Italy 5th Generation Fighter jet: इटली की संसद ने ब्रिटेन और जापान के साथ मिलकर चल रहे GCAP 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट कार्यक्रम के लिए करीब 9 अरब डॉलर की फंडिंग मंजूर कर दी है. 2035 तक अगली पीढ़ी का विमान तैयार करने का लक्ष्य है. बढ़ती लागत के बावजूद सरकार ने परियोजना को रणनीतिक रूप से अहम बताया है.
Italy 5th Generation Fighter jet: दुनिया के सबसे महंगे 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोग्राम को इटली ने हरी झंडी दे दी है. विवादों के बीच इटली की संसद ने GCAP फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए 9 अरब डॉलर फंडिंग की मंजूरी दे दी. फाइटर जेट की कीमत को लेकर इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी की विपक्षी दल काफी आलोचना कर रहे थे. हालांकि अब प्रोजेक्ट का फंड मंजूर हो गया है. यह फाइटर जेट प्रोग्राम ब्रिटेन, जापान और इटली मिलकर चला रहे हैं. इटली की यह एक प्रमुख रक्षा परियोजना है, जिसकी अनुमानित लागत शुरुआती आकलन से तीन गुना से अधिक बढ़ चुकी है.
ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) की शुरुआत दिसंबर 2022 में इटली, ब्रिटेन और जापान ने मिलकर की थी. इसका उद्देश्य वर्ष 2035 तक अगली पीढ़ी का लड़ाकू विमान विकसित करना है, जिसमें मानवयुक्त और मानवरहित प्लेटफॉर्म, आधुनिक सेंसर और डेटा नेटवर्क को एकीकृत किया जाएगा.
जॉर्जिया मेलोनी ने दी फंड की मंजूरी
इटली की संसद के निचले सदन की रक्षा समिति ने सरकार के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके तहत 2037 तक GCAP के शुरुआती चरणों के लिए 8.77 अरब यूरो खर्च किए जाएंगे. समिति की मंजूरी अंतिम मानी जाएगी, इसलिए इसे पूरे सदन की अलग से स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है. अब इटली का अनुमान है कि GCAP के शुरुआती चरणों की लागत 18.6 अरब यूरो तक पहुंच सकती है. जब 2021 की कीमतों पर इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई थी, तब इसकी लागत लगभग 6 अरब यूरो आंकी गई थी. आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, बढ़ती तकनीकी परिपक्वता, परीक्षण, विकास और डिजाइन लागत को ध्यान में रखते हुए यह अनुमान समय-समय पर संशोधित किया गया है.
GCAP बनाम FCAS में रेस
GCAP का विकास एक संयुक्त उपक्रम के माध्यम से किया जा रहा है, जिसमें ब्रिटेन की BAE Systems, इटली की Leonardo और जापान एयरक्राफ्ट इंडस्ट्रियल एन्हांसमेंट (JAIEC) शामिल हैं. JAIEC को मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज का समर्थन प्राप्त है. इटली की यह मंजूरी ऐसे समय में आई है, जब फ्रांस, जर्मनी और स्पेन का प्रतिद्वंद्वी कार्यक्रम ‘फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम’ औद्योगिक मतभेदों और राजनीतिक अनिश्चितताओं का सामना कर रहा है. दिसंबर में इटली ने कहा था कि जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया भी GCAP में शामिल होने में रुचि दिखा सकते हैं. इतालवी मीडिया के अनुसार, पिछले महीने रोम में हुए शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने इस मुद्दे पर चर्चा की थी.
GCAP के लिए पार्टनर की जरूरत
इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने बुधवार को कहा कि यदि अन्य देश इस परियोजना में शामिल होना चाहें तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर अन्य देश जुड़ना चाहते हैं, तो मैं इसके खिलाफ नहीं हूं. एंटोनियो के बयान से स्पष्ट है कि तीनों देश इस फाइटर जेट प्रोग्राम से पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना चाहते हैं. इस फाइटर जेट प्रोग्राम से जुड़ने के लिए अनाधिकारिक रूप से कई देशों को ऑफर भी दिया गया. जिसमें भारत भी शामिल हैं. इसके अलावा कई यूरोपीय देशों को GCAP से जुड़ने का ऑफर दिया गया था.
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सौरभ पाल का नाता उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से है. इन्होंने अपनी पढ़ाई देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय- इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से की है. सौरभ को लिखने-पढ़ने का शौक है. …और पढ़ें
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