहाजों का अभाव स्थिति को और खतरनाक बना रहा है.
केबलें कटने से बैंक, शेयर बाजार, अस्पताल और एआई सिस्टम प्रभावित होंगे. गल्फ देश सबसे पहले चपेट में आएंगे, लेकिन भारत-यूरोप ट्रैफिक लंबे रास्ते अपनाएगा. इससे दुनिया भर में देरी और मंदी फैलेगी, जो युद्ध की आर्थिक रणनीति का हिस्सा बनेगी.
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