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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जेल में बंद हैं, उनकी रिहाई की मांग को लेकर सैकड़ों समर्थक इस्लामाबाद में घुस गए हैं. प्रदर्शनकारियों ने उनकी रिहाई की मांग के साथ ही संसद तक मार्च निकालकर धरना देने का ऐलान किया है. इसे लेकर सरकार ने सख्त नाकाबंदी की. साथ ही प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए नेशनल हाईवे पर बैरिकेड्स लगाए, लेकिन इमरान के समर्थकों ने बैरिकेड्स हटा दिए, इस दौरान इमरान के समर्थकों की पुलिस के साथ हिंसक झड़प भी हुई, जिसमें एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई, जबकि दर्जनों घायल हो गए हैं.
72 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पिछले साल अगस्त से जेल में बंद हैं, उन्होंने राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन के लिए आह्वान किया था. जिसमें उन्होंने चुराए गए जनादेश, लोगों की अन्यायपूर्ण गिरफ्तारी और 26वें संशोधन के पारित होने की निंदा की, साथ ही कहा कि इसने “तानाशाही शासन” को मजबूती मिली है.
खैबर-पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंदापुर और इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने रविवार को आतंकवाद प्रभावित प्रांत से अपनी यात्रा शुरू की, जिसका उद्देश्य डी-चौक पर धरना देना था, जो कई महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों के करीब स्थित है इसमें राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय, संसद और सर्वोच्च न्यायालय शामिल हैं. अधिकारियों ने शिपिंग कंटेनर रखकर राजमार्गों को ब्लॉक कर दिया था, लेकिन लिफ्टिंग उपकरण और अन्य भारी मशीनों के साथ प्रदर्शनकारियों ने इन्हें हटा दिया और आगे बढ़ गए.
संवेदनशील इलाकों में इंटरनेट सेवा बंद
मुख्यमंत्री गंदापुर के नेतृत्व में खैबर-पख्तूनख्वा से काफिला इस्लामाबाद प्रवेश कर गया. इमरान की पार्टी पीटीआई नेता शौकत यूसुफजई का हवाला देते हुए डॉन ने बताया कि काफिला संगजानी टोल प्लाजा से इस्लामाबाद में प्रवेश कर गया. पार्टी ने इस्लामाबाद की सीमा में खैबर-पख्तूनख्वा के काफिले की फुटेज भी शेयर की. वहीं, सरकार ने धारा 144 लगाकर रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया है, इस धारा का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों को प्रतिबंधित करने के लिए किया जाता है. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स हटाकर और सुरक्षाकर्मियों से भिड़कर आगे बढ़ना शुरू कर दिया. एक झड़प में हकला इंटरचेंज पर एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई. वहीं, पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने शनिवार देर रात घोषणा की कि संवेदनशील इलाकों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है.
हिंसक झड़प में दर्जनों पुलिसकर्मी घायल
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की पुलिस ने X पर एक पोस्ट में कहा कि कांस्टेबल मुहम्मद मुबाशिर बिलाल, जिन्हें इस्लामाबाद में तैनात किया गया था, कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करते समय “उपद्रवियों की हिंसा” के कारण घायल हो गए.
इसमें यह भी कहा गया कि सरगोधा पुलिस का एक अन्य कांस्टेबल “उपद्रवियों द्वारा की गई गोलीबारी” के कारण घायल हो गया और उसका इलाज किया जा रहा है. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि झड़पों में दर्जनों पुलिसकर्मी घायल हुए हैं.
हिंसा पर क्या बोले शहबाज शरीफ?
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पुलिसकर्मी की मौत की कड़ी निंदा की और आदेश दिया कि दोषियों की पहचान की जाए और उन्हें कड़ी सजा दी जाए. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध के नाम पर पुलिस अधिकारियों पर हमला करना निंदनीय है. वहीं, गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि हिंसक प्रदर्शनकारियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा.
बुशरा बीबी ने की समर्थकों से अपील
पीटीआई के प्रदर्शनकारी शाम को राजधानी क्षेत्र में घुस आए. बुशरा बीबी ने एक वीडियो मैसेज में कहा कि लोग इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं और उन्होंने उन लोगों से राजधानी पहुंचने का आह्वान किया जो बाहर नहीं आए हैं. हजारा इंटरचेंज के पास एक स्टॉप पर उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि मेरे भाइयों, जब तक इमरान हमारे साथ नहीं हैं, हम यह मार्च खत्म नहीं करेंगे. मैं अपनी आखिरी सांस तक वहीं रहूंगी और आप सभी को मेरा साथ देना होगा, यह सिर्फ़ मेरे पति को लेकर लड़ाई नहीं हैं बल्कि देश और उसके नेता की लड़ाई है. बुशरा बीबी ने कहा कि इमरान खान ने लोगों से अपील की है कि जो लोग अभी तक बाहर नहीं आए हैं, उन्हें अपने और अपने देश के भविष्य के लिए बाहर आना चाहिए.
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