बजट 2026 के बाद भारत में मोबाइल सस्ते होंगे या नहीं? जानिए सरकार के ऐलान का असली मतलब – News24 Hindi

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Are Mobile Phone Getting Cheaper After Budget 2026: जैसे ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में बजट 2026 पेश करने के लिए खड़ी हुईं, देश के करोड़ों लोगों के मन में एक ही सवाल था क्या अब नया स्मार्टफोन सस्ता मिलेगा? इसका सीधा जवाब है- अभी नहीं. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. सरकार ने कीमतें घटाने की सीधी घोषणा भले न की हो, लेकिन आने वाले समय में राहत की नींव जरूर रख दी है.
बजट 2026 में सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े सेक्टर को लेकर अहम फैसले किए. लिथियम-आयन सेल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कैपिटल गुड्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) में छूट को आगे बढ़ाया गया है. अब यह छूट बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम तक भी लागू होगी. इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले क्रिटिकल मिनरल्स और अहम कंपोनेंट्स को भी कम ड्यूटी स्लैब में लाया गया है.
मैन्युफैक्चरिंग के लिए 40,000 करोड़ का बड़ा पैकेज
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत 40,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन का ऐलान किया है. इसका मकसद भारत में ही मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना है, ताकि कंपनियां ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्शन देश के अंदर करें और आयात पर निर्भरता कम हो.
वित्त मंत्री ने क्या कहा
लोकसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ग्रीन मोबिलिटी और एनर्जी सिक्योरिटी को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला लिया गया है. उन्होंने बताया कि लिथियम-आयन सेल और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम से जुड़े उपकरणों पर कस्टम ड्यूटी में छूट से देश में निवेश, रोजगार और इनोवेशन को मजबूती मिलेगी. इसके साथ ही इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को भी आगे बढ़ाया जाएगा.
उपभोक्ताओं को तुरंत राहत क्यों नहीं
यहां सबसे अहम बात समझने वाली है. बजट 2026 का फोकस सीधे ग्राहकों को सस्ता फोन देने पर नहीं है. सरकार ने उन लागतों को कम करने की कोशिश की है, जो कंपनियों को प्रोडक्शन के दौरान उठानी पड़ती हैं. पहले कच्चे माल और मशीनों पर ज्यादा ड्यूटी लगती थी, जिसका असर फोन की कीमत पर पड़ता था. अब इनपुट कॉस्ट कम होगी, लेकिन इसका फायदा ग्राहक तक पहुंचेगा या नहीं, यह पूरी तरह कंपनियों के फैसले पर निर्भर करता है.
कीमतें घटेंगी या नहीं, फैसला कंपनियों का
सरकार ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है, जिससे कंपनियां कीमतें घटाने को मजबूर हों. Apple, Samsung, Xiaomi, Oppo या Vivo जैसी कंपनियां अपनी रणनीति के हिसाब से तय करेंगी कि वे लागत में हुई बचत को ग्राहकों तक पहुंचाएं या नहीं. इसलिए शॉर्ट टर्म में स्मार्टफोन सस्ते होने की गारंटी नहीं है.
‘मेक इन इंडिया’ पर पूरा फोकस
बजट 2026 में साफ दिखता है कि सरकार का जोर मेक इन इंडिया, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और PLI स्कीम्स पर है. लक्ष्य यह है कि कंपनियों को लंबे समय के लिए भरोसेमंद माहौल मिले, ताकि वे भारत में बड़े स्तर पर निवेश करें और यहां मैन्युफैक्चरिंग बढ़े.
इंडस्ट्री में अब भी चिंता
हालांकि, इंडस्ट्री के सभी लोग इस बजट से संतुष्ट नहीं हैं. टेकARC के रिसर्च एनालिस्ट फैसल कावूसा का मानना है कि स्मार्टफोन और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को उम्मीद के मुताबिक सीधी राहत नहीं मिली. उनका कहना है कि GST में कटौती या फिनिश्ड प्रोडक्ट्स पर तुरंत ड्यूटी कम किए बिना कीमतों में स्थिरता लाना मुश्किल होगा. मौजूदा सप्लाई चेन की अनिश्चितता अभी भी कंपनियों के लिए चुनौती बनी हुई है.
तो क्या अगला स्मार्टफोन सस्ता होगा
ईमानदार जवाब यही है संभव है, लेकिन अभी नहीं. बजट 2026 में किए गए फैसले लंबे समय में मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट कम कर सकते हैं. अगर कंपनियां चाहें, तो भविष्य में इसका असर कीमतों पर दिख सकता है. लेकिन फिलहाल, आपके अगले स्मार्टफोन की कीमत इस बात पर निर्भर करेगी कि ब्रांड अपने फायदे का कितना हिस्सा ग्राहकों के साथ साझा करते हैं.
ये भी पढ़ें- Union Budget 2026: सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए बजट में बड़ा ऐलान, लॉन्च होगा मिशन 2.0

