फ्रांस ने US को फिर दिखाया ताव… ट्रंप के समधी से कहा- आप यहां काम नहीं कर पाएंगे – AajTak

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रिश्तेदारों को भी अमेरिकी प्रशासन में सेट कर रखा है. ट्रंप के समधी चार्ल्स कुशनर फ्रांस में अमेरिका के राजदूत हैं. जबकि चार्ल्स कुशनर के बेटे जेरेड कुशनर ट्रंप के सीनियर एडवाइजर रह चुके हैं. लेकिन रिश्तेदारी और कूटनीति जब साथ साथ निभानी पड़े तो दिक्कतें आती ही है. यही समस्या अभी ट्रंप के सामने आई है. 
इसे लेकर अमेरिका और फ्रांस के बीच कूटनीतिक टकराव की नौबत आ गई है. स्थिति यहां तक बिगड़ी है कि फ्रांस के विदेश मंत्री ने तो यह भी कह दिया है कि फ्रांस में टॉप US डिप्लोमैट को एक समन का जवाब देना होगा और जब तक वह ऐसा नहीं करते हैं तबतक उन्हें फ्रांसीसी सरकारी अधिकारियों से मिलने की इजाजत नहीं होगी. जिस अमेरिकी राजनयिक को लेकर फ्रांस अमेरिका के बीच तनाव पैदा हुआ है वो ट्रंप के समधी चार्ल्स कुशनर ही हैं. 
क्यों हुआ तनाव?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका ने एक फ्रांसीसी मामले पर सार्वजनिक बयान दिया. दरअसल फ्रांस के शहर लियोन में एक 23 वर्षीय दक्षिणपंथी कार्यकर्ता Quentin Deranque की मौत हो गई.  रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें वामपंथी अतिवादियों ने पीट-पीटकर मार दिया. 
अमेरिकी काउंटर टेररिज्म ब्यूरो और पेरिस में अमेरिकी दूतावास ने इस घटना पर बयान जारी किया. पिछले हफ़्ते X पर एक पोस्ट में स्टेट डिपार्टमेंट के काउंटर टेररिज्म ब्यूरो ने कहा, “फ्रांस में हिंसक रेडिकल लेफ्टिज्म बढ़ रहा है और क्वेंटिन डेरांके की मौत में इसकी भूमिका यह दिखाती है कि यह पब्लिक सेफ्टी के लिए कितना खतरा है.”
पेरिस में अमेरिकी दूतावास ने भी यही बयान फ्रेंच में पोस्ट किया.
वे बतौर राजदूत नहीं काम कर पाएंगे
फ्रांस की सरकार ने इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल और राजनीतिक बयान करार दिया. फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बैरोट ने कहा कि वे इस त्रासदी को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने से इनकार करते हैं, क्योंकि यह एक फ्रांसीसी परिवार की शोक की घटना है. 
बैरोट ने कहा कि फ्रांस को कुशनर के साथ कमेंट्स पर बात करनी चाहिए. 
मंगलवार को फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने राजदूत चार्ल्स कुशनर की गैरहाजिरी को “हैरानी की बात” बताया, जो डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि इससे चार्ल्स कुशनर की एक राजदूत के तौर पर सेवा करने की क्षमता पर असर पड़ेगा.
बैरोट ने पब्लिक ब्रॉडकास्टर फ्रांस इन्फो से बात करते हुए कहा, “ज़ाहिर है, इससे हमारे देश में अपने मिशन को पूरा करने की उनकी क्षमता पर असर पड़ेगा.”
हमें यह मंज़ूर नहीं है…
बैरोट ने कहा, “हमें उनसे एक्सप्लेनेशन लेना होगा.” “हमें यह मंज़ूर नहीं है कि दूसरे देश आकर नेशनल पॉलिटिकल डिबेट में दखल दें, खुद को उसमें शामिल करें.”
विदेश मंत्री ने बताया कि कुशनर के साथ झगड़े से अमेरिका-फ्रांस के बड़े रिश्तों पर असर नहीं पड़ना चाहिए. 
फ्रांस के विदेश मंत्री कहा कि कुशनर “खुद पर मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं. क्योंकि एक एम्बेसडर को अपना काम करने के लिए, उसे सरकार के सदस्यों तक पहुंच की जरूरत होती है. यह बेसिक शिष्टाचार की बातें हैं.”
उन्होंने कहा, “जब सफाई देने की जरूरत होती है, तो एम्बेसडर को बुलाने से ज़्यादा आम बात कुछ नहीं है, उन्हें सफाई देनी ही पड़ेगी.” “जब ये  सफाई दे दी जाती है, तो फ्रांस में US एम्बेसडर जाहिर है, फ्रांसीसी सरकार के सदस्यों तक फिर से पहुंच बना लेंगे.”
अमेरिकी दूतावास ने सोमवार को तय मीटिंग से पहले एसोसिएटेड प्रेस की कमेंट रिक्वेस्ट का जवाब नहीं दिया, और मंगलवार को फॉलो-अप रिक्वेस्ट का भी तुरंत कोई जवाब नहीं मिला. 
फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा कि, “हाजिर न होना उनकी पर्सनल जिम्मेदारी है.” 
पिछले साल भी हुआ था मामला
 पिछले साल अगस्त में भी फ्रांस ने कुशनर को फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों को लिखे एक लेटर के लिए भी समन भेजा था. इस लेटर में कुशनर ने कहा था कि फ्रांस ने एंटीसेमिटिज्म से लड़ने के लिए काफी कुछ नहीं किया. विदेश मंत्रालय ने उनके आरोपों को खारिज किया. 
उस समय भ  कुशनर ने भी समन का जवाब नहीं दिया, बल्कि इस मामले पर जवाब भेजने के लिए अपना नंबर 2 भेजा. 
 
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