West Bengal Elections: एआईएआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बंगाल चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. हालांकि काफी समय पहले से ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि बिहार के बाद मुस्लिमों की असली रहनुमाई का दावा करने वाले ओवैसी बंगाल के सियासी अखाड़े में जरूर कूदेंगे.
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AIMIM alliance with Aam Janata Unnayan Party: पश्चिम बंगाल का सियासी मुकाबला दिलचस्प हो गया है. लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ऐलान किया है कि एआईएमआईएम विधानसभा चुनाव (West Bengal Elections 2026), ममता बनर्जी की पार्टी के बागी नेता हुमायूं कबीर के नए राजनीतिक दल ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के साथ मिलकर लड़ेगी. एक ओर ममता बनर्जी बंगाल की मुस्लिम बहुल सीटों पर भावुक अपील कर चुकी है. दूसरी ओर उन्हीं के दल से बागी होकर नई पार्टी बनाने वाले हुमायूं कबीर के साथ ओवैसी का मिलकर चुनाव लड़ना बंगाल के मुस्लिम मतदाताओं को कंफ्यूज कर सकता है.
टीएमसी का खेल खराब करेंगे ओवैसी?
बंगाल में सरकार बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 148 है. साल 2011 से बंगाल की सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी ने प्रदेश में ऐसी व्यूह रचना कर रखी है, जिससे बीजेपी अबतक पार नहीं पा सकी है.ममता बनर्जी कई बार बीजेपी नेताओं के जीत के दावों के गुबार की हवा निकाल चुकी हैं. कहा जाता है कि दीदी की व्यूह रचना ऐसी है कि M+M फार्मूले पर तहत टीएमसी को बहुमत के लिए राज्य की कुल 294 सीटों में बस 25 फीसदी सीटों पर मेहनत करनी होती है, बाकी 25 फीसदी (मुस्लिम बहुल आबादी वाली) सीटें वैसे ही झोली में आ गिरती हैं.
ओवैसे के ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी नेता जय प्रकाश ने कहा. ‘ओवैसी को चुनाव लड़ने के लिए बीजेपी फंडिंग करती है. पहले के कई चुनावों में ऐसा हो चुका है. AIMIM का हैदराबाद के अलावा कहीं कोई असर नहीं है.’
#WATCH | Kolkata | TMC leader Jay Prakash Majumdar says, “…Asaduddin Owaisi will get money from the BJP, he got money in the previous assembly elections also…All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen has no political clout anywhere except Hyderabad…” https://t.co/x34kKnhbau pic.twitter.com/VamRLK1CFD
— ANI (@ANI) March 22, 2026
#WATCH | Kolkata | TMC leader Jay Prakash Majumdar says, “…Asaduddin Owaisi will get money from the BJP, he got money in the previous assembly elections also…All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen has no political clout anywhere except Hyderabad…” https://t.co/x34kKnhbau pic.twitter.com/VamRLK1CFD
— ANI (@ANI) March 22, 2026
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ममता का एम+एम फार्मूला
ममता बनर्जी के एम+एम फार्मूले में पहले एम का मतलब मुस्लिम मतदाता और दूसरे एम का मतलब महिला मतदाता हैं. मुस्लिम बहुल इलाकों में टीएमसी की बल्ले-बल्ले होने की वजह रॉकेट साइंस नहीं, एकदम सिंपल है. उनका ब्रह्मास्त्र बंगाल में मुसलमानों की 27 फीसदी आबादी है. बीजेपी यूं ही नहीं कहती कि ‘दीदी’ के राज्य में बंगाल के कई जिलों की डेमोग्राफी बदल चुकी है.
दरअसल बंगाल के कई जिलों में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या इतनी ज्यादा है कि वहां नंबर के हिसाब से हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं. इन्हीं मुस्लिम बहुल इलाकों में टीएमसी की जीत का स्ट्राइक रेट हैरान करने वाला रहा है. साल 2011 और 2016 के विधानसभा चुनावों में मुसलमान मतदाताओं का वोट कांग्रेस और टीएमसी के बीच बंटा था, लेकिन जीत फिर भी ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को ही मिली थी.