Are Mobile Phone Getting Cheaper After Budget 2026: जैसे ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में बजट 2026 पेश करने के लिए खड़ी हुईं, देश के करोड़ों लोगों के मन में एक ही सवाल था क्या अब नया स्मार्टफोन सस्ता मिलेगा? इसका सीधा जवाब है- अभी नहीं. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. सरकार ने कीमतें घटाने की सीधी घोषणा भले न की हो, लेकिन आने वाले समय में राहत की नींव जरूर रख दी है.
बजट 2026 में सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े सेक्टर को लेकर अहम फैसले किए. लिथियम-आयन सेल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कैपिटल गुड्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) में छूट को आगे बढ़ाया गया है. अब यह छूट बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम तक भी लागू होगी. इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले क्रिटिकल मिनरल्स और अहम कंपोनेंट्स को भी कम ड्यूटी स्लैब में लाया गया है.
मैन्युफैक्चरिंग के लिए 40,000 करोड़ का बड़ा पैकेज
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत 40,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन का ऐलान किया है. इसका मकसद भारत में ही मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना है, ताकि कंपनियां ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्शन देश के अंदर करें और आयात पर निर्भरता कम हो.
वित्त मंत्री ने क्या कहा
लोकसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ग्रीन मोबिलिटी और एनर्जी सिक्योरिटी को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला लिया गया है. उन्होंने बताया कि लिथियम-आयन सेल और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम से जुड़े उपकरणों पर कस्टम ड्यूटी में छूट से देश में निवेश, रोजगार और इनोवेशन को मजबूती मिलेगी. इसके साथ ही इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को भी आगे बढ़ाया जाएगा.
उपभोक्ताओं को तुरंत राहत क्यों नहीं
यहां सबसे अहम बात समझने वाली है. बजट 2026 का फोकस सीधे ग्राहकों को सस्ता फोन देने पर नहीं है. सरकार ने उन लागतों को कम करने की कोशिश की है, जो कंपनियों को प्रोडक्शन के दौरान उठानी पड़ती हैं. पहले कच्चे माल और मशीनों पर ज्यादा ड्यूटी लगती थी, जिसका असर फोन की कीमत पर पड़ता था. अब इनपुट कॉस्ट कम होगी, लेकिन इसका फायदा ग्राहक तक पहुंचेगा या नहीं, यह पूरी तरह कंपनियों के फैसले पर निर्भर करता है.
कीमतें घटेंगी या नहीं, फैसला कंपनियों का
सरकार ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है, जिससे कंपनियां कीमतें घटाने को मजबूर हों. Apple, Samsung, Xiaomi, Oppo या Vivo जैसी कंपनियां अपनी रणनीति के हिसाब से तय करेंगी कि वे लागत में हुई बचत को ग्राहकों तक पहुंचाएं या नहीं. इसलिए शॉर्ट टर्म में स्मार्टफोन सस्ते होने की गारंटी नहीं है.
‘मेक इन इंडिया’ पर पूरा फोकस
बजट 2026 में साफ दिखता है कि सरकार का जोर मेक इन इंडिया, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और PLI स्कीम्स पर है. लक्ष्य यह है कि कंपनियों को लंबे समय के लिए भरोसेमंद माहौल मिले, ताकि वे भारत में बड़े स्तर पर निवेश करें और यहां मैन्युफैक्चरिंग बढ़े.
इंडस्ट्री में अब भी चिंता
हालांकि, इंडस्ट्री के सभी लोग इस बजट से संतुष्ट नहीं हैं. टेकARC के रिसर्च एनालिस्ट फैसल कावूसा का मानना है कि स्मार्टफोन और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को उम्मीद के मुताबिक सीधी राहत नहीं मिली. उनका कहना है कि GST में कटौती या फिनिश्ड प्रोडक्ट्स पर तुरंत ड्यूटी कम किए बिना कीमतों में स्थिरता लाना मुश्किल होगा. मौजूदा सप्लाई चेन की अनिश्चितता अभी भी कंपनियों के लिए चुनौती बनी हुई है.
तो क्या अगला स्मार्टफोन सस्ता होगा
ईमानदार जवाब यही है संभव है, लेकिन अभी नहीं. बजट 2026 में किए गए फैसले लंबे समय में मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट कम कर सकते हैं. अगर कंपनियां चाहें, तो भविष्य में इसका असर कीमतों पर दिख सकता है. लेकिन फिलहाल, आपके अगले स्मार्टफोन की कीमत इस बात पर निर्भर करेगी कि ब्रांड अपने फायदे का कितना हिस्सा ग्राहकों के साथ साझा करते हैं.
ये भी पढ़ें- Union Budget 2026: सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए बजट में बड़ा ऐलान, लॉन्च होगा मिशन 2.0

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