पाकिस्तान 2025 में सुरक्षा परिषद में होगा शामिल; क्या हैं मायने? भारत के लिए कितनी चुनौतियां – Zee News Hindi

UN Security Council: नए साल की शुरुआत के साथ ही संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के कई सदस्‍य बदलने जा रहे हैं. इसमें पाकिस्‍तान की गैर-स्‍थायी सदस्‍य के तौर पर एंट्री होने जा रही है.
Trending Photos
Pakistan in UNSC: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में गैर-स्थायी सदस्य के तौर पाकिस्तान भी शामिल होने जा रहा है. उसे अब आतंकवादियों पर प्रतिबंध लगाने के मामले में एक तरह की वीटो शक्ति प्राप्त हो जाएगी जिन्हें वह अब तक पनाह देता आया है. जून में अस्थायी सदस्य के रूप में चुने जाने के बाद, पाकिस्तान सुरक्षा परिषद में एशिया-प्रशांत देशों के लिए दो सीटों में से एक पर जापान की जगह लेगा और दो साल तक यह सीट पर रहेगा.

यह भी पढ़ें: भारत के इन पड़ोसी देशों की सेना दुनिया में सबसे कमजोर, मिसाइल तो छोड़ो युद्ध के लिए टैंक तक नहीं

बीजिंग पर नहीं रहेगी निर्भरता

इस्लामाबाद को अब 26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड साजिद मीर जैसे अपने आतंकवादियों की सुरक्षा के लिए इस्लामिक स्टेट और अलकायदा प्रतिबंध समिति में बीजिंग पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जो इन दोनों संगठनों से जुड़े व्यक्तियों और समूहों को आतंकवादी घोषित करती है और उन पर प्रतिबंध लगाती है.
यह भी पढ़ें: पहले आतंकियों के सामने सरेंडर करके करवाई बेइज्‍जती, अब सफाई देने में जुटा पाकिस्‍तान

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में केवल स्थायी सदस्यों के पास निर्णयों को लेकर वीटो की शक्ति होती है, लेकिन गैर-स्थायी सदस्यों के पास भी ‘आतंकवाद के लिए प्रतिबंध समितियों’ में एक प्रकार की वीटो शक्ति होती है क्योंकि वे स्वीकृत मानदंडों के तहत आम सर्वसम्मति से कार्य करती हैं. हालांकि सर्वसम्मति प्रक्रिया द्वारा दिए गए वर्चुअल वीटो की निंदा की जाती रही है, ‘इस्लामिक स्टेट-अल-कायदा प्रतिबंध पैनल’ के पूर्व प्रमुख न्यूजीलैंड ने इसे ‘समिति की प्रभावशीलता में सबसे बड़ा अवरोधक’ बताया है.
यह भी पढ़ें: 11 साल की मूंछों वाली राजकुमारी जिसके लिए 13 लोगों ने दे दी थी जान! अब क्‍यों हो रहे खूबसूरती के चर्चे?
भारत ने की पारदर्शिता की मांग
भारत ने प्रतिबंध समितियों की कार्यप्रणाली को भूमिगत करार दिया है, जो कानूनी आधार के बिना अस्पष्ट प्रथाओं पर आधारित है. साथ ही इसमें पारदर्शिता की मांग की है ताकि निर्णयों के औचित्य और उन्हें कैसे लिया जाता है, यह स्पष्ट हो सके.
यह भी पढ़ें: चीन ने दौड़ाई दुनिया की सबसे तेज ट्रेन, वंदे भारत से ढाई गुना रफ्तार, फीचर-टेक्‍नोलॉजी जानकर कानों से निकलेगा धुआं
कश्‍मीर मुद्दे को उठाने के लिए मिलेगा प्‍लेटफॉर्म
पाकिस्तान को अब सुरक्षा परिषद में कश्मीर पर अपनी अभियान को और जोरदार तरीके से उठाने का मंच मिल जाएगा, यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे वह चर्चा के विषय की परवाह किए बिना नियमित रूप से उठाता है, तथा भारत पर तीखे हमले करता है. हालांकि, यह एक निरंतर प्रचार स्टंट ही रहेगा क्योंकि पाकिस्तान एक ऐसी आवाज रहा है जो सुनसान में गूंजती है. इस्लामाबाद कश्मीर को फिलिस्तीन समस्या से जोड़ने की कोशिश करता रहा है लेकिन किसी अन्य देश को अपने साथ नहीं जोड़ सका.
भारत के खिलाफ कर सकता है दुष्‍प्रचार
जुलाई में जब पाकिस्तान सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता करेगा, तो वह अपनी पसंद के विषयों पर कम से कम दो ‘सिग्नेचर इवेंट्स’ आयोजित कर सकता है, जिनमें उच्च-स्तरीय भागीदारी होगी, जिसमें उसके अपने और आमंत्रित सदस्य दोनों शामिल होंगे. भले ही यह सीधे तौर पर इसे ‘भारत विरोधी’ शो न बनाए, लेकिन यह किसी ऐसे विषय को उठा सकता है जिसका इस्तेमाल वह भारत और कश्मीर पर दुष्प्रचार के लिए कर सकता है.
जापान के हटने के साथ, ध्रुवीकृत परिषद में संतुलन में एक सूक्ष्म बदलाव आ गया है, जहां चीन, रूस और पाकिस्तान का त्रिकोण कई मुद्दों पर उभर कर सामने आएगा. अन्य एशियाई सदस्य दक्षिण कोरिया है, जो जापान की तरह पश्चिम समर्थक है.
चीन के वोट पर रखी नजर
महासभा में पाकिस्तान ने कई मुद्दों पर चीन के मतदान पर नजर रखी है, खासकर यूक्रेन मामले पर, जब उसने बीजिंग के साथ मिलकर रूस को आक्रामक देश के रूप में नामित करने वाले प्रस्ताव पर मतदान किया, जबकि आम तौर पर उसने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था. पाकिस्तान ने हमेशा फिलिस्तीन का खुलकर समर्थन किया है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसके इस मुद्दे पर आवाज उठाने की उम्मीद है, जहां वह अमेरिका के साथ आमने-सामने हो सकता है.
आतंकवाद के मामले में दोहरी चाल
इस्लामाबाद आतंकवाद के मामले में विरोधाभासी रवैया अपनाता है.  भारत के खिलाफ आतंकवादियों को समर्थन या तैनात करने के बावजूद, वह, अपने खिलाफ तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकी हमलों की निंदा करता है, जिसके बारे में उसका कहना है कि वे अफगानिस्तान में स्थित हैं.
यह उम्मीद की जा सकती है कि वह आतंकवाद में अफगानिस्तान की भूमिका की निंदा करेगा तथा उन समूहों पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास करेगा जो उसके अनुसार उसे निशाना बनाते हैं.
बता दें कि एशिया प्रशांत समूह परिषद के लिए अपने नामांकित व्यक्तियों को बारी-बारी से चुनता है, जिनका चयन सर्वसम्मति से किया जाता है. इस समूह के 53 सदस्य पूर्व में छोटे से नाउरू से लेकर पश्चिम में यूरोप के अंतिम छोर पर स्थित साइप्रस तक फैले हुए हैं.  भारी प्रयास के बाद, इस्लामाबाद को चीन, सऊदी अरब, ईरान, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, लेबनान और सिंगापुर जैसे लगभग 20 देशों का समर्थन प्राप्त हुआ और समूह ने 2023 में इसका समर्थन किया. परिषद में अपनी आठवीं पारी के लिए 193 सदस्यीय महासभा में पाकिस्तान को 182 वोट मिले. (आईएएनएस)
 
Thank you
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News