परमाणु बम बनाकर ही रहेगा ईरान! आखिरी बंदिश को भी जल्द कहेगा Bye-Bye – AajTak

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ईरान की संसद परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने की संभावना पर विचार कर रही है. यह एक ऐसा कदम है, जो तेहरान को परमाणु हथियार विकसित करने पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से मुक्त करेगा. इसके साथ ही उसके परमाणु कार्यक्रम की वैश्विक निगरानी भी हटेगी. 
ईरान ने मौजूदा जंग के बीच एनपीटी से बाहर निकलने की कवायद को न्यायोचित ठहराया. इस दौरान ईरान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बुलिंग का हवाला दिया. यह खबर ऐसे समय में आई है, जब कहा जा रहा है कि अमेरिका की ईरान के यूरेनियम पर कब्जा करने की योजना है. 
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि ऐसी संधि में शामिल होने का क्या लाभ है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव डालने वाले पक्ष न केवल हमें इसके अधिकारों का लाभ नहीं लेने देते बल्कि हमारे परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला भी करते हैं? उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि तेहरान ने कभी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं की है और न ही भविष्य में करेगा.
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान व्यापक नीति बदलाव पर विचार कर रहा है, जिसमें संभावित तौर पर एनपीटी से बाहर निकलना, 2014 के परमाणु समझौते से जुड़ा अपना काउंटरमेजर कानून रद्द करना और परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण विकास के लिए ब्रिक्स देशों सहित समान विचारधारा वाले देशों के साथ एक नया अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार करना शामिल है.
अमेरिका का आरोप है कि ईरान चोरी-छिपे परमाणु हथियार बना रहा है. यह आरोप लगाते हुए पिछले महीने 28 फरवरी को अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला कर दिया था जबकि तेहरान ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज किया है.
इससे पहले पिछले साल जून में अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों फोर्डो यूरेनियम संयंत्र, नतांज परमाणु संंयत्र और इस्फहान को निशाना बनाया था. कहा गया था कि ईरान ने इन ठिकानों से लगभग 400 किलोग्राम यूरेनियम स्थानांतरित किया था, जो हथियारों के उपयोग के लिए आगे संसाधित किया जा सकता है.
अमेरिका और इजरायल लंबे समय से ईरान पर आरोप लगा रहे हैं कि तेहरान हथियार कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है. ऐसे में एनपीटी से संभावित रूप से बाहर निकलने की ईरान की समीक्षा जारी है. 
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण बना हुआ है. लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि 1970 की संधि से बाहर निकलने से ईरान की परमाणु गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी कमजोर होगी. पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी और यह नई प्रतिबंधों या कूटनीतिक अलगाव को जन्म दे सकता है. बता दें कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम 2018 के बाद से काफी विकसित हो गया है. अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने ईरान के बढ़ते उच्च समृद्ध यूरेनियम भंडार पर बार-बार चिंता जताई है.
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