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2021 के चुनाव में ‘दीदी’ की रणनीति ने मुस्लिम मतदाताओं के जज्बात बदल दिए थे. बीजेपी का आक्रामक प्रचार देख हैरान बंगाली मुसलमानों ने कांग्रेस और आईएसएफ (ISF) को टाटा बाय-बाय करते हुए पूरी ‘ममता’ टीएमसी के ऊपर उड़ेल दी. जिसका नतीजा दिखा, राज्य की 85 मुस्लिम बहुल सीटों पर दिखा. उस बेल्ट की 75 सीटें अकेले टीएमसी ने जीत लीं. दक्षिण 24 परगना की 31 में से 30, मुर्शिदाबाद की 22 में से 20, मालदा की 12 में से 8, उत्तर दिनाजपुर की 9 में से 7, बीरभूम की 11 में से 10 सीटों पर टीएमसी जीती. कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां यहां ‘अता-पता-लापता’ हो गईं.
दूसरे एम की बात करें तो ममता बनर्जी का अगला फोकस महिलाओं पर है. टीएमसी के चुनावी घोषणापत्र में उन्होंने लक्ष्मी भंडार योजना का दायरा बढ़ाया है. टीएमसी ने ‘लक्ष्मी भंडार’ स्कीम के तहत, जनरल कैटेगरी की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये और SC/ST को हर महीने 1,700 रुपये देने का ऐलान किया है. वहीं दुआरे यानी घर पर इलाज मुहैया करवाने के चुनावी वायदे के साथ दीदी ने महिलाओं को अपने पाले में करने का गोल सेट किया है.
क्या बोले हुमायूं?
बंगाल में ‘बाबरी’ मस्जिद की नींव रखकर हुमायूं कबीर, मुस्लिम मतदाताओं के एक वर्ग के दिलों में जगह पक्की कर चुके हैं. उनके समर्थक उन्हें मुसलमानों का रहनुमा बता रहे हैं. ईद की नमाज के आयोजन में कबीर ने अपनी राजनीतिक योजना का खुलासा करते हुए कहा था, उनकी पार्टी 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. हुमायूं कबीर ने बताया उनकी पार्टी ‘ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन’ के साथ गठबंधन में है, जो कई सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
अब देखना होगा कि मुस्लिम मतदाता ओवैसी और कबीर की सामूहिक अपील पर कितना ध्यान देंगे. बीजेपी इस बार बंगाल में परिवर्तन लाने का दावा कर रही है. वहीं बीजेपी के ऐसे तमाम दावों से इतर ‘मां-माटी और मानुष’ तो कभी बंगाली बनाम बाहरी और ‘जय श्री राम’ के जवाब में ‘जय काली कलकत्ते वाली’ कहकर दीदी ने 2021 के चुनावों में व्हील चेयर पर बैठकर प्रचार करते हुए बीजेपी को 77 सीटों पर रोक दिया था.
विधानसभा चुनाव कार्यक्रम
पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में वोटिंग होगी. पहले फेज का नोटिफिकेशन 30 मार्च को जारी होगा, कैंडिडेट 6 अप्रैल तक नामांकन भर सकेंगे. नाम वापसी की इजाजत 9 अप्रैल तक होगी. दूसरे फेज का नोटिफिकेशन 2 अप्रैल को जारी होगा. 9 अप्रैल को नॉमिनेशन और 13 अप्रैल तक नाम वापसी हो सकेगी. चुनावी नतीजे 4 मई को आएंगे.
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श्वेतांक रत्नाम्बर पत्रकारिता जगत में 21 साल से ज्यादा का अनुभव रखते हैं. देश-दुनिया की ख़बरों को आसान भाषा में बताने में महारत रखने वाले श्वेतांक को राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ है…और पढ़ें
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