दुनिया के ज्यादातर देशों में नया साल 1 जनवरी से शुरू होता है और वीकेंड शनिवार-रविवार होता है। लेकिन एक देश ऐसा है, जहां न 1 जनवरी से साल शुरू होता है और न ही रविवार छुट्टी का दिन है। यह देश है ईरान। ईरान का कैलेंडर और वीकेंड सिस्टम दोनों ही दुनिया से अलग हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर अक्सर इसे लेकर हैरानी भरे सवाल उठते हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर यहां व्यवस्था अलग क्यों है।
ईरान में आधिकारिक तौर पर Solar Hijri calendar लागू है। इसे पर्शियन या ईरानी कैलेंडर भी कहा जाता है। इसे साल 1925 में आधिकारिक दर्जा मिला था और तब से यही देश का नागरिक कैलेंडर है। इस कैलेंडर की सबसे खास बात यह है कि यह वसंत विषुव के दिन से शुरू होता है। यानी जब दिन और रात बराबर होते हैं, उसी समय नया साल शुरू होता है। इस दिन को Nowruz कहा जाता है। नौरोज सिर्फ नया साल नहीं, बल्कि एक बड़ा सांस्कृतिक त्योहार है। घरों में खास सजावट होती है, परिवार एक साथ बैठता है और नए साल का स्वागत करता है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक सोलर हिजरी कैलेंडर पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर असली गति के आधार पर तैयार किया गया है। यानी यह खगोलीय गणना पर आधारित है। इसी वजह से इसकी तारीखें मौसम और खगोलीय घटनाओं से बहुत सटीक मेल खाती हैं। कई बार इसे ग्रेगोरियन कैलेंडर से भी ज्यादा सटीक बताया जाता है।
अक्सर कहा जाता है कि सिर्फ ईरान ही इस कैलेंडर का उपयोग करता है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। Afghanistan भी इस कैलेंडर को अपनाता है, हालांकि वहां ग्रेगोरियन कैलेंडर भी कई जगहों पर साथ-साथ चलता है। फिर भी, पूरी तरह आधिकारिक और प्रमुख उपयोग ईरान में ही होता है।
अब बात करते हैं वीकेंड की, जो लोगों को सबसे ज्यादा चौंकाता है। जहां दुनिया के ज्यादातर देशों में शनिवार और रविवार छुट्टी होती है, वहीं ईरान में कामकाजी सप्ताह शनिवार से बुधवार तक चलता है।
यहां आधिकारिक छुट्टी गुरुवार और शुक्रवार को होती है। शुक्रवार इस्लाम में जुमे की नमाज का दिन है, इसलिए इसे मुख्य अवकाश माना जाता है। सरकारी दफ्तर, स्कूल और कई निजी संस्थान इन दो दिनों में बंद रहते हैं। हाल के वर्षों में यह चर्चा भी हुई कि वीकेंड को शुक्रवार-शनिवार किया जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ तालमेल बेहतर हो सके। लेकिन फिलहाल व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
ईरान का कैलेंडर और वीकेंड सिस्टम सिर्फ तारीखों या छुट्टियों का मामला नहीं है। यह देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है। जब पूरी दुनिया एक जैसी व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, तब ईरान ने अपनी परंपरा और खगोलीय आधार पर बना सिस्टम बनाए रखा है। शायद यही वजह है कि जब भी ईरान की बात होती है, लोग हैरान होकर पूछते हैं – आखिर वहां साल 1 जनवरी से क्यों नहीं शुरू होता और रविवार को छुट्टी क्यों नहीं होती? जवाब सीधा है: हर देश की अपनी परंपरा, इतिहास और सोच होती है। ईरान ने अपने हिसाब से एक ऐसा सिस्टम अपनाया है, जो उसके समाज और संस्कृति से मेल खाता है। और यही बात उसे दुनिया से अलग बनाती है।
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