ग्लोबल फायरपावर ने दुनिया की सबसे ताकतवर वायु सेनाओं की रैंकिंग जारी की है. इसमें अमेरिका, रूस और चीन क्रमशः पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर काबिज हैं, जबकि भारत को चौथा स्थान मिला है. लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और अन्य सहायक विमानों की कुल संख्या के आधार पर देशों को रैंकिंग दी गई है.
नई दिल्लीः ग्लोबल फायरपावर ने दुनिया की सबसे ताकतवर वायु सेनाओं की रैंकिंग जारी की है. इसमें अमेरिका, रूस और चीन क्रमशः पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर काबिज हैं, जबकि भारत को चौथा स्थान मिला है. लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और अन्य सहायक विमानों की कुल संख्या के आधार पर देशों को रैंकिंग दी गई है.
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायुसेना के पास कुल 2,296 एयरक्राफ्ट हैं, जिनमें फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टर और सपोर्ट एयरक्राफ्ट शामिल हैं. ये रैंकिंग भारत की लगातार बढ़ती वायु शक्ति और रक्षा आधुनिकीकरण के प्रयासों को दिखाती है. भारतीयवायुसेना में रूसी, फ्रेंच और स्वदेशी विमानों का बेहतरीन मिश्रण है. भारत के पास हल्के लड़ाकू विमान (LCA) तेजस और एडवांस्ड फाइटर जेट्स राफेल जैसे विमान शामिल हैं.
पहले नंबर पर काबिज अमेरिका के पास सबसे आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत वायुसेना है. अमेरिका के पास स्टील्थ फाइटर्स, रणनीतिक बॉम्बर्स और उच्च संख्या में विमान शामिल हैं. दूसरे स्थान पर रूस है जिसके पास मिग और सुखोई लड़ाकू विमानों की ताकत है. तीसरे नंबर पर स्थित चीन ने अपनी वायुसेना को मजबूत बनाने के लिए काफी काम किया है. उसने फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टरों और सपोर्ट एयरक्राफ्ट की संख्या में भारी वृद्धि की है.
इसी तरह विभिन्न प्रकार के लड़ाकू विमानों और स्वदेशी उत्पादन में तेजी के कारण भारत की वायुसेना दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर बन गई है. हाल के वर्षों में अपनी वायुसेना को रक्षा और आक्रामक क्षमताओं से लैस करने वाला दक्षिण कोरिया इस सूची में पांचवें नंबर पर है.
जापान छठे नंबर पर है. वह अत्याधुनिक F-35A स्टील्थ फाइटर जेट्स के साथ अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत कर रहा है. भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान इस फेहरिस्त में सातवें नंबर पर है. उसने सीमित संसाधनों के बावजूद पुराने और नए फाइटर जेट्स का संतुलित बेड़ा तैयार किया है.
भारत अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाने में जुटा हुआ है. राफेल, तेजस और सुखोई जैसे सुपरसोनिक फाइटर जेट्स के अलावा अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर भी युद्धक क्षमता को बढ़ाते हैं. वहीं आने वाले वर्षों में भारत अधिक स्वदेशी विमानों और तकनीकों को शामिल कर अपनी वायु शक्ति को और बढ़ा सकता है.
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