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ईरान पर अमेरिकी हमले की संभावना और पाक-अफगान 'ओपन वॉर' से दक्षिण एशिया में अस्थिरता बढ़ रही है। काबुल ने जवाबी कार्रवाई की है। भारत पूरे घटनाक्रम पर क …और पढ़ें
पिछले रविवार को भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता व आजादी का समर्थन किया था (फाइल फोटो)
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एक तरफ जहां ईरान पर अमेरिकी हमले की संभावना बढ़ गई है वहीं पाकिस्तान द्वारा अफगान शहरों पर हवाई हमलों और “ओपन वार” की घोषणा के बाद दक्षिण एशिया अस्थिरता की तरफ बढ़ता दिख रहा है। काबुल ने जवाबी कार्रवाई की है और पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है।
इस तेजी से बिगड़ते परिदृश्य के बीच नई दिल्ली ने सार्वजनिक तौर पर आज कोई बयान जारी तो नहीं किया लेकिन आधिकारिक सूत्रों के अनुसार भारत पूरे घटनाक्रम पर “करीबी और सतत निगरानी” बनाए हुए है। भारत ने पिछले रविवार (22 फरवरी) को ही अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हमले की कड़े शब्दों में निंदा की थी।
भारत ने अफगानिस्तान की एकता व संप्रभुता के प्रति अपना समर्थन भी जताया था। भारतीय अधिकारी वैसे मौजूदा हालात के लिए पाकिस्तान के आक्रामक रवैये को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
भारत की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं जताने को रणनीतिक चुप्पी इसलिए माना जा रहा है कि शुक्रवार को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और पाकिस्तान सेना के आधिकारिक सोशल मीडिया के जरिए अफगानिस्तान की तरफ से हुई कार्वाई के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया गया है।
रक्षा मंत्री आसिफ ने एक्स पर लिखा है कि तालिबान ने अफगानिस्तान को ‘भारत की कॉलोनी’ बना दिया है और तालिबान अब भारत का छद्म (प्राक्सी) के तौर पर अफगानिस्तान से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। पाक सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहम शरीफ चौधरी ने कहा कि ‘पाकिस्तान में हर आतंकी घटना के पीछे भारतीय स्पॉन्सरशिप, सहायता और डिजाइन है।’
भारत के खिलाफ हमेशा दुष्प्रचार करने वाले उक्त प्रवक्ता ने यह कहा है कि भारत तालिबान के जरिए टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी जैसे आतंकी संगठनों को मदद करने में कर रहा है। दिल्ली व काबुल एक साथ हैं। पाकिस्तान इस तरह का अनर्गल दावा पहले भी कहता रहा है और भारत ने हमेशा इन दावों को निराधार बताया है।
22 फरवरी को भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा था कि, “रमजान के महीने में किये गये इन हमलों से अफगानिस्तान में महिलाएं, बच्चे समेत कई आम नागरिक मारे गये हैं। यह पाकिस्तान की तरफ अपनी आंतरिक विफलताओं को बाहरी मुद्दों में बदलने की एक और कोशिश है।
भारत अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता का समर्थन करता है।” सनद रहे कि अगस्त, 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद पाकिस्तान में जश्न का माहौल था जबकि भारत में चिंता थी। अब हालात यह है कि तालिबान व पाकिस्तान के बीच जंग है जबकि पिछले एक वर्ष के दौरान भारत व अफगानी सरकार के बीच संबंध लगातार सुधर रहे हैं।
पिछले साल अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री भारत का दौरा कर चुके हैं। काबुल स्थित भारतीय दूतावास में काम-काज सामान्य हो चुके है। भारत लगातार अफगानिस्तानी नागरिकों की भलाई के लिए मदद कर रहा है। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि भारत का प्राथमिक उद्देश्य अफगानिस्तान में स्थिरता सुनिश्चित करना है, क्योंकि अस्थिरता का सीधा असर क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत की पश्चिमी सीमाओं पर पड़ सकता है।
उधर, चीन, रूस और तुर्किये सहित कई देशों ने अफगानिस्तान व पाकिस्तान से संयम बरतने और वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। इस व्यापक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता प्रयासों के बीच भारत ने खुद को सार्वजनिक रूप से किसी मध्यस्थ की भूमिका में प्रस्तुत नहीं किया है।
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