Allahabad High Court on Controversial Social Media Case: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया पर “पाकिस्तान जिंदाबाद” लिखकर पोस्ट करने के आरोपी की जमानत को लेकर अहम आदेश दिए हैं. अदालत ने फैजान नाम के आरोपी को जमानत देते हुए शर्त रखी है कि वह भविष्य में देश की प्रतिष्ठा या किसी समुदाय के खिलाफ कोई आपत्तिजनक पोस्ट शेयर नहीं करेगा.
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Uttar Pradesh News: सोशल मीडिया पर की गई एक विवादित पोस्ट से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक आरोपी को जमानत दे दी है. अदालत ने जमानत देते हुए यह भी साफ किया कि आरोपी भविष्य में सोशल मीडिया पर ऐसी कोई भी पोस्ट शेयर नहीं करेगा जो देश की प्रतिष्ठा या किसी समुदाय के खिलाफ हो. साथ ही अदालत ने चेतावनी दी है कि अगर इन शर्तों का उल्लंघन किया गया तो जमानत रद्द की जा सकती है.
दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पहलगाम हमले के बाद अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘इंस्टाग्राम’ पर “पाकिस्तान जिंदाबाद” लिखकर पोस्ट शेयर करने के आरोपी शख्स को जमानत दे दी है. अदालत ने हालांकि आरोपी को भविष्य में इस तरह की कोई भी पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर करने से रोक दिया है, जो इस देश की प्रतिष्ठा के खिलाफ हो.
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इलाहाबाद हाई कोर्ट की जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने फैजान नाम के एक शख्श जरिये दायर जमानत याचिका पर गुरुवार (26 फरवरी) को यह आदेश पारित किया. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि “याचिकाकर्ता सोशल मीडिया पर ऐसी कोई आपत्तिजनक पोस्ट साझा नहीं करेगा जो इस देश की प्रतिष्ठा या किसी समुदाय के खिलाफ हो.” अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन जमानत रद्द करने का आधार होगा.
मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ एटा पुलिस के जरिये पिछले साल भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने अदालत में दलील दी कि आरोपी ने हालांकि आपत्तिजनक पोस्ट शेयर की थी, लेकिन BNS की धारा 152 उस पर लागू नहीं होती, क्योंकि उसने ऐसी कोई टिप्पणी साझा नहीं की जो भारत के लिए अपमानजनक हो.
आरोपी के वकील ने यह भी कहा कि किसी शत्रु देश का समर्थन करना BNS की धारा 152 के दायरे में नहीं आता है. आरोपी के वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी 3 मई 2025 से जेल में बंद है और अगर उसे जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह अपनी आजादी का दुरुपयोग नहीं करेगा.
वहीं, राज्य सरकार के वकील ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह अपराध गंभीर प्रकृति का है. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपराध की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्य, जेलों में बंद कैदियों की ज्यादा संख्या और निचली अदालतों में लंबित मामलों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए आरोपी को जमानत देने का आदेश दिया है.
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रैहान शाहिद का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले से हैं. वह पिछले पांच सालों से दिल्ली में सक्रिय रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. Zee न्यूज़ से पहले उन्होंने ABP न्यूज़ और दू…और पढ़ें
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