Oldest Bridge in UP: देश-प्रदेश की बड़ी और सबसे पुरानी जगह और इमारतों के बारे में जानने की जिज्ञासा सभी में होती है. तो आइये आज इस लेख में जानते हैं यूपी के सबसे पुराने पुल के बारे में.
उत्तर प्रदेश में लगातार पुलों की संख्या बढ़ रही है. PWD के 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 3,235 से अधिक नए पुलों के निर्माण और मजबूतीकरण का लक्ष्य रखा गया है. 2018-2024 के बीच 395 से अधिक पुलों का निर्माण पूरा हुआ है. इसके अलावा, हालिया रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में 82 पुल ऐसे हैं जिन्हें असुरक्षित पाया गया है.
बरेली-अलीगढ़ रेल मार्ग पर स्थित राजघाट गंगा घाट पर बना पुल 150 साल से ज्यादा पुराना है. अग्रेंजों द्वारा इस पुल का निर्माण 1874 में पूरा हुआ था. उस दौर में 8,22,103 रुपये की लागत से हुआ था. जिसका उल्लेख रेलवे द्वारा पुल पर लगे एक शिलालेख से भी मिलता है. लेकिन यह यूपी का सबसे पुराना पुल नहीं है.
यूपी का सबसे पुराना जौनपुर का शाही पुल है, जो मुनीम खान के पुल के नाम से भी जाना जाता है. यह पुल 1568–1569 में मुगल बादशाह अकबर के आदेश पर बनवाया गया था.
जौनपुर का 450 साल से ज्यादा पुराना शाही पुल अपनी मजबूती और खूबसूरती के लिए भी प्रसिद्ध है. इस पुल के निर्माण में पत्थर और चूना गारा का इस्तेमाल किया गया और सीमेंट बिल्कुल भी नहीं. क्योंकि उस दौर में सीमेंट की तकनीक ईजाद नहीं हुई थी. इसके अलावा शाही पुल में 28 मेहराब हैं जो गोमती नदी के पानी को बराबर बांटते हैं. आर्क स्ट्रक्चर का यह पुल भूकंपरोधी है.
राजघाट रेलवे पुल और जौनपुर के मुनीम खान पुल के अलावा प्रयागराज का पुराना नैनी पुल भी काफी पुरानी और ऐतिहासिक है, जिसे रेलवे के लिए 1865 में शुरू किया गया था. यमुना नदी पर बना 1006 मीटर लंबा यह पुल प्रयागराज शहर नैनी क्षेत्र से जोड़ता है.
लेख में दी गई ये जानकारी सामान्य स्रोतों से इकट्ठा की गई है. इसकी प्रामाणिकता की जिम्मेदारी हमारी नहीं है.एआई के काल्पनिक चित्रण का जी यूपीयूके हूबहू समान होने का दावा या पुष्टि नहीं करता.
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