Vindhya Expressway Update: पूर्वांचल से दिल्ली तक सफर को आसान बनाने वाला विंध्य एक्सप्रेस-वे फिलहाल कागजों में ही अटका हुआ है. जिस प्रोजेक्ट से लोगों को 8–9 घंटे में दिल्ली-एनसीआर पहुंचने की उम्मीद थी, वही अब सर्वे एजेंसी न मिलने के कारण धीमी रफ्तार हो गई है.
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Vindhya Expressway Update: विंध्य एक्सप्रेस-वे का सर्वे कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है, जिससे पूरी परियोजना शुरुआती स्तर पर ही अटकी हुई है. सर्वे के लिए एजेंसी तय न होने के कारण जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ पा रही है. प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल प्रगति रिपोर्ट शून्य ही बनी हुई है.
प्रदेश के आर्थिक स्थिती को मिलेगी मजबूती
इस परियोजना को गंगा एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की योजना है, जिससे पूर्वांचल, मध्यांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होगी. यह कनेक्शन प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक विकास को नई गति देगा तथा विभिन्न क्षेत्रों के बीच आवागमन को अधिक सुगम और तेज बनाएगा.
प्रस्तावित योजना के अनुसार
विंध्य एक्सप्रेस-वे प्रयागराज से शुरू होकर जौनपुर, भदोही, वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर होते हुए सोनभद्र तक जाएगा. यह मार्ग न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक शहरों को जोड़ेगा बल्कि पूर्वी यूपी के दूरस्थ इलाकों को भी मुख्यधारा के विकास से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
इस एक्सप्रेस-वे के बनने से सोनभद्र और चंदौली जैसे जिलों के लोगों के लिए दिल्ली-एनसीआर तक की यात्रा का समय घटकर लगभग 8 से 9 घंटे रह जाएगा. इससे न केवल यात्रा आसान होगी बल्कि व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगी.
सीएम की अध्यक्षता में बैठक
परियोजना को लेकर 20 अप्रैल को लखनऊ में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जिसमें अब तक की प्रगति और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी. इस बैठक में सर्वे एजेंसी चयन, भूमि अधिग्रहण और निर्माण की समयसीमा जैसे अहम मुद्दों पर निर्णय लिए जाने की संभावना है.
सरकार का टारगेट क्या है?
प्रयागराज में इस प्रोजेक्ट के लिए प्रशासनिक स्तर पर एक कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें एडीएम, एसडीएम और अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हैं. इस कमेटी को लेआउट प्लान तैयार करने और भूमि अधिग्रहण की संभावनाओं का अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण को इस परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई है. सरकार का लक्ष्य है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तीन वर्षों के भीतर पूरा किया जाए, जिससे प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तेज और आधुनिक सड़क नेटवर्क विकसित हो सके.
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