पड़ोसी देश नेपाल में 5 मार्च को होने वाले संसदीय चुनाव के मद्देनजर भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अररिया जिले के जोगबनी बॉर्डर को 2 मार्च की मध्यरात्रि 12 बजे से 5 मार्च की मध्यरात्रि 12 बजे तक पूरी तरह सील कर दिया गया है।
यह 72 घंटे की सीलिंग चुनावी प्रक्रिया को सुचारु और निष्पक्ष बनाने के लिए की गई है, ताकि किसी भी प्रकार की बाधा या अवैध गतिविधि को रोका जा सके।
बाजार पर पड़ा है चुनाव और सील का असर
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित जोगबनी बाजार मुख्य रूप से नेपाल के निवासियों पर निर्भर है। बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक रोजाना यहां घरेलू सामान, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आवश्यक वस्तुएं खरीदने आते हैं। नेपाल के लोग जोगबनी को अपने निकटतम और किफायती बाजार के रूप में देखते हैं।
होली के त्योहार के अवसर पर इस चुनाव और सीमा सीलिंग का दोहरा असर बाजार पर पड़ा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि होली के आसपास आमतौर पर नेपाल से खरीदारों की भीड़ बढ़ जाती है, लेकिन इस बार बाजार में लोगों की संख्या काफी कम दिख रही है।
सीमा पार व्यापार पूरी तरह ठप
कई दुकानदारों ने बताया कि सीमा सील होने से सीमा पार व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे उनकी कमाई पर सीधा प्रभाव पड़ा है। एक व्यापारी ने कहा, “होली पर नेपाल के परिवार सामान खरीदने आते हैं, लेकिन अब बाजार में सन्नाटा है।”
चुनावी सुरक्षा के लिए यह व्यवस्था आवश्यक है। भारत की ओर से एसएसबी और अन्य सुरक्षा बलों ने जोगबनी सहित पूरे बॉर्डर पर हाई अलर्ट जारी किया है। आपातकालीन मामलों में विशेष अनुमति से ही आवागमन संभव होगा।
सीलिंग के कारण जोगबनी बाजार के अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी व्यापार प्रभावित हुआ है। व्यापारी संघों ने प्रशासन से मांग की है कि चुनाव के बाद जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल की जाए। कुल मिलाकर, नेपाल के इस महत्वपूर्ण चुनाव का असर सीमा पार की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
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