प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से पहले रविवार (31 अगस्त 2025) को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच हुई इस मुलाकात को कई मायनों में अहम माना जा रहा है. पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत चीन के साथ आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है. आइए जानते हैं कि आजादी के बाद पंचशील सिद्धांत से लेकर LAC पर तनाव तक भारत और चीन के बीच संबंध कब-कैसे रहे हैं.
क्या थे पंचशील सिद्धांत
1. हर देश एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे.
2. कोई भी देश एक-दूसरे पर हमला नहीं करेगा.
3. दोनों देश एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार का कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे.
4. दोनों देश एक-दूसरे के साथ समानता का व्यवहार करेंगे और परस्पर लाभ के सिद्धांत पर काम करेंगे.
5. दोनों देश शांति बनाए रखने का प्रयास करेंगे. दोनों देश एक-दूसरे के अस्तित्व पर किसी भी तरह का संकट पैदा नहीं करेंगे.
हिंदी चीनी भाई-भाई का नारा
इस समझौते के बाद ऐसा लगने लगा था कि भारत और चीन के रिश्ते ठीक हो जाएंगे, लेकिन जो हुआ वो इसके ठीक विपरीत था. इसके बाद चीन के पीएम झोउ एन लाई भारत दौरे पर आए. यहां उन्होंने हिंदी चीनी भाई-भाई का नारा दिया. यहां से जाने के बाद चीन ने भारत के अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश पर अपना अधिकार बताना शुरू कर दिया.
चीन अपनी विस्तारवादी नीति के तहत तिब्बत के लोगों पर लगातार अत्याचार कर रहा था, जिस वजह से धार्मिक गुरु दलाई लामा को भारत में शरण दे दी गई. इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों दूरियां और बढ़ गई. इसके बाद चीन ने भारत पर तरह-तरह के आरोप लगाने शुरू कर दिए, जिसका नतीजा ये हुआ कि दोनों देश युद्ध के मुहाने पर खड़े हो गए.
भारत-चीन के बीच 1962 की जंग
चीन ने 20 अक्टूबर, 1962 को भारत पर हमला कर दिया था. भारत को कभी यह शक नहीं हुआ कि चीन हमला भी कर सकता है. चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी ने लद्दाख पर और नार्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (नेफा) में मैकमोहन लाइन के पार हमला किया था. इस युद्ध को भारत को अपना बड़ा क्षेत्र गंवाना पड़ा, जो अभी चीन के कब्जे में है.
1967 और 1975 में चीन ने फिर किया हमला
इसके बाद 1967 में भारत और चीन के बीच नाथु ला में टकराव हुआ. 1975 में भारतीय सेना के गश्ती दल पर अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर चीनी सेना ने हमला किया था. दोनों देशों ने आपसी सहमति से सीमा विवाद को सुलझाने की कोशिशों के बीच राजनीतिक रिश्ते बनाए रखते हुए व्यापार और निवेश को लंबे समय तक चलते रहने दिया. हालांकि 2020 में फिर गलवान में हुए सैन्य झड़प के बाद भारत ने सख्त कदम उठाए थे.
गलवान झड़प के बाद बिगड़ गए रिश्ते
लद्दाख के गलवान घाटी में जून 2020 को हुए सैन्य झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे. हालांकि भारत से ज्यादा चीन के सैनिक मारे गए थे, लेकिन उसने कभी भी इसका जिक्र नहीं किया. इसके बाद केंद्र सरकार ने 29 जून को चीनी लिंक वाले 59 ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसमें बेहद लोकप्रिय टिकटॉक और यूसी ब्राउजर भी शामिल थे. दोनों देशों के बीच डायरेक्ट फ्लाइट को भी बंद कर दिया गया और चीन से निवेश की जांच बढ़ा दी गई.
पीएम मोदी ने पिछले साल रूस के कजान में शी जिनपिंग से मुलाकात की थी. इसका जिक्र करते हुए अब पीएम मोदी ने कहा, “पिछले साल कजान में हमारी बहुत ही सार्थक चर्चा हुई जिसने हमारे संबंधों को सकारात्मक दिशा दी. सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद दोनों देशों के बीच शांति और स्थिरता का माहौल बना है.”
Source: IOCL
